'न अफसोस... न माफी, उल्टा आदेश', मार्को रुबियो के बयान पर राहुल गांधी का सरकार पर तीखा वार

ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. राहुल गांधी ने अमेरिका पर संवेदना या माफी व्यक्त करने के बजाय भारत को निर्देश देने की भाषा अपनाने का आरोप लगाया है.

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी. (Photo: PTI) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:16 PM IST

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को ओमान तट के पास तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत के मामले में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बावजूद अमेरिका ने न तो खेद जताया और न ही माफी मांगी, बल्कि उल्टा भारत को आदेश दे रहा है.

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ ही दिन बाद न कोई पछतावा, न कोई माफी. इसके उलट अमेरिका आदेश दे रहा है. उनके शब्द पढ़िए- अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करें. किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोई भी स्वतंत्र देश ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं करेगा. लेकिन हमारे समझौता कर चुके प्रधानमंत्री चुप हैं. वे एक आज्ञाकारी सेवक की तरह सुनते हैं और आदेशों का पालन करते हैं. समझौता कर चुके प्रधानमंत्री देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेंगे, क्योंकि जो लोग देश का अपमान करते हैं, वे उन्हीं के नियंत्रण में हैं.'

कांग्रेस ने सरकार से मांगा कड़ा जवाब

कांग्रेस ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की टिप्पणियों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदना व्यक्त करने के बजाय अमेरिका ने भारत को चेतावनी देने का प्रयास किया. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई. भारत को अमेरिका से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए थी और अमेरिका को इसे स्वीकार करना चाहिए था. लेकिन मार्को रुबियो की टिप्पणियां संवेदना की नहीं बल्कि आदेश देने वाली भाषा को दर्शाती हैं. रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन नहीं करने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह पछतावे की नहीं बल्कि हुक्म देने की भाषा है.'

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जयशंकर के बयान पर भी उठाए सवाल

पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया घटना की गंभीरता के अनुरूप नहीं थी. खेड़ा ने कहा, 'नई दिल्ली की प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को और शर्मनाक बना दिया. विदेश मंत्री ने केवल इतना कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ घातक कार्रवाई उचित नहीं है.' उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'यह उचित नहीं है- जैसी भाषा किसी महंगे एयरपोर्ट सैंडविच के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, न कि ऐसे सैन्य हमले के लिए जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान चली गई हो. अमेरिका की कार्रवाई को अवैध, लापरवाह और अस्वीकार्य कहा जाना चाहिए था.'

मनीष तिवारी ने भी साधा निशाना

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री की टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए0 उन्होंने कहा कि रुबियो के बयान में न संवेदना दिखी, न सहानुभूति और न ही खेद. कांग्रेस सांसद ने कहा, 'मार्को रुबियो का रवैया बेहद आक्रामक और टकरावपूर्ण था. उनके बयान का निहितार्थ यह था कि जो कुछ हुआ, उसके लिए भारतीय नाविक खुद जिम्मेदार थे. किसी मित्र देश से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती. विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मार्को रुबियो के साथ बातचीत का विवरण जारी करना चाहिए. यह जानना दिलचस्प होगा कि उन्होंने इस कठोर भाषा का किस तरह जवाब दिया.'

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रुबियो और जयशंकर के बीच क्या बात हुई?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी विदेश विभाग ने रुबियो और जयशंकर के बीच हुई बातचीत का विवरण सार्वजनिक किया. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की. दोनों नेताओं ने होर्मुज की स्थिति पर चर्चा की. रुबियो ने कहा कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी के उल्लंघन और ईरानी तेल के अवैध परिवहन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.'

वहीं जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियों के साथ बातचीत के दौरान भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया. जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत हुई. मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया. वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है.'

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