AIADMK के विरोधी गुटों के बीच सुलह होने के कुछ दिनों बाद, तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर JCD प्रभाकर ने मंगलवार को घोषणा की कि 13 मई को हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान TVK सरकार (सीएम विजय) के पक्ष में वोट करने वाले विपक्षी पार्टी के 21 विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
यह फैसला AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) की ओर से मामले को खत्म करने के औपचारिक अनुरोध के बाद लिया गया है.
बता दें कि बागी नेताओं शनमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले AIADMK गुट के कम से कम 25 विधायकों ने विजय के नेतृत्व वाली TVK पार्टी के पक्ष में मतदान किया था, जिससे विधानसभा में उसके सपोर्ट की संख्या 119 से बढ़कर 144 हो गई, और अभिनेता से राजनेता बने विजय को आराम से बहुमत मिल गया.
दूसरी तरफ, ई पलानीस्वामी के प्रति वफादार बचे 22 विधायकों ने विजय के खिलाफ मतदान किया, जिससे पार्टी के भीतर फूट साफ दिखी.
इस घटनाक्रम से पलानीस्वामी की स्थिति काफी कमजोर हो गई, और अब उनके खेमे में केवल 22 विधायक ही बचे थे.
हालांकि, एआईएडीएमके के बागी विधायकों में से पांच ने पार्टी प्रमुख EPS का साथ देना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही विधानसभा में पलानीस्वामी का समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है.
इस बीच, विद्रोह के बावजूद, बागी विधायकों के पास दलबदल विरोधी कानून के तहत टीवीके में औपचारिक रूप से विलय करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी, जिसके लिए एक विधायी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है.
एआईएडीएमके के मामले में, यह सीमा 31 विधायकों की थी, जिससे बागी समूह के पास आवश्यक संख्या से कम विधायक रह गए.
इसके बाद, प्रतिद्वंद्वी पार्टी गुटों ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से संपर्क किया और दलबदल विरोधी कानून के तहत एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की.
गौरतलब है कि विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके के पक्ष में मतदान करने वाले 25 विधायकों में से चार ने कुछ ही दिन पहले औपचारिक रूप से विजय की पार्टी में शामिल हो गए.
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में, एआईएडीएमके ने 47 सीटें हासिल कीं, जबकि विजय के नेतृत्व वाली टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, हालांकि वह अकेले दम पर बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई.
इसके बाद टीवीके ने कांग्रेस, आईयूएमएल, वीसीके और वामपंथी दलों के समर्थन से सरकार बनाई. फिर एआईएडीएमके के बागी विधायकों के एक समूह ने सत्तारूढ़ गठबंधन को समर्थन दिया, जिससे विपक्षी दल में संभावित विभाजन की अटकलें लगने लगीं थीं.
अनघा