PM आवास के बाहर प्रदर्शन और डिटेंशन... इस प्रोटेस्ट से राहुल गांधी ने क्या हासिल किया?

पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी के धरने और पुलिस कार्रवाई की तस्वीरों ने सियासी बहस तेज कर दी. इस घटनाक्रम ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला दिया, जबकि सरकार ने कार्रवाई को सुरक्षा कारणों से सही ठहराया.

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हिरासत में लिए जाने के दौरान राहुल गांधी को जबरन बस तक ले जाती पुलिस. (Photo: PTI) हिरासत में लिए जाने के दौरान राहुल गांधी को जबरन बस तक ले जाती पुलिस. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

यह किसी से छिपा नहीं है कि राजनीति में कई बार तस्वीरें और प्रतीक सबसे ज्यादा असर डालते हैं. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर जो कुछ हुआ, उसने भी ऐसा ही माहौल बना दिया. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पुलिस जबरन हटाती दिखी. इस दौरान उनकी नाक से खून निकलता नजर आया, कपड़ों पर धूल लगी थी और धक्का-मुक्की में उनका एक जूता भी निकल गया. हिरासत में ले जाते हुए उनकी तस्वीरें पूरे दिन चर्चा में रहीं. इन तस्वीरों ने कांग्रेस को वही राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया, जिसकी उसे तलाश थी. इससे पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस फिर से केंद्र में आती दिखी, जबकि पिछले कुछ समय से इस मुद्दे पर CJP के आंदोलन की ज्यादा चर्चा हो रही थी.

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इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का मानना है कि राहुल गांधी को हिरासत में लेना मोदी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से उल्टा पड़ सकता है. मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

राजदीप सरदेसाई के मुताबिक, अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दे दी जाती या संसद में इस मुद्दे पर चर्चा हो जाती, तो शायद कांग्रेस को वह मौका नहीं मिलता, जो अब इन तस्वीरों से मिल गया. उनके मुताबिक, इससे यह संदेश गया कि विपक्ष का नेता जनता के मुद्दे उठाने से रोका गया.

PM आवास के बाहर राहुल का धरना

प्रधानमंत्री आवास के बाहर इस तरह का विरोध प्रदर्शन बेहद कम देखने को मिला है. बताया जाता है कि इससे पहले 1999 में IC-814 विमान अपहरण के दौरान बंधकों के परिजनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास के बाहर धरना दिया था.

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अब यह बहस का विषय है कि राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास जैसे हाई सिक्योरिटी इलाके में जाकर प्रदर्शन करना कितना सही था. राहुल गांधी का कहना था कि छात्रों की आवाज देश तक पहुंचाने के लिए ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती थी. वहीं सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई को सही बताया.

तस्वीरों ने बदल दी चर्चा

राजनीति में कई बार एक तस्वीर पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल देती है. कांग्रेस के लिए मंगलवार की तस्वीरें कुछ ऐसी ही रहीं. एक तस्वीर में राहुल गांधी सड़क पर बैठे दिखाई दिए, जबकि पुलिस उन्हें उठाने की कोशिश कर रही थी. दूसरी तस्वीर में पुलिसकर्मी उन्हें हाथ और पैर पकड़कर ले जाते नजर आए. इसी दौरान उनकी नाक से खून भी निकलता दिखा. पुलिस बस में बैठाते समय उनकी सफेद टी-शर्ट पर भी खून के निशान दिखाई दिए. 

राहुल गांधी ने इस दौरान तंज कसते हुए कहा, "यही भारत का लोकतंत्र है." इस पर राजदीप सरदेसाई का कहना है कि कई बार सरकार जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखाकर अपने आलोचकों को और मजबूत कर देती है.

कांग्रेस के लिए क्यों अहम था यह प्रदर्शन?

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस को पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के मुद्दे पर फिर से राजनीतिक बढ़त लेने का मौका दिया. सोमवार को हुए बड़े प्रदर्शनों से साफ था कि युवाओं के एक वर्ग में सरकार के खिलाफ नाराजगी है.

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पिछले महीने जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन शुरू होने के बाद कांग्रेस खुलकर उसके साथ नहीं आई थी. पार्टी को यह आशंका थी कि कहीं इस आंदोलन का राजनीतिक फायदा किसी और दल को न मिल जाए. पिछले हफ्ते कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा जरूर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे थे, लेकिन राहुल गांधी इस आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे. इसी बीच CJP का आंदोलन लगातार चर्चा में रहा, जबकि कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान उतनी तेजी नहीं पकड़ पाया. राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बीजेपी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा था. हालांकि, पिछले हफ्ते देहरादून में राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों को उठाया और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए.

कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश

प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करके राहुल गांधी ने एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की. इससे वह एक बार फिर इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए. काफी लोगों के बीच यह धारणा बनने लगी थी कि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई CJP कर रही है. कांग्रेस नहीं चाहती थी कि यह पूरा मुद्दा उसके हाथ से निकल जाए, क्योंकि राहुल गांधी भी लंबे समय से इसी विषय पर सरकार को घेरते रहे हैं.

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इसके साथ ही कांग्रेस ने कोशिश की कि चर्चा सिर्फ शिक्षा मंत्री तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा जाए. राहुल गांधी ने भी कहा, "हम छात्रों पर हुई कार्रवाई का जवाब मांगने प्रधानमंत्री के आवास तक आए हैं."

पेपर लीक को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं. यह बहस भी जारी रहेगी कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करके राजनीतिक सीमा लांघी या नहीं. लेकिन इतना जरूर है कि मंगलवार की घटनाओं ने एक ऐसी तस्वीर छोड़ दी, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रह सकती है. कांग्रेस के लिए यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है.

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