पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने चुनाव आयोग के भीतर चल रहे हालिया विवाद पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक और कानूनी प्रावधानों के तहत होती है. आयोग में कोई भी फैसला या तो सर्वसम्मति से लिया जाता है या फिर बहुमत (मेजॉरिटी) के आधार पर तय होता है. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पास कोई विशेष वीटो पावर नहीं होती है और सभी चुनाव आयुक्तों का दर्जा समान होता है.