ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से झटका! ऋतब्रत होंगे बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के पद को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

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बंगाल विधानसभा में विपक्षी नेता का मामला हाई कोर्ट पहुंचा था. (Photo: PTI) बंगाल विधानसभा में विपक्षी नेता का मामला हाई कोर्ट पहुंचा था. (Photo: PTI)

संजय शर्मा / तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

ममता बनर्जी सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के पद को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. फिलहाल, ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष के नेता बने रहेंगे और स्पीकर रथिन बसु का फैसला लागू रहेगा, क्योंकि कोर्ट ने स्पीकर के फ़ैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है.

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जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी. उन्होंने सभी पक्षों को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया, "इस अदालत को याचिकाकर्ता के मामले में अंतरिम आदेश देने के लिए कोई प्रथम दृष्टया मामला या सुविधा का संतुलन नहीं मिला, इसलिए अंतरिम आदेश देने से इनकार किया जाता है."

दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ऋतब्रत भट्टाचार्य को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था. याचिकाकर्ता, TMC विधायक और ममता बनर्जी के करीबी शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?

बुधवार को कोर्ट ने स्पीकर की तरफ से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल बिलवदल भट्टाचार्य से पूछा कि स्पीकर ने 9 मई को मिले उस पत्र पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया, जिसमें शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की बात कही गई थी.

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कोर्ट ने गौर किया कि स्पीकर ने उस आवेदन पर तो कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन बागी गुट से 3 जून को मिले एक दूसरे पत्र पर कार्रवाई करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया.

कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि स्पीकर की तरफ से इस बात का कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया गया कि पहले आवेदन को नजरअंदाज क्यों किया गया, जबकि दूसरे आवेदन को लगभग तुरंत ही स्वीकार कर लिया गया.

टीएमसी की हार के बाद बदला सियासी समीकरण

विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद, पार्टी की लेजिस्लेटिव पार्टी में फूट पड़ गई. पार्टी के ज़्यादातर विधायक 'बागी' हो गए. पार्टी लीडरशिप ने सीनियर नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय को लेजिस्लेटिव पार्टी का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन, पार्टी के फैसले को न मानते हुए, ऋतब्रत ने 58 विधायकों का समर्थन हासिल किया और विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए.

इससे पहले, 1 जून को तृणमूल लीडरशिप ने 'पार्टी-विरोधी गतिविधियों' के आरोप में ऋतब्रत को पार्टी से निकालने का फैसला किया था.

TMC के कई विधायकों ने आरोप लगाया कि स्पीकर को सौंपे गए उस दस्तावेज पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने का समर्थन किया गया था. इसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जो अब CID जांच का केंद्र बन गया है. इस जांच में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं.

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