AIADMK चीफ पलानीस्वामी का बागी नेताओं पर एक्शन, षणमुगम-वेलुमणि को पार्टी से निकाला

तमिलनाडु में एआईएडीएमके के भीतर सियासी संकट गहरा गया है. विधानसभा में विश्वास मत के दौरान विजय सरकार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के बाद पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम समेत कई बागी नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया.

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एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी ने विद्रोही नेताओं षणमुगम, वेलुमणि और विजयभास्कर को पार्टी से निकाला. (Photo: PTI) एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी ने विद्रोही नेताओं षणमुगम, वेलुमणि और विजयभास्कर को पार्टी से निकाला. (Photo: PTI)

अनघा

  • चेन्नई,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर संकट बुधवार को और गहरा गया, जब पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी (EPS) ने बगावत करने वाले नेताओं एसपी वेलुमणि, सीवी षणमुगम और विजयभास्कर समेत अन्य नेताओं को पार्टी से निकाल दिया. पलानीस्वामी ने यह कार्रवाई वेलुमणि-षणमुगम की अगुवाई में एआईएडीएमके के बागी विधायकों द्वारा विधानसभा में विश्वास मत के दौरान विजय सरकार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के बाद की.

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एआईएडीएमके ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा स्पीकर के पास आवेदन किया है, जिन्होंने फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए टीवीके सरकार के समर्थन में वोट दिया. एआईएडीएमके के बागी विधायकों के समर्थन से विजय सरकार ने आसानी से सदन में बहुमत साबित कर दिया. फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला. 

बता दें कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके गठबंधन को चुनाव में 108 सीटें मिली थीं और वह बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी. इन 108 में विजय की दो सीटें भी शामिल थीं, जहां से उन्होंने जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने त्रिची सीट छोड़ने का फैसला किया और पेरम्बूर से विधायक बने रहे. बाद में कांग्रेस, वाम दलों, आईयूएमएल और एआईएडीएमके के बागी गुट के समर्थन से विजय सरकार ने विश्वास मत हासिल किया. 

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यह भी पढ़ें: 'या तो मैं CM बनूंगा...', AIADMK के बागी का दावा- पलानीस्वामी ने खारिज किया दलित CM का प्रस्ताव

EPS पर पार्टी विचारधारा से भटकने का आरोप

विश्वास मत के तुरंत बाद एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता सीवी षणमुगम ने खुलकर ईपीएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी ने पार्टी की मूल ‘एंटी-डीएमके’ विचारधारा को छोड़ दिया है. उन्होंने कहा, 'चुनाव से पहले से ही पार्टी में मांग उठ रही थी कि जो नेता पार्टी छोड़ चुके हैं या जिन्हें बाहर किया गया है, उन्हें वापस लाया जाए ताकि पार्टी मजबूत हो और चुनाव जीत सके. लेकिन ईपीएस की ऐसी कोई मंशा नहीं है.'

उन्होंने खुद पर लगे विश्वासघात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असल में ईपीएस ही एआईएडीएमके की बुनियादी राजनीति से भटक गए हैं. षणमुगम ने कहा, 'मैंने कोई विश्वासघात नहीं किया. हमारी पार्टी का मूल सिद्धांत डीएमके को खत्म करना रहा है. पिछले 50 वर्षों से हम डीएमके के खिलाफ लड़ते आए हैं. लेकिन चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में एआईएडीएमके के महासचिव ईपीएस इतने नीचे चले गए कि पार्टी के मूल सिद्धांतों को ही भूल गए.'

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के कुछ दिनों बाद, सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि समेत एआईएडीएमके के कुछ विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी. उन्होंने अपने साथ 30 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए तमिलनाडु विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी और एसपी वेलुमणि को पार्टी का नेता घोषित करने की मांग की. यह ताजा उथल-पुथल एआईएडीएमके के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर आई है, जिसने 2026 के चुनावों में 234 विधानसभा क्षेत्रों में से 167 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 47 सीटें ही हासिल कर पाई.

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