संसद में हंगामे के बीच अखिलेश यादव-राहुल गांधी की अहम मुलाकात, 'चंदा चोरी' मुद्दे पर सरकार को घेरने की बनाई रणनीति!

मॉनसून सत्र के पहले दिन संसद में जोरदार हंगामे के बीच अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने चढ़ावा चोरी मामले पर विपक्ष की साझा रणनीति, सरकार को घेरने की तैयारी विस्तार से चर्चा की.

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अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने की मुलाकात.(Photo: PTI) अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने की मुलाकात.(Photo: PTI)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

संसद में अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले पर हंगामे के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव की महत्वपूर्ण मुलाकात हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने विपक्ष की संयुक्त रणनीति, सरकार को घेरने की तैयारी और आगामी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. बताया जा रहा है कि ये मुलाकात उस दौरान हुई, जब सदन में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संसद में संबंधित संशोधन विधेयक पेश कर रहे थे.

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की इस मुलाकात का मुख्य फोकस 'चंदा चोरी' मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता और संसद के अंदर व बाहर समन्वय को मजबूत करने पर था.

सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान कांग्रेस की ओर से ये इच्छा जताई गई कि 'चंदा चोरी' के संवेदनशील मुद्दे पर समाजवादी पार्टी भी खुलकर उसके साथ मैदान में आए. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी और मजबूत पार्टी है, जिसके कारण उसका समर्थन कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर जनता के बीच एक सुर में आवाज उठाने की संभावनाओं पर विचार किया.

इस उच्च स्तरीय मुलाकात में संसद के अंदर सभी विपक्षी दलों में एकजुटता बनाए रखने और विभिन्न राष्ट्रीय विषयों पर एक साझा रुख तय करने पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में परिसीमन (Delimitation) के संभावित मुद्दे और भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन किए जाने की बात मानी जा रही है. दोनों दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं.

वहीं, राहुल और अखिलेश की इस बैठक को संसद के अंदर और बाहर समूचे विपक्ष के समन्वय को और अधिक मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. दोनों शीर्ष नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को एक जुट होकर अपनी बात रखनी होगी. आने वाले दिनों में इसका असर सदन की कार्यवाही में साफ देखने को मिल सकता है.

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