भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की कश्मीर पर की गई टिप्पणी को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का केंद्र शासित प्रदेश है और इस मामले में किसी बाहरी पक्ष को बोलने का कोई हक नहीं है. इसी ब्रीफिंग में मंत्रालय ने भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक और उसके बाद जारी साझा बयान की भी जानकारी दी. फिलिस्तीन पर भारत ने दो राष्ट्र समाधान के अपने रुख को दोहराया.
मामले की शुरुआत तब हुई जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि सभी विवादों को, खासकर दक्षिण एशिया के विवादों को, जिनमें कश्मीर भी शामिल है, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक सुलझाया जाना चाहिए.
यह पहली बार नहीं है जब तुर्किए ने किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाया है. इसी को लेकर एक पत्रकार ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से भारत की प्रतिक्रिया पूछी.
जायसवाल ने कहा कि तुर्किए के राष्ट्रपति ने अपने संयुक्त राष्ट्र महासभा के भाषण में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का जो जिक्र किया, वह गैरजरूरी है और भारत उसे खारिज करता है. उन्होंने कहा कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है. आसान शब्दों में, देश की सीमा और उस पर देश के अपने अधिकार का सवाल है. जायसवाल के मुताबिक इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष को दखल देने या बोलने का कोई अधिकार नहीं है.
इसी ब्रीफिंग में एक और पत्रकार ने तीन देशों के साझा बयान के बारे में पूछा. जायसवाल ने बताया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. बैठक के बाद तीनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया, जिसमें उनकी सामूहिक राय रखी गई है. इसमें कई आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दे हैं, साथ ही कुछ राजनीतिक मुद्दे भी शामिल हैं. जहां तक फिलिस्तीन पर भारत के अपने नजरिए का सवाल है, तो भारत दो राष्ट्र समाधान के पक्ष में है. जायसवाल ने कहा कि इसके बारे में सभी अच्छी तरह जानते हैं.
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