दिल्ली में तेजिंदर बग्गा को पकड़ने आई पंजाब पुलिस पर ही क्यों दर्ज हो गया अपहरण का केस, जानें पूरी वजह

दिल्ली के जनकपुरी थाने में तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के परिजनों ने बताया कि 10-15 लोग उनके घर में घुस आए और वो तेजिंदर को अपने साथ ले जाने लगे... जब तेजिंदर और उनके पिता ने इसका विरोध किया तो उन्होंने पिता के साथ मारपीट की और उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया, जिसके बाद पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर लिया.

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पंजाब पुलिस ने दिल्ली में घर से किया गिरफ्तार पंजाब पुलिस ने दिल्ली में घर से किया गिरफ्तार

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2022,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST
  • 1 अप्रैल को बग्गा के खिलाफ हुआ था केस
  • 6 मई को पंजाब पुलिस ने बग्गा को घर से पकड़ा

दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार देर रात मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद घर भेज दिया गया. वहीं बग्गा की गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस भी दर्ज कर लिया है.

दरअसल पंजाब पुलिस ने जिस तरह से बग्गा की गिरफ्तारी की उस पर सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल है कि क्या एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में किसी को भी गिरफ्तार करने पहुंच सकती है? अगर हां, तो क्या गिरफ्तारी से पहले दूसरे राज्य की पुलिस को इसकी जानकारी देना जरूरी है? तो आइए आपको ऐसे तमाम सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं.

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संगीन अपराध पर ही दूसरे राज्य जा सकती है पुलिस

पुलिस रेग्युलेशन के मुताबिक एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में गिरफ्तारी के लिए तभी जाएगी, जब अपराध संगीन हो. यानी उस अपराध की सजा कम से कम सात साल या फिर उससे ज्यादा हो.

गिरफ्तारी से पहले देनी होती है संबंधित पुलिस को सूचना

नियम कहता है कि अगर किसी राज्य या जिले की पुलिस दूसरे राज्य या जिले में गिरफ्तारी के लिए जाती है तो उस राज्य या जिले की पुलिस को गिरफ्तारी से पहले सिर्फ फोन करना, मैसेज भेजना या मौखिक तौर पर जानकारी देना ही काफी नहीं होता है. पुलिस को उस राज्य या जिले या लोकल थाने की पुलिस के पास जनरल डायरी एंट्री करवानी भी जरूरी होती है.

इतना ही नहीं, गिरफ्तारी के लिए लोकल पुलिस को भी ले जाना जरूरी है. गिरफ्तारी के लिए पहुंचे पुलिसवालों की संख्या और उनके पास मौजूद हथियारों के बारे में भी लोकल थाने में सूचना देना जरूरी है.

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गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेशी जरूरी

नियम के मुताबिक पुलिस को गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर आरोपी को संबंधित अदालत में पेश करना जरूरी होता है. अगर दूरी या किसी और वजह से ऐसा संभव नहीं है, तो गिरफ्तारी वाली जगह के नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी को पेश कर प्रोडक्शन वारंट लेना जरूरी होता है.

 

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