'हमारे वीर सैनिकों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी', लाल क़िले से ऑपरेशन सिंदूर पर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल क़िले की प्राचीर से बोला, "भारत ने तय कर लिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बहे. अब देशवासियों को भली-भांति पता चला है कि सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण और एकतरफा है."

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लाल क़िले की प्राचीर से पाकिस्तान पर गरजे PM मोदी (Photo: X/BJP) लाल क़िले की प्राचीर से पाकिस्तान पर गरजे PM मोदी (Photo: X/BJP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र ने लाल क़िले की प्राचीर से देश को संबोधित करते वक़्त 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र किया. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे वीर सैनिकों दुश्मनों को कल्पना से परे सजा दी. 

नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारी सेना ने वो करके दिखाया, जो कई दशकों तक कभी हुआ नहीं था. सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती पर घुसकर आतंकी ठिकाने को मिट्टी में मिला दिया. आतंकी इमारतों को खंडहर बना दिया. पाकिस्तान की नींद अभी भी उड़ी हुई है."

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उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में हुई तबाही इतनी बड़ी है कि रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. नई नई जानकारियां आ रही हैं. 

'खून और पानी एक साथ नहीं...'

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से कहा, "हमारा देश कई दशकों से आतंक को झेलता आया है. देश की सीने को छलनी कर दिया गया है. अब हमने न्यू नॉर्मल स्थापित किया. आतंकियों और आतंकियों को पालने-पोसने वालों को हम अलग-अलग नहीं मानेंगे. मानवता के समान दुश्मन हैं. उनके बीच कोई फर्क नहीं है."

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने तय कर लिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बहे. अब देशवासियों को भली-भांति पता चला है कि सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण और एकतरफा है. 

यह भी पढ़ें: 11 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, 85 गांव के सरपंच स्पेशल गेस्ट... स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से आज पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन

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'पिछले सात दशक से...'

पीएम मोदी ने कहा, "भारत से निकलती नदियों का पानी दुश्मनों के खेत को सींच रहा है और मेरे देश के किसान और मेरे देश की धरती पानी के बिना प्यासी है. यह एक ऐसा समझौता था, जो पिछले सात दशक से मेरे देश के किसानों का अकल्पनीय नुक़सान किया. अब हिंदुस्तान के हक का जो पानी है, उस पर सिर्फ हिंदुस्तान और यहां के किसानों का है. किसान और राष्ट्रहित में यह समझौता हमें मंजूर नहीं है."

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