लोकसभा में एक दिन पहले पीएमओ में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया था. हालांकि, इस बिल पर चर्चा की शुरुआत नहीं हो सकी थी. विपक्षी सदस्य चर्चा शुरू करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर अड़े हुए थे. एंटी पेपर लीक बिल पर आज लोकसभा में चर्चा हो रही है.
लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय तय किया गया था. विपक्ष ने समय दो घंटे बढ़ाने की मांग की. इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम 10 घंटे भी चर्चा के लिए तैयार हैं. इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने हाउस का सेंस लिया और फिर यह ऐलान कर दिया कि एंटी पेपर लीक बिल पर 10 घंटे चर्चा होगी.
शशि थरूर ने अपने संबोधन के बाद ट्विट किया, 'आखिरकार मुझे रात 10:40 बजे लोकसभा में 'पेपर लीक संशोधन बिल' पर बोलने का मौका मिला. वक्त की कमी की वजह से मुझे अपनी बात बहुत कम शब्दों में कहनी पड़ी, लेकिन मुझे जो नौ मिनट मिले, उनमें मैंने कुछ अहम बातें रखीं. इस दौरान चेयर ने बार-बार घंटी बजाई और आखिर में मेरा माइक भी बंद कर दिया.'
उन्होंने आगे लिखा, 'लेकिन मेरा मुख्य संदेश सीधा-सादा था: यह बिल उन लोगों के लिए सज़ा बढ़ाता है जो हमारे बच्चों के सपनों का सौदा करते हैं, लेकिन असल ज़रूरत सिस्टम को ठीक करने की है ताकि यह अपराध हो ही नहीं. मैंने इस दिशा में कई सुझाव भी दिए.
चूंकि इतनी देर रात सदन में ज़्यादातर सीटें खाली थीं, इसलिए मैंने बाहर मीडिया के सामने भी वही बात दोहराई.'
सरकार पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा, 'यह बिल यह बताना भूल गया कि जहां भी पेपर लीक होता है, वहां युवाओं पर लाठीचार्ज करने का प्रोविज़न होना चाहिए. युवाओं ने इस एजुकेशन सिस्टम से उम्मीद खो दी है. सरकार स्टूडेंट्स और युवाओं के साथ सख्ती से पेश आई है. उनका युवाओं से कनेक्शन खत्म हो गया है.'
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि छात्रों के हौसले को सलाम करता हूं. जिस तरह का दमनकारी व्यवहार छात्रों के साथ किया गया, सीवान में छात्रों पर एके-47 से गोली चलाई गई. हमारे संसदीय क्षेत्र औरंगाबाद में 12 नामजद और 1000 अज्ञात पर एफआईआर हुई है. सरकार ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि एफआईआर वापस होंगे, बिहार के सीएम ने भी कहा लेकिन पुलिस कह रही है कि हमें तो कोई आदेश ही नहीं मिला है. सुसाइड करने वाले छात्रों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी बात थी. वह कब दिया जाएगा. क्या पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं कि सजा कम थी. सरकार अपराध रोकने की बजाय होने के बाद कार्रवाई पर ज्यादा जोर दे रही है.
संसद के मॉनसून सत्र में माहौल गर्म ही रहा है. शुरुआती छह दिन लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई. राज्यसभा में भी पक्ष-विपक्ष, खासकर नेता सदन जेपी नड़्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी तकरार दिखी है. मंगलवार को राज्यसभा में एक अलग ही नजारा दिखा. सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे साथ-साथ चाय पीने गए. नेता सदन और नेता विपक्ष का साथ-साथ चाय पीने संसद की कैंटीन जाना, यह चर्चा का विषय रहा.
अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये समाजवादी पार्टी है. न यहां रूल बनाते हैं, ना रूल मानते हैं. ये रूल तोड़ने वाले हैं. चार मौके ऐसे आए, जब आयोग को अपने फैसले बदलने पड़े. सेवा आयोग ने 2012 की सारी कॉपियां जला दी गईं. सपा से पूछिए आरटीआई. इनकी हालत वो है, सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली. सौ पेपर लीक करवाकर राहुल गांधी अखिलेश यादव आंदोलन करने चले. लाठियां आज ही चलीं, या पहले भी चली हैं. हमने लाठियां खाई हैं. हमें अपने ही देश में तिरंगा फहराने के लिए जेल में डाला गया. यासीन मलिक को जेल में सिगरेट पीने की छूट मिलती थी और हमें भद्दी-भद्दी गालियां देकर पिटाई की जाती थी. उन्होंने यूपीए सरकार में पेपर लीक मामले गिनाए.
अनुराग ठाकुर के बयान पर सपा सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया है. सपा सांसद वेल में आ गए हैं और हंगामा कर रहे हैं. चेयर से कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सपा सांसदों से अपनी सीट पर जाने की अपील करते हुए कहा कि हम देखेंगे. निशिकांत दुबे ने कहा कि सपा सदन के नियमों को तोड़ रही है.
अनुराग ठाकुर ने कहा कि सपा के एक नेता ने बताया, कि युवाओं ने उनको भी भगा दिया कि आप क्यों आए हो यहां. अरे आपका ट्रैक रिकॉर्ड ही ऐसा है. जो माफिया हैं, उनको मिट्टी में मिलाने का काम मोदी सरकार करेगी. देश में पहला एंटी चीटिंग लॉ मोदी सरकार लेकर आई और उसमें संशोधन करने का बिल लेकर आई है. मुलायम सिंह और अखिलेश यादव क्या भाषण देते थे. अखिलेश जी कहते थे कि थोड़ी थोड़ी नकल तो हम सबने की होगी. इससे क्या है. हम सत्ता में आएंगे तो सब नकल करने वालों को छोड़ देंगे. वोट डालो सपा को. हमारी सरकार जब कल्याण सिंह की अगुवाई वाली यूपी में थी, राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री थे, शानदार काम किया था. राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बारे में यही कहना चाहूंगा कि खुद मियां फजीहत. अनुराग ठाकुर ने सपा की सरकार में हुए पेपर लीक के मामले गिनाए और कहा कि यूपी को इनकी पार्टी ने पेपर लीक प्रदेश बना दिया था. इनकी सरकार ने डॉक्टर अनिल यादव को लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बना दिया. जो लायक नहीं थे, उनको लायक बना दिया गया. लोक सेवा आयोग को यादव आयोग बना दिया. आज ये युवाओं की बात करते हैं. छात्रों का हक छीनने का काम अखिलेश यादव और इनकी सरकार ने किया. कोर्ट ने अनिल यादव को हटाया. तब युवाओं के हित कहां थे. क्या ये वापिस आने की बात करेंगे, तो फिर पेपर लीक कराएंगे. फिर लोकसेवा आयोग को एक जाति का आयोग बना देंगे.
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है. इसका शिकार युवा होता है. इस बीमारी का इलाज हम करेंगे, मुकम्मल करेंगे. हर मर्ज की दवा हमें मोदी सरकार में मिली है. हर जख्म का इलाज मोदी सरकार ने ही किया है. आतंकवाद-नक्सलवाद को जड़ से खतम करने का काम भी हमने ही किया है. हमारी सरकार युवाओं के साथ है और यह किया है कि ऐसा कानून लाएंगे, जो सख्त होगा. आज का यह कानून आप देखिए. 2024 के कानून में संशोधन करने के लिए लाए हैं. हम सिस्टम को और फुलप्रूफ करना चाहते हैं. तारीख पर तारीख न हो, इसके लिए सिस्टम बनाने जा रहे हैं. आप तो चर्चा के लिए तैयार नहीं थे, सदन चलने नहीं दे रहे थे. राहुल गांधी को लगा कि युवाओं ने पूछा नहीं, अखिलेश जी के साथ जाकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर लेट गए. आपकी तड़प समझ रहा हूं, अंदर जाने का मौका कभी नहीं मिलने वाला है. नीट एग्जाम में जैसे ही लीक जैसा कुछ होने की खबर आई, हमारी सरकार ने तीन दिन में फिर से परीक्षा कराने का निर्णय लिया. 40 हजार से ज्यादा सेंटर पर कराया और मात्र 45 दिनों में सारी प्रक्रिया पूरी कर ली, ये हमारी सरकार की युवाओं के लिए प्रतिबद्धता है. प्रियंका गांधी किस तरह से भोली सी शकल बनाकर गुमराह करती हैं, स्पीकर को भी मुस्कराने के लिए कहती हैं, प्रोफेसर वी कामाकोटी के बारे में जो टिप्पणी की, उसका भी जवाब देंगे. आरएसएस से होना कोई गुनाह नहीं. अगर होंगे भी, तो गर्व होना चाहिए. आप भी जॉइन कर लीजिए, थोड़े संस्कार आ जाएंगे. आपके पूरे परिवार की डिग्रियां जोड़ लें, तो उनके बराबर नहीं हो पाएंगी. देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जो भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करना चाहते हैं, उनका उपहास उड़ाते हैं. कांग्रेस यही करती आई है. कामकोटी विज्ञान के शिखर पर हैं. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम कर सकते हैं, तो भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी शोध कर सकते हैं. इतना ही कहूंगा, कि बिल आने पर रोक नहीं है कि संशोधन नहीं ला सकते. जहां जरूरत होगी, मोदी सरकार रिफॉर्म करेगी. यह कानून एक नजीर होगा. हमारी सरकार ने पेपर लीक में शामिल 13 के 13 लोगों की गिरफ्तारी करा दी, जो जेल में सड़ रहे हैं. नया बिल लेकर आ गए हैं और टास्क फोर्स बना दिया है नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में. जो उस आंदोलन को खराब करना चाहते थे, संसद की इस चर्चा में असामाजिक तत्व और गुंडे थे, उनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए. देश का युवा पेपर लीक की बात करने आया था, बेहतर सिस्टम की मांग करने आया था, वह पुलिस की गाड़ियां जलाने नहीं आए थे.
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सीबीआई, ईडी ये सभी एजेंसियां एक समय बहुत ताकतवर हुआ करती थीं. आज आपने इनको कमजोर कर दिया है. इनका इस्तेमाल केवल विपक्षी नेताओं पर किया जा रहा है. राइट टू इंफॉर्मेंशन, राइट टू एजुकेशन हम लेकर आए थे. आज क्या है, राइट टू इंफॉर्मेशन अब याद बन चुका है. एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. आपने सरकारी शिक्षण संस्थानों को कमजोर करने का काम किया है. गरीब बच्चे कहां जाएंगे. कोचिंग सिस्टम के खर्च को गरीब वर्ग वहन नहीं कर सकता. नीट परीक्षा के बाद देशभर में 21 छात्रों ने सुसाइड किया है. सरकार ने इसे लेकर क्या किया. पिछले 12 साल में 152 पेपर लीक हुए हैं. हम पिछले तीन साल से ये मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन आप विपक्ष को, विपक्ष के नेता को सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं.
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि हमारी पार्टी ने शुरू से ही कहा कि छात्रों की मांगें मानी जानी चाहिए. पेपर लीक पेपर लीक है. इसे कोई आंकड़ा सही नहीं ठहरा देता. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली सिर्फ एक सिस्टम नहीं, संविधान की ओर से दिए गए समानता के अधिकार का सशक्त माध्यम भी है. जो छात्र दिल्ली आए, उनकी आवाज सच्ची थी, सुनी जानी चाहिए थी और सुनी गई. परीक्षा रद्द होने की कीमत सब पर बराबर नहीं पड़ती. बाबा साहब ने संविधान में अवसर की समानता लिखा था. जब परीक्षा रद्द हो, तब उस बच्चे के पास परीक्षा में बैठने की सामर्थ्य बची हो. इस विधेयक का समर्थन करता हूं.
डिंपल यादव ने पेपर लीक पर सरकार को घेरते हुए कहा कि 2024 में जब यह बिल पास हो गया था, तब भी लीकेज क्यों हुई. यह षड़यंत्र है या फिर सरकार के सिस्टम में परमानेंट लीकेज है. पिछले 40 दिनों में 20 छात्रों ने सुसाइड किया है. उन्होंने एक-एक छात्र का नाम अपनी स्पीच में लिया और कहा कि हम युवाओं की प्रशंसा करते हैं जेनजी के हौसले और हिम्मत की सराहना करते हैं जो डरे नहीं. यह आंदोलन पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था. हमारे सभी सांसद, विधायक गए थे जंतर-मंतर, राजनीति करने नहीं गए थे. हम साथ खड़े होना चाहते थे. 18 जून को मैं भी गई और सोनम वांगचुक से मिली. लेकिन उस दिन सरकार ने क्या किया, अहिंसा के साथ बैठे लोगों को सफेद कफन पहनाने का काम किया. गांधी जी के विचारों को कफन पहनाने का काम किया. देश में लोकतंत्र है, लेकिन क्या वाकई में स्वतंत्रता है. हर प्रदेश से बच्चे आए, वे अपनी एकता दिखाना चाहते थे. अपनी बात रखने आए थे, चाहते थे कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो. सरकार ने क्या बर्ताव किया. सरकार को परिसीमन बिल पास कराना है. इसके लिए सांसदों पर दबाव बनाया जा रहा है कि आप इधर आ जाइए, उधर आ जाइए. लेकिन बच्चों पर दबाव नहीं बना पाए. आप तो घुटने टेक कर आ गए अमेरिका के सामने.
बिहार के गोपालगंज से जेडीयू के सांसद आलोक कुमार सुमन ने कहा कि पर्चा लीक और नकल सामाजिक बुराइयां हैं. भले ही समाज की नजर में यह अपराध है, लेकिन इनको खरीदता कौन है. देश को एक व्यापक नेशनल एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी के लिए भी तैयार रहना है. भारत के युवाओं की मेहनत भारत की सबसे बड़ी पूंजी है. इसे नकल माफिया की कमाई का साधन नहीं बनने देना चाहिए.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि जंतर-मंतर पर जिस मां का बच्चा था, उस मां पर क्या गुजर रही होगी. यह सोचिए. मैं भी एक मां हूं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई हम बाहर भी लड़ लेंगे, यहां बात छात्रों की है. सुप्रिया सुले ने श्रीकांत शिंदे की स्पीच को ही कोट करते हुए कहा कि क्या हालात बन गए हैं आपकी सरकार में. आपके सहयोगी भी कह रहे हैं कि धर्मेंद्र प्रधान ने 15 दिन पहले इस्तीफा दिया होता, तो ऐसा नहीं होता. मुरली मनोहर जोशी का तो सुन लेते. सुप्रिया सुले ने शिक्षा व्यवस्था पर घेरा, तब ट्रेजरी बेंच से किसी ने कुछ कहा. इस पर उन्होंने कहा कि हम तो पढ़ गए. तब बिजली भी थी, रास्ते भी थे, ट्रेन भी समय पर चलती थी. बुलेट ट्रेन से नहीं गए पढ़ने. रास्ते भी थे, शायद आपने चौड़े किए होंगे. उसमें भी हमारे किसान बिचारे की जमीन गई. सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज की एसआईटी जांच कराने की मांग की और कहा कि मैं ये नहीं कह रही कि किसने ऑर्डर दिया. समोसा चीन के पैसे से, चाय पाकिस्तान के पैसे से आई है, ये सब अब नहीं चलने वाला. उन्होंने महाराष्ट्र में पुलिस के सामने एक लड़की के अकेले खड़े होने की वायरल तस्वीर का भी उल्लेख किया और कहा कि हमने लड़की को जिसके लिए पढ़ाया, वह ताकत उस लड़की में है.
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही है. इस बिल पर 10 घंटे चर्चा होनी है. दोपहर दो बजे से चर्चा की शुरुआत हुई है. इस बिल पर चर्चा के लिए लोकसभा में कार्यवाही का समय बढ़ा दिया गया है. सदन का सेंस लेकर चेयर से जगदंबिका पाल ने कार्यवाही का समय 10 बजे रात तक बढ़ाने की घोषणा कर दी.
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जो फॉल्ट आया है, वह शिक्षा प्रणाली में है. 16-17 साल के जो बच्चे होते हैं, वह क्या फेस करते हैं, इसकी चर्चा भी जरूरी है. नीट की तैयारी एक-दो साल में नहीं, आठवीं कक्षा से शुरू होती है. दो-तीन साल कोटा में रहते हैं और वहां उनको बस रट्टा मारना पढ़ाया जाता है. न खेल, न दोस्ती... घर परिवार से बात नहीं...एक तरह से वे मशीन बन जाते हैं. जब घर जाते हैं, सब पूछते हैं कि कितनी तैयारी हुई. पड़ोसियों के बच्चों से, रिश्तेदार के बच्चों से तुलना की जाती है. प्रियंका जी, आपने एजुकेशन सिस्टम को लेकर इतनी टिप्पणी की, ये किसकी विरासत है. हमारी शिक्षा प्रणाली का स्ट्रक्चर हो गया रट्टा मारकर परीक्षा पास करना. हमारी सरकार नई शिक्षा प्रणाली लाई, जो 34 साल से पेंडिंग था. अखिलेश जी से लेकर सभी लोगों ने अच्छे सुझाव दिए. आपने एनईपी पढ़ा है क्या. पिछले दो महीने से हम युवाओं से बात कर रहे हैं. वर्षों की तैयारी का एक दिन में, तीन घंटे में पूरा फ्यूचर डिसाइड हो रहा है. छात्र चाहते हैं कि एक दिन, तीन घंटे की परीक्षा से फ्यूचर डिसाइड न हो. युवा ये नहीं कह रहे कि परीक्षा आसान कर दो, उनकी मांग है कि प्रश्नों में ओरिजिनैलिटी लाओ. तीसरी मांग उनकी है कि मल्टी डिसिप्लीनरी सिस्टम लागू हो. हम शिक्षा प्रणाली को बदल रहे हैं. तेजस्वी सूर्या ने कहा कि युवा जानते हैं कि उनके लिए कोई काम कर रहा है, तो वह मोदी है. उन्होंने आईआईटी से लेकर मेडिकल सीट तक, कांग्रेस और मोदी सरकार में आए बदलावों की भी चर्चा की.
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि पूरे देश के युवा संसद की ओर देख रहे हैं. उनको इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता कि पहले क्या हुआ, किस सरकार में क्या हुआ. वह आगे की परीक्षा की ओर देख रहा है. शिक्षा इस देश में समाज में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है. अमीर परिवार के बच्चों के लिए कई रास्ते होते हैं, आम परिवार के बच्चों के पास यही रास्ता होता है. शिक्षा और परीक्षा एकमात्र ऐसी व्यवस्था है, जहां सरनेम, कास्ट कुछ पूछा नहीं जाता है. सिर्फ मेहनत के आधार पर अवसर मिलता है. शिक्षा और परीक्षा में पेपर लीक होता है, तो वह विश्वासघात होता है. नीट का पेपर लीक हुआ, प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पाप है. तुरंत सरकार ने इसमें सुधार का प्रयास किया. तीन स्टेप लिए. केस दर्ज हुए, सीबीआई जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं. री-नीट हुआ और रिजल्ट समय पर घोषित हुए. तीसरा सुधार हुए. प्रधानमंत्री ने दो बड़े कदम उठाए. जेईई की तरह परीक्षा कराने का ऐलान किया और हाईपावर कमेटी बनाई. इस कानून को मजबूत करने के लिए यह बिल लेकर आए हैं. प्रियंका जी से पूछना चाहता हूं कि 2010 में यूपीए ने ऐसा ही बिल पेश किया था, इसे पास क्यों नहीं किया. 75 साल के आजाद भारत के इतिहास में कई सारे पेपर लीक हो चुके हैं. पिछले 20 वर्षों में 200 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं. छात्र राजनीति नहीं, समाधान चाहते हैं और पीएम मोदी ने आज समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज हम इस सदन में ऐसे संशोधन पर डिबेट कर रहे हैं, जो 2024 में पारित हो चुका है. जबसे यह पारित हुआ है, तबसे एक भी आरोपी को सजा नहीं हुई है. आपने देखा है कि कल-परसो से छात्रों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों के साथ यही काम नहीं किया जा रहा है. प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदलने चाहिए. नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा. राधाकृष्णन कमेटी भी बनी थी. इस कमेटी में तो एक गौमूत्र के विशेषज्ञ भी हैं. इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता. स्पीकर ओम बिरला भी इस बात पर हंस पड़े. प्रियंका गांधी ने कहा कि सर मुस्करा लीजिए. फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड भी देख लीजिए. कल की सुनवाई में सीबीआई का वकील पेश ही नहीं हुआ. जेनजी का भरोसा जीतने के लिए नए-नए एंगल के वीडियो बनाने से काम नहीं चलेगा. प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा. प्रधानमंत्री को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी. पुलिस की लाठी बच्चों की पीठ पर नहीं, सरकार की साख पर पड़ी है. अपनी साख बचाइए. आपके शासन में बड़ी-बड़ी चोरियां देखी हैं. चुनाव में वोट की चोरी, राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी. किसानों की जमीन की चोरी, लेकिन सबसे बड़ी चोरी तब हुई, जब देश के नौजवानों के भविष्य और उनके सपने चुराए गए. अगर देश का युवा निराश हो गया, उसकी उम्मीद टूट गई तो वह भारत की हार होगी. हम विपक्ष के लोग जान दे देंगे, अगर भारत की हार होगी. किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी की स्पीच की चोरी कर ली.
लोकसभा में जोरदार हंगामा जारी है. प्रियंका गांधी की ओर से प्रह्लाद जोशी पर की गई टिप्पणी को लेकर ट्रेजरी बेंच के सदस्य जोरदार हंगामा कर रहे हैं. निशिकांत दुबे और प्रह्लाद जोशी ने कहा कि पहले ऑथेंटिकेट करें, फिर आगे बढ़ें. इस पर कांग्रेस की ओर से केसी वेणुगोपाल ने कहा कि निशिकांत दुबे ने इसी सदन में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को लेकर टिप्पणियां की हैं, उनको रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया. इस पर निशिकांत दुबे ने कहा कि हमने ऑथेंटिकेट किया था और आज भी उस पर कायम हूं. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मैं यहां मौजूद हूं, उन्होंने मुझे कोई नोटिस नहीं दिया. इसका खंडन करता हूं, उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. प्रियंका गांधी ने न्यूज पेपर की कटिंग सदन पटल पर रखते हुए कहा कि क्या जोशी जी अपने इस बयान का खंडन कर रहे हैं. क्या आप इसका खंडन कर रहे हैं. इस पर स्पीकर ने कहा कि इस सदन में इस बिल पर ही चर्चा होगी.
प्रियंका गांधी ने कहा कि इस सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सभी सेक्टर को लगातार कमजोर किया. पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई. शिक्षण संस्थाओं में संघ के प्रचारकों को भर-भरकर उसे खोखला बना दिया. एनटीए बनाकर परीक्षा सिस्टम का केंद्रीकरण कर दिया गया. हर साल शिक्षा बजट की हिस्सेदारी घटती चली गई. शिक्षा बजट उससे भी कम है, जितना पूंजीपतियों के लोन माफ किए गए हैं. सोचिए, सरकार की प्राथमिकता क्या है. देश के युवाओं का भरोसा इस सिस्टम से टूट चुका है. भरोसे को बनाने के लिए उसी सिस्टम से जवाब नहीं ढूंढा जा सकता. उसके दायरे से बाहर निकल ठोस प्रयास करना पड़ता है. प्रधानमंत्री और उनके साथी यह सोच रहे हैं. शिक्षा मंत्री ने शर्मनाक परिस्थितियों में इस्तीफा दिया, और उनका संसद में कल ऐसा स्वागत किया गया जैसे कोई सुपरस्टार पहुंचा हो. कल जब उनको मुकुट पहनाया जा रहा था, महाराष्ट्र का एक परिवार अपनी बेटी के सुसाइड का मातम मना रहा था. जहां शर्म होनी चाहिए, वहां बेशर्मी से स्वागत कराया जा रहा. कोई आप पर कैसे यकीन करे. प्रधानमंत्री ने नया शिक्षा मंत्री चुना, एक ऐसे व्यक्ति को चुना, जिसने एक गर्भवती रेप पीड़िता के दोषियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की. इस पर स्पीकर ने उनको टोका और सत्तापक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि प्रियंका गांधी ने जो कहा, हमारे नए शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की, वह चरित्र हनन है एक तरीके से. हम उम्मीद नहीं करते ऐसी बातों की. इसे रिकॉर्ड से हटाया जाए. इस तरह की भाषा का इस्तेमाल ना करें. संसद में डिबेट के स्तर को ना गिराएं. जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए. यह मानता हूं कि ऑथेंटिकेट नहीं कर सकती हैं तो माफी मांगनी चाहिए.
प्रियंका गांधी ने कहा कि हम आरएमएल अस्पताल गए, जहां घायल छात्रों का इलाज चल रहा था. हमसे कुछ ही समय पहले स्वास्थ्य मंत्री भी वहां गए थे. जब तक हम वहां पहुंचे, उस लड़की की मां नेताओं के आने-जाने से गुस्से में थी. उसने कहा कि धन्यवाद आप आए हैं, लेकिन हमें किसी से नहीं मिलना. पीड़ा से उसका शरीर कांप रहा था, लेकिन उसने कहा कि वह भी आए, जिन्होंने मेरी बेटी का ये हाल किया. मेरी बेटी की बलि चढ़ गई, लेकिन उसे कुछ भी हो जाए, मैं लड़ूंगी. शायद मुझे यहां खड़े होकर सबके सामने ये बात नहीं कहनी चाहिए. लेकिन उसके दिल के टूटने की आवाज की वजह से उस मां की इजाजत लिए बिना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी उन पर आंसू गैस, लाठियां चलवाने की. लड़कियों के कपड़े फाड़ने की. बच्चियों को जलील करने की. क्या वे आतंकी थे. जवाब दीजिए. हां, कांग्रेस बोल रही है, जवाब मांग रही है. जवाब दीजिए. किसने ऑर्डर दिया पैलेट गन चलाने का. प्रधानमंत्री ने दिया, गृह मंत्री ने दिया. सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, पूरा देश पूछ रहा है. आपकी जिम्मेदारी बनती है, जवाब दीजिए. क्यों डरते हैं आप नौजवानों से, उनकी आवाज से. ये सदन इस देश की अमानत है, किसी की जागीर नहीं. हम सभी लोगों के सेवक हैं. उनके प्रतिनिधि हैं. यह सत्ता भी उन्होंने ही दी है.
श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अभी गौरव गोगोई कह रहे थे कि हम युवाओं के साथ हैं. अरे ये तो पूछो कि युवा आपके साथ है कि नहीं है. ये 37 दिन तक जंतर-मंतर नहीं गए, क्योंकि इनको डर था कि कहीं एक नई पार्टी तो नहीं आ जाएगी. जेनजी की भाषा में ये एफआईए रहे. इसके बाद फोबो हुआ और प्रधानमंत्री आवास पर चले गए आंदोलन करने. सपा को बुलाया कि हम उधर जा रहे हैं. लोगों को भड़काया गया, भद्दी-भद्दी गालिंयां दी गईं. तानाशाही होती, तो प्रधानमंत्री के विरोध में जो रील बनाए, इसकी हिम्मत कोई नहीं करता. डेमोक्रेसी है, इसलिए हमने छात्रों से बात की और मुकदमे भी वापस ले लिए.
डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने कहा कि हम युवाओं के आक्रोश को आंदोलन नहीं मानते, इसे बदलाव की एक शुरुआत मानते हैं. कोई भी परीक्षा आपकी जिंदगी तय नहीं करती. परीक्षा में फेल हो जाएं, तो कोई कदम उठाने से पहले अपनी जिंदगी, अपने देश के बारे में सोचना चाहिए. शिवाजी से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने 16 साल की उम्र में किला जीतकर अटक से कटक तक मराठा साम्राज्य की नींव रखी. युवाओं को भरोसा दिलाता हूं कि नरेंद्र मोदी की सरकार आपके साथ पूरी ताकत से खड़ी है. हमने सिर्फ निंदा नहीं की, सिस्टम की सफाई की. नैतिकता है सरकार में, इसलिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया. पेपर लीक के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का काम आज इस बिल के माध्यम से किया जा रहा है. हमारा लक्ष्य बस अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बच्चों का साल बचाना भी है. छात्रों की वर्षों की तपस्या, परिवारों की मेहनत हम तीन घंटे के समय में कैसे तय कर सकते हैं. मुझे ये भी कहना है कि इस सिस्टम को बदलना जरूरी है. बच्चे एक ही बार क्यों परीक्षा दें. साल में कई बार बच्चे अमेरिका में परीक्षा दे सकते हैं. ऐसी व्यवस्था को अपनाना चाहिए. इसे लेकर अलग रिफॉर्म लाने की जरूरत है. लवू श्रीकृष्णा ने कहा कि हम क्वेश्चन बैंक बनाएं. हमें छात्रों को दबाव से बाहर निकालना जरूरी है. कोचिंग का बड़ा साम्राज्य खड़ा हो चुका है. आज कोचिंग आईपीओ बनाने जा रहे हैं. सरकार और सिस्टम को यह सोचने की जरूरत है कि इन्हें किस तरह से रेगुलेट किया जाए. हमने महाराष्ट्र में ईडब्ल्यूएस और ईसी-बीसी की बेटियों के लिए शिक्षा मुफ्त करने का काम किया है. इस बिल से एजुकेशन रिफॉर्म लाने का काम हम लोग कर रहे हैं.
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा कि 22 लाख छात्र हर साल नीट परीक्षा में शामिल होते हैं. एक लाख 39 हजार सीटें हैं. बाकी छात्र ट्रॉमा फेस करते हैं. सरकार ने कितने नए मेडिकल कॉलेज खोले. पिछले 12 वर्ष में पांच मंत्री बदल चुके शिक्षा मंत्रालय में. उन्होंने एनडीए सरकार में हुई पेपरलीक की घटनाएं गिनाईं और कहा कि पहली ही बार नीट परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, क्योंकि 120 प्रश्न गेस पेपर से मैच कर रहे थे. दयानिधि मारन ने निर्मला सीतारमण के एक बयान को कोट करते हुए कहा कि आपकी वित्त मंत्री पेपर लीक का समर्थन करती हैं. उन्होंने राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह का अंग्रेजी में बिल पेश करने के लिए धन्यवाद किया और कहा कि हम महसूस करते हैं कि आप एक गलती कर रहे हैं. आप हमारे बच्चों के खिलाफ हैं. हम आरएमएल हॉस्पिटल गए, वहां जब घायल बच्चों से मिलने गए. मेडिकल अधीक्षक से मुलाकात की, तो जवाब मिला- आप स्वास्थ्य मंत्री से मिलिए. ये सरकारी अधिकारी हैं. आज गलती से प्रधानमंत्री की एक पोस्ट फेसबुक से रिमूव हो गई और सरकार ने मेटा चीफ को जवाब के लिए तलब कर लिया. सरकार हमारे पास क्यों नहीं आती जवाब देने के लिए. बीजेपी एजिटेशन में विश्वास करती है. यह पार्टी विकास ही इसी वजह से की है. युवाओं को सुनिए. नीट को युवाओं पर मत थोपिए.
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सही परीक्षा हर छात्र का अधिकार है. ये सरकार इस चीज की मास्टर है. जब संस्थाएं फेल होती हैं, तो कमेटी अनाउंस कर दो. गवर्नेंस फेल हो, तो कानून बदल दो. इस दौरान जोरदार हंगामा हुआ. महुआ मोइत्रा अपनी सीट पर खड़ी हो गईं और कहा कि ये नहीं चाहते कि सदन चले. आप इनको बैठाइए. हंगामे पर अभिषेक बनर्जी ने कहा ट्रेजरी बेंच नहीं चाहता कि सही से बहस हो. उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया में इतने पेपर लीक क्यों. हर बार पेपर का नाम बदल जाता है. पेपर लीक पैटर्न बन गया है. सरकार हर मोर्चे पर फेल हुई है. पेपर के परिवहन के लिए एयरफोर्स को लगाना पड़ रहा है. इस पर सोचने की जरूरत है. पिछले दो महीने में जो हुआ है, लाखों छात्र देश के कोने-कोने से आए और सरकार से सवाल पूछा. सरकार ने उनको दिया क्या- बैरिकेड, डंडा, पुलिस लाठीचार्ज. युवा भारतीयों को कानून-व्यवस्था के लिए समस्या की तरह क्यों ट्रीट किया गया. पिछले 12 साल में सीबीएसई से लेकर नीट तक, पेपर लीक की एक-एक घटना का उल्लेख करते हुए टीएमसी सांसद ने कहा कि एक भी आरोपी को सजा नहीं हुई. सरकार ने संसद को यह बताया है कि पेपर लीक पर कोई डेटा उसके पास नहीं है. इन्हें ये पता है कि हर मिनट कितने यूपीआई ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, लेकिन ये नहीं पता कि कितने पेपर लीक हुए. युवा पीढ़ी बीजेपी से ज्यादा स्मार्ट है. वह अकाउंटिबिलिटी की बात करती है. छात्र सिम्पैथी नहीं, निश्चितता की डिमांड कर रहे हैं. अभी दो दिन पहले प्रधानमंत्री का इंस्टाग्राम पर वीडियो आया. वहां उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की चर्चा की. कल की बात है, पहली सुनवाई में ही सीबीआई के वकील नहीं पहुंचे. यह बीजेपी सरकार की मंशा बताता है. परेशानी लॉ में नहीं, सरकार की मंशा में है. आप फास्ट ट्रैक कोर्ट बना लेंगे, लेकिन एजेंसियां सही से जांच नहीं करेंगी. अकाउंटिबिलिटी पर युवाओं को भाषण देने का नैतिक अधिकार सरकार के पास नहीं है. अन्याय की नींव पर भविष्य का निर्माण नहीं हो सकता.
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने सबसे पहले प्राइमरी स्कूल पर हमला किया. कितने प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए. युवाओं के भविष्य पर चोट की है आपने. नौकरी पर हमला किया है आपने. ऐसा इसलिए किया, कि नींव पर ही हमला होगा तो गरीब परिवार के बच्चे आगे नहीं बढ़ पाएंगे. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि एक लाख से अधिक प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए गए हैं. यूपी में सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल बंद हुए हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सात लाख से ज्यादा स्कूल थे, जो अब छह लाख कुछ रह गए हैं. केवल प्राइमरी स्कूल बंद नहीं किए हैं, नौकरी पर भी हमला किया है. 69 हजार शिक्षक भर्ती में बड़ा घोटाला किया है. शिक्षक भर्ती के लोग मंत्रियों के यहां गए, हाईकोर्ट गए, सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सरकार कमाल की है. नौकरी नहीं देना चाहती. सबसे अधिक पिछड़ों का अधिकार छीना है. माध्यमिक स्कूल भी बंद किए जा रहे हैं. बोर्ड परीक्षाएं लीक हुई हैं. बड़े पैमाने पर बोर्ड पेपर लीक किए गए हैं. 10वीं-12वीं के पेपर क्यों लीक हो रहे हैं. नीट के जिन बच्चों ने जान दी है, अपनी और पार्टी की तरफ से श्रद्धांजलि देता हूं. उम्मीद है कि सरकार बच्चों की एक करोड़ मुआवजे की मांग मानेगी. उच्च शिक्षा की भर्ती में नियुक्तियों की क्या चर्चा करें. सबसे ऊपर बैठा व्यक्ति ही अन्याय करेगा, तो नीचे वालों से क्या उम्मीद करें. उत्तर प्रदेश में मौलान जौहर यूनिवर्सिटी बनी. सरकारी यूनिवर्सिटी नहीं बनाई, अगर कोई यूनिवर्सिटी बन भी गई है तो उसको ये लोग हथौड़ा लेकर तोड़ने पर आमादा हैं. नफरत की राजनीति कर रही है ये सरकार.
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को सोचना चाहिए कि कहीं यही नौजवान हमारे लिए आपदा न बन जाएं. शिक्षा सच्ची होगी, तो तरक्की भी पक्की होगी. जो बिल लेकर आए हैं, बिल तो 2024 में भी लेकर आए थे. इसके बाद भी पर्चा क्यों लीक हुआ. आपको बिल लेकर क्यों आना पड़ा, ये बता दें आप. इस पर किरेन रिजिजू ने टोका और कहा कि आप ये बता दीजिए कि आंदोलन के बाद बिल लेकर आना अच्छा है या आंदोलन को कुचलने के लिए इमरजेंसी लगा देना अच्छा है. अखिलेश ने कहा कि हमने इमरजेंसी नहीं देखी है, लेकिन दिल्ली में देखा है. आंसू गैस के गोले और लकड़ी पर कील जैसा कुछ लगाया गया था. उसमें करेंट भी था. दिल्ली में जो हुआ, वह भी इमरजेंसी से कम नहीं था. अगर इमरजेंसी याद आ गई है इनको, तो इमरजेंसी के बाद भी परिवर्तन हुआ था और इस बार भी परिवर्तन होगा. चढ़ावा चोरी, गुप्तदान भी चोरी हुआ है. भगवान भी आपको माफ नहीं करेंगे.
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हम यह मानें कि 20 लाख बच्चों ने परीक्षा दी थी. अगर यह मानें कि एक परिवार में पांच लोग हों, तो एक करोड़ लोग होते हैं. हम राजनीतिक लोग हैं. आंदोलन करते हैं तो देखते हैं कि कितनी तैयारी करनी पड़ती है. पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो. अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं. जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे. भगवान के दरबार से दान गायब हो गया. लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. 20 परीक्षाएं लीक हो गईं. कोर्ट जाना पड़ा, इसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं. यूपी टीईटी का एक नहीं, तीन बार पेपर लीक हुआ. अखिलेश यादव ने पेपर लीक की घटनाओं का सिलसिलेवार तरीके से उल्लेख किया और कहा कि जहां से प्रधानमंत्री चुनकर आते हैं, उस यूपी में भी पेपर लीक हो रहा है. हमें आउटसोर्सिंग से डर लगता है, कहीं ऐसा न हो कि पूरी सरकार आउटसोर्स हो जाए. यही अकाउंटिबिलिटी है आपकी, कि सबसे महत्वपूर्ण संस्था को आउटसोर्स किए हुए हैं आप. एनटीए में सब आउटसोर्स. हमें पता होना चाहिए कि वो कौन लोग थे, जो एनटीए में बैठकर घोटाला कर रहे थे.
अखिलेश यादव ने कहा कि आंदोलन को बहुत दूर से देख रहा था. उस आंदोलन में जीत के बाद एक नारा लगा, सरकार के खिलाफ नारा लगा कि सरकार को अहंकार था कि सरकार झुकती नहीं है. नई पीढ़ी ने नारा दिया कि सरकार भी झुकती है, झुकानेवाला चाहिए. सरकार झुकी. सरकार हर विषय पर स्वीकार किया, लेकिन सदन में उन विषयों को क्यों नहीं रख रही है जो सहमति बनी है. जब मंत्री जी लौटे जो मंत्री नहीं रहे, स्वागत से कोई शिकायत नहीं है. कितनी राहत मिली होगी कि एक प्रधान जी को हटाकर के प्रधानमंत्री बचा लिए आपने. यह सरकार कई वर्षों से नकारात्मक राजनीति करती थी. कितने हजार करोड़़ रुपये नकारात्मक प्रचार के लिए खर्चा किया, युवा पीढ़ी को बधाई देता हूं कि युवाओं ने झुका दिया.
बांसुरी स्वराज ने कहा कि बहस नैरेटिव और पूर्वाग्रह नहीं, तथ्यों पर होनी चाहिए. उन्होंने पेपर लीक आरोपियों को बेल का बचाव करते हुए कहा कि बेल सरकार नहीं, कोर्ट देती है और लोकतंत्र में न्यायपालिका स्वतंत्र है. बांसुरी स्वराज ने यूपीए सरकार से लेकर राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक, पेपर लीक और नियुक्तियों में धांधली के आंकड़े गिना विपक्ष को घेरा. हाल ही में पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर के एग्जाम में हाईटेक ब्लूटूथ का इस्तेमाल किया गया. विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि यह अगर सिद्धांत की लड़ाई है, तो सिद्धांत सरकार देखकर बदल कैसे जाता है. क्या गौरव गोगोई ने पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अभी तक मांगा है या नहीं. बात राजनीति की नहीं, युवाओं की है. इस सदन के पटल से हर तरह के एजुकेशन माफिया को चेताना चाहूंगी कि आप इस सदन के संकल्प से बड़े नहीं हैं. सबसे अपील करना चाहता हूं कि इस संशोधन को सर्व सम्मति से पारित करिए. बांसुरी ने जय जगन्नाथ के नारे से अपने संबोधन का समापन किया.
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि इस बिल को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है. पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक एक घोर अपराध है. मोदी जी के लिए ऐसा कहना केवल एक बयान नहीं, उनकी सरकार की नीयत है. इसीलिए यह बिल यहां लाया गया है. आज परीक्षा माफिया संगठित हो गया है. यह बिल ज्यूडिशियरी की उलझन को सुलझाता है. इस बिल में जांच के लिए केंद्र सरकार को टास्क फोर्स बनाने का अधिकार है. मैं खुद एक वकील हूं. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को बधाई देती हूं. पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा करके अपने व्यक्तिगत समय का निवेश किया है बच्चों में. उनका प्रयास रहा है कि हमारे देश का बच्चा एग्जाम वरियर से एग्जाम वॉरियर बन जाए. उन्होंने आईआईटी से मेडिकल इंस्टीट्यूट तक, बांसुरी स्वराज ने मोदी सरकार में बढ़ी संख्या गिनाईं और एससी-एसटी छात्रों के नामांकन बढ़ने का उल्लेख किया और कहा कि यह सामाजिक न्याय का विस्तार है.
गौरव गोगोई ने प्रोटेस्ट के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि डर गायब हो गया. लोग 20 जुलाई की रात 10 बजे प्रोटेस्ट में पहुंचे, कि मैं भी एक लाठी खा लूंगा. हमें आपने याद दिलाया कि लोकतंत्र है. खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक लड़का पुलिस को ललकार रहा था. बहुत लोग कहते हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में गलत शब्द भी कहे गए. उन शब्दों का समर्थन नहीं कहा, लेकिन उन शब्दों को भी याद करना चाहिए जो उन बच्चों ने याद दिलाया. वसीम बरेलवी की कविता- उसूलों पर आंच आए, तो टकराना जरूरी है. जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है. पुलिस की लाठी आती है, तो कोई अनजाना सामने आकर लड़की को बचाता है. वह लड़का कहता है कि इसी उंगली से हमने कमल को वोट डाला, आज कमल की पुलिस ने उस उंगली को तोड़ डाला. धन्यवाद देना चाहता हूं कि देशभर से लोगों ने स्विगी के जरिये खाना भिजवाया. वकीलों ने बोला कि लोकतंत्र के साथ यहां पर खड़े हैं. हमने लोकतंत्र की ताकत देखी, वहीं हमने इस सरकार की क्रूरता भी देखी. हमने देखा कि किस प्रकार से पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हमने वह भी देखा कि किस तरह से पुलिसकर्मी ने लड़की के गाल पर थप्पड़ मारा. एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया. हम भूलेंगे नहीं. हम गृह मंत्री का जवाब चाहते हैं. यह बिल इसलिए आया है, क्योंकि आपकी पुलिस इस आंदोलन को कुचल नहीं पाई. बिहार में आपकी पुलिस ने एके-47 का इस्तेमाल किया.
आप शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोगों को आने वाली चुनौतियों के लिए नहीं, अपने दल के लिए वोटर बनाने पर ध्यान दे रहे हो. दिल्ली जाने के लिए देशभर के माता-पिता प्रदर्शन करने के लिए भेज रहे हैं. एक मां ने आशीर्वाद के साथ जंतर-मंतर भेजा. जेएनयू, डीयू कहता है कि आप मत जाओ. ऐसे हम आने वाली चुनौतियों के लिए भारत का निर्माण करेंगे. एक बात पूरे घटनाक्रम से निकलती है, वो ये कि पेनल्टी पनिशमेंट बढ़ाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी. धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक सिंबल है, उनके हटने से शिक्षा में सुधार आएगा, इस पर बच्चों को विश्वास नहीं. आज शिक्षा के विषय पर सभी दल-संगठन और इनसे अलग युवा सड़क पर आ गए. क्यों शिक्षा की मांग की, उनकी पीड़ा को समझना चाहिए. किसी का इतना साहस नहीं कि भूख हड़ताल पर रहना, पुलिस की लाठी खाना. ये साहस आता है दर्द से, जिसमें भविष्य को लेकर वह विवश है. सरकार से सवाल भी नहीं पूछ सकते. एक व्यक्ति ने इस पूरे दर्द के बारे में बात करते हुए गोपालदास नीरज की बात की. 'कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे...' सुनाते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि आज देश की स्थिति ये है कि आत्महत्या हुई, क्योंकि बच्चा परीक्षा में फेल हो गया. छात्रों की आत्महत्या एक लाख से अधिक हो गई. दो हजार ने साफ कहा कि फेल हो गया. इसके बाद भी युवा आए.
गौरव गोगोई ने कहा कि व्यापक चर्चा की बजाय प्रधानमंत्री कहते हैं- इंस्टाग्राम पर और ध्यान दो. प्रधानमंत्री जब आते हैं, हाईपावर कमेटी के गठन की बात करते हैं, तो दो साल पहले राधाकृष्णन कमेटी का क्या हुआ. वास्तव में बढ़िया काम किया, तो दो साल बाद ही क्यों पेपर लीक हुआ. सरकार दिखाना चाहती है कि बहुत गंभीर है. एनटीए के 47 लोगों को बदला गया. कौन हैं वो, सरकार से ब्यौरा चाहूंगा. एनटीए की सैंक्शन कैपेसिटी है वो 34 है. ये 47 कौन हैं. 34 में से 10-12 वैकेंसियां हैं, 47 कौन हैं. एनटीए के डीजी को बदला, चेयरमैन को रखा. ऐसा क्यों. एनटीए के चेयरमैन पर इतना विश्वास क्यों, उनका ब्यौरा देख लीजिए. एक विशेष संगठन से जुड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भी चेयरमैन थे, वहां भी धांधली हुई. आपकी सरकार बचा रही है. आज भी वो चेयरमैन बचा हुआ है, क्योंकि वह एक विशेष संघ से जुड़ा हुआ है. शिक्षा विभाग में आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि आरएसएस के लिए शिक्षा विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है. इसीलिए वीसी से लेकर फैकल्टी में, यूनिवर्सिटीज में क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
गौरव गोगोई ने असम बाढ़ और 70 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए असम के लिए विशेष पैकेज की मांग की. उन्होंने बिल पर बोलते हुए कहा कि इस बिल से साफ पता चल जाता है कि सरकार सुधार नहीं लाना चाहती. ये बिल सिर्फ दिखावे का बिल है. क्योंकि ये सिर्फ एक संशोधन बिल है. दो साल पहले ये बिल लाते समय भी ऐसे ही दावे किए गए थे. 2026 में एक अखबार में आर्टिकल आया कि 2024 नीट पेपर लीक में चार्जशीटेड हुए 46 में से 44 को बेल मिल चुकी है. संजीव मुखिया 11 महीने फरार था, जिसे मास्टरमाइंड कहा जाता है. गिरफ्तार हुआ, तो उसे उस मामले में बेल मिल गया. एक दूसरे व्यक्ति अमित कुमार बरुआ, अमित कुमार सिंह को बेल मिल गया. उन्होंने एक-एक आरोपी के नाम लेकर बेल वाली लिस्ट गिनाई और कहा कि ये कानून उस समय भी विफल था, जिस मंशा से आज ला रहे हैं आज भी विफल होगा. ये कानून आपकी विफलता का स्मारक है.
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर स्पीडी जस्टिस का प्रावधान इस संशोधन के जरिये कर रहे हैं. इसमें भी हमने समयसीमा तय कर दी है कि जांच दो महीने के भीतर सारी जांच मुकम्मल की जाएगी और उसके बाद जो भी ट्रायल कोर्ट होगा, उसमें तीन महीने. जिस दिन वारदात हुआ है, उस दिन से निर्णय आने तक, पांच महीने से ज्यादा समय नहीं लगेगा. उसके बाद कोई अपील करना चाहे, तो 30 दिन के भीतर कर सकेगा और डबल बेंच से नीचे हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होगी. महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आए हैं, सरकार की प्रतिबद्धता का इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि बिल लाने के साथ ही साथ कानून मंत्री की ओर से प्रस्ताव जारी कर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन भी शुरू कर दिया गया है. उन्होंने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स के गठन का भी उल्लेख किया और कहा कि राधाकृष्णन कमेटी की मोटी-मोटी 46 सिफारिशों में से 35 को लागू कर दिया गया है. सरकार की नीति ईमानदार है और ये संशोधन भी ईमानदाराना प्रयास के तहत लाया जा रहा है. इन प्रस्तावों से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी और अगर हुई, तो देश की जनता को उनसे आपत्ति होगी.
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे. पेपर लीक किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है. उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए. भारत में चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं. 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का. 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था. कांग्रेस और यूपीए की सरकारों ने सुझाव नहीं माने. हमने एनटीए का गठन किया. पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया. जून 2024 में लागू किया गया. इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है. हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं.
स्पीकर ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए महत्वपूर्ण है, जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस बिल पर चर्चा के लिए सहमत हुए. इस बिल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं को और अधिक शुचितापूर्ण बनाना है. परीक्षा प्रणाली की विशिष्टता और पारदर्शिता राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण विषय है. पूरा देश चाहता है कि सभी सदस्य सार्थक विचार साझा करें और रचनात्मक विचार रखें, जिससे हम एक बेहतर कानून बना सकें. कानून जितना बेहतर होगा, हम परीक्षा प्रणाली को उतना ही शुचितापूर्ण बना सकते हैं.
एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया गया था. विपक्षी सदस्य कम से कम दो घंटे बढ़ाने की मांग कर रहे थे. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल पर हम 10 घंटे भी चर्चा के लिए तैयार हैं. इसके बाद स्पीकर ने सदन का सेंस लेकर 10 घंटे चर्चा कराने की घोषणा कर दी.
लोकसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है. कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष की ओर से कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने कहा कि चर्चा शुरू होने से पहले हम सरकार से एक स्पष्टीकरण चाहते हैं. उन्होंने सदन में प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के सदन में मौजूद नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाया. इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि यहां मंत्री हैं.
सुष्मिता देव ने कहा है कि एनसीपीआई राहुल गांधी को अपना नेता नहीं मानती, इसलिए ही हमारे साथ आई है. उन्होंने कहा कि यह उनका अपना निर्णय है. सुष्मिता देव ने इसे लेकर टीका-टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में लोकसभा स्पीकर का फैसला अभी नहीं आया है. जब तक लोकसभा स्पीकर इसे लेकर कोई फैसला नहीं दे देते, तब तक किसी को भी टिप्पणी नहीं करना चाहिए. दल-बदल को लेकर उन्होंने कहा कि अब अगर इसकी बात हो रही है, तो राहुल गांधी से सम्मानपूर्वक एक सवाल पूछना चाहती हूं. सुष्मिता देव ने कहा कि जब आपने तेलंगाना में केसीआर की पार्टी के विधायकों का कांग्रेस में विलय कराया था और उस मामले में स्पीकर ने दो साल तक कोई फैसला नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इसके बाद केसीआर की पार्टी को कोर्ट जाना पड़ा. सुष्मिता देव ने कहा कि इसे लेकर राहुल गांधी का क्या कहना है?
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पप्पू यादव जब मंगलवार को संसद पहुंचे तब उनका अलग ही अंदाज देखने को मिला. इस दौरान वह माथे पर मेडिकल प्लास्टर लगाए और हाथ में लाठी थामे दिखे. सामने आया है कि छात्रों की मांगों को लेकर पप्पू यादव ने संसद में इस तरह की नाटकीय एंट्री की. उन्होंने जंतर-मंतर समेत हर जगह प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए बल प्रयोग का विरोध जताया था.
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लोकसभा में दोपहर दो बजे से एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा शुरू हो सकती है. सत्तापक्ष और विपक्ष में इसे लेकर सहमति एक दिन पहले ही बन गई थी. स्पीकर ने इस बिल पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया है. हालांकि, स्पीकर ने यह भी कहा है कि सभी को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका दिया जाएगा. स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करने से पहले भी यह कहा कि चर्चा का समय पक्ष-विपक्ष मिलकर तय करेंगे.
पश्चिम बंगाल की जाधवपुर सीट से टीएमसी के टिकट पर सांसद बनी सायोनी घोष ने अपना सियासी गियर बदल दिया है. ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हो गई है. राजनीतिक पाला बदलते ही सायोनी घोष के राजनीतिक तौर-तरीके भी बदल गए हैं, अब मोदी सरकार के लिए सियासी ढा़ल बन रही हैं.
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संसद की कार्यवाही शुरू होने के पहले बीजेपी सांसदों ने संसद परिसर में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया. बीजेपी सांसद पेपर लीक को लेकर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
राज्यसभा की कार्यवाही भी दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा शुरू हो गया. हंगामे के बीच ही लिस्टेड बिजनेस लिए गए और इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
लोकसभा में जोरदार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित हो गई है. स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा शुरू हो गया. विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से सदन चलने देने की अपील करते हुए कहा कि जितना भी बड़ा मुद्दा हो, प्रश्नकाल में गतिरोध नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा होनी चाहिए. कितनी चर्चा हो, यह पक्ष-विपक्ष मिलकर तय करेंगे.
लोकसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है. लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी गई. स्पीकर ओम बिरला ने खिलाड़ियों को बधाई दी.