तमिलनाडु सरकार ने पड़ोसी राज्यों को रफ स्टोन, एम-सैंड, मेटल जेली और अन्य निर्माण सामग्री की सप्लाई पर तीन महीने के लिए रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि राज्य में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, आवास और इंडस्ट्रियल परियोजनाओं के कारण निर्माण सामग्री की घरेलू मांग काफी बढ़ गई है. यह प्रतिबंध कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश पर लागू होगा, जबकि पुडुचेरी और कराईकल को इससे छूट दी गई है.
यह फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया. सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में तेजी से शहरीकरण और विकास कार्य चल रहे हैं, जिससे निर्माण सामग्री की मांग लगातार बढ़ रही है. मौजूदा खदानों से होने वाला उत्पादन राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
सरकार ने कहा कि बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री पड़ोसी राज्यों को भेजे जाने से तमिलनाडु में आर्टिफिशियल मांग-आपूर्ति असंतुलन पैदा हो गया है. इससे स्थानीय बाजार में निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में राज्य के सार्वजनिक और निजी विकास कार्यों के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है.
क्या कहा गया है आदेश में
आदेश में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में रफ स्टोन की कोई स्पेशल कमी नहीं है, इसलिए इस अस्थायी रोक का उन राज्यों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा. प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को कड़ी निगरानी रखने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तमिलनाडु के खनन और खनिज परिवहन से जुड़े कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को पत्र लिखकर इस फैसले में राहत देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि तिरुनेलवेली, तेनकासी और कन्याकुमारी जिलों से आने वाली निर्माण सामग्री केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए बेहद अहम है. केरल में उपयुक्त पत्थरों की सीमित उपलब्धता के कारण इस रोक से कई महत्वपूर्ण हाईवे परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.
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