म्यांमार और बांग्लादेश बॉर्डर से जुड़े ड्रग्स नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है. एजेंसी ने मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में चार जगहों पर छापेमारी की. जांच में पता चला कि म्यांमार से ड्रग्स लाकर भारत में सप्लाई की जा रही थी, जबकि कमाई का पैसा कई बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया जा रहा था. अब तक 142 करोड़ रुपये से ज्यादा की संदिग्ध रकम का पता चला है.
यह मामला पिछले साल त्रिपुरा में पकड़े गए ड्रग्स के एक बड़े कंसाइनमेंट से जुड़ा है. दरअसल, अगस्त 2025 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अगरतला में करीब 49 किलो मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन जब्त की थी. इसी मामले की कड़ियां जोड़ते हुए ईडी की टीम सोमवार को एक्शन में आई. एजेंसी ने जिन जगहों पर तलाशी ली, वे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बेहद करीब हैं. त्रिपुरा में छापेमारी वाली जगह बांग्लादेश बॉर्डर से महज 200 मीटर दूर है, जबकि मिजोरम में यह म्यांमार सीमा से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.
फर्जी खातों से छिपाई 142 करोड़ की काली कमाई
ईडी की जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित सीमा पार नेटवर्क था. जांच एजेंसी के मुताबिक, म्यांमार से मिजोरम के चम्फाई और जोखावथर इलाके के रास्ते मेथामफेटामाइन भारत लाई जाती थी. इसके बाद नशीले पदार्थों की सप्लाई त्रिपुरा में मौजूद रिसीवर तक की जाती थी. ईडी का कहना है कि इस अवैध कारोबार से जुड़े पैसों को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया.
अब तक जांच में 142 करोड़ रुपये से ज्यादा की संदिग्ध कमाई का पता चला है. एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.
मुनीष पांडे