भारत इस समय एक बड़े खाद्यान्न संकट की कगार पर खड़ा है. देश में मौसम के बदलते मिजाज और वैश्विक परिस्थितियों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में वैश्विक मंच पर ऊर्जा, फर्टिलाइजर और खाद्यान्न संकट को लेकर गहरी आशंका व्यक्त की है. वर्तमान में दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और तनाव के कारण कच्चे तेल और रासायनिक खादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है. भारत में इस साल मानसून के दौरान असमान बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण देश के कई राज्यों में सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है. महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे के कारण सोयाबीन, कपास और मक्के की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस बीच, मौसम वैज्ञानिकों ने 'सुपर अल नीनो' को लेकर चेतावनी दी है. अल नीनो के सक्रिय होने से आने वाले समय में सर्दियों के दौरान तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, जिससे हवा में नमी कम हो जाएगी. इसका सीधा नुकसान रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं के उत्पादन पर पड़ेगा. सरकार के अनुसार, देश में फिलहाल पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन मौसम का यह असंतुलन भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. कृषि क्षेत्र में पैदा हो रही इस चुनौती से निपटने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है.