TMC को झटका... ED ने टीएमसी की 440 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की

जांच में अब तक यह सामने आया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य कंपनी को ट्रांसफर किए गए.

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ईडी ने टीएमसी के तीन बैंक खाते फ्रीज किए. (Photo: Reuters) ईडी ने टीएमसी के तीन बैंक खाते फ्रीज किए. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:27 PM IST

ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कर दी है.

ईडी ने अपने बयान में कहा कि विमानन क्षेत्र में काम करने वाले केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े पांच परिसरों पर कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में छापेमारी की गई. यह कार्रवाई कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी, अवैध रूप से धन जुटाने और तृणमूल कांग्रेस के कुछ बैंक खातों के जरिए संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मामले में की गई.

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ईडी के अनुसार, इस बात की जांच कर रही है कि वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी, अवैध रूप से धन इकट्ठा करने और संदिग्ध राशि को टीएमसी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से कैसे भेजा गया. जांच में अब तक यह सामने आया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य कंपनी को ट्रांसफर किए गए.

केयरवेल एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने 2023 से 2026 के दौरान 82.96 करोड़ रुपये एक नई संबद्ध कंपनी को भेजे. इस धन का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी 600 विमान और एक अगस्ता 109 ग्रैंड न्यू हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए किया गया. जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों की खरीद पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अलावा, हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए 2023 में केमैन आइलैंड्स स्थित एक संस्था से 17 लाख अमेरिकी डॉलर का लोन भी लिया.

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ईडी का दावा है कि एम्ब्रेयर लेगेसी 600 विमान और अगस्ता हेलिकॉप्टर खरीदने के बाद इन्हें टीएमसी को ही किराये पर दे दिया गया, जबकि इनकी खरीद के लिए इस्तेमाल किया गया धन कथित तौर पर टीएमसी की ही राशि से आया था. इसके बाद विमान और हेलिकॉप्टर के उपयोग के नाम पर बड़ी रकम का भुगतान भी किया गया. ईडी का कहना है कि इस पूरे लेनदेन का वास्तविक लाभार्थी कौन है और इन वित्तीय व्यवस्थाओं का वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसकी जांच अभी जारी है.

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