गोवा में हुए बड़े पैमाने पर अवैध लोहा-अयस्क खनन मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के पणजी जोनल ऑफिस ने साल्गाओकर ग्रुप और उससे जुड़े 'AVS ग्रुप' पर शिकंजा कसा है. एजेंसी ने ग्रुप की करीब 1,023.85 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है.
ईडी की जांच में सामने आया कि एवीएस ग्रुप ने साल 2007 से 2012 के बीच 10 माइनिंग लीज (खनन पट्टों) का संचालन किया था. इस दौरान अवैध रूप से लोहा-अयस्क निकालकर, बेचकर और एक्सपोर्ट करके करीब 2,492.95 करोड़ रुपये की काली कमाई की गई.
खास बात ये है कि जब्त की गई संपत्तियों में सिंगापुर में मौजूद प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं. ईडी ने ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 19 जून 2026 को जारी एक आदेश के जरिए की है.
भारत-सिंगापुर की संपत्तियां जब्त
ईडी ने जिन संपत्तियों को जब्त किया है, उनमें देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 99 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कीमत 459.10 करोड़ रुपये है. वहीं, सिंगापुर में मौजूद 31 अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत 471.32 करोड़ रुपये है. इसके अलावा, भारतीय कंपनियों में 93.42 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर्स भी इस जब्ती का हिस्सा है.
ये सारी संपत्तियां दिवंगत अनिल वासुदेव साल्गाओकर की एस्टेट और साल्गाओकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स, एस. कांतिलाल एंड कंपनी, सालिथु ओर्स, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स और सुवर्णरेखा पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने घोषित किया था अवैध
इस मामले की शुरुआत गोवा पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच के दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी. इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और MMDR एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे. इसके बाद ईडी ने अपनी जांच शुरू की. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2014 और 2018 के अपने फैसलों में कहा था कि गोवा में 22 नवंबर 2007 के बाद हुआ सारा खनन अवैध और बिना कानूनी अधिकार के था.
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शेल कंपनियों के जरिए चीन भेजा माल
AVS ग्रुप पर आरोप है कि उसने अवैध अयस्क को जानबूझकर बहुत कम कीमत पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में बनी शेल कंपनियों को निर्यात किया. इन कागजी कंपनियों ने बाद में इसी माल को ऊंचे दामों पर चीन को बेच दिया. इस विदेशी व्यापार से लगभग 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया गया. इस तरह लगभग 5,237.84 करोड़ रुपये की कमाई की गई.
इन पैसों को सिंगापुर और BVI की कंपनियों के रास्ते घुमाया गया और भारत में शेयर कैपिटल के नाम पर वापस लाया गया. अब ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है.
दिव्येश सिंह