केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान और विस्थापित 12वें दिन भी धरने पर डटे रहे. उनकी मांग है कि बिना उचित मुआवजे और पुनर्वास के उन्हें जमीन से बेदखल न किया जाए. (Photo- PTI)
आंदोलन में पहली बार कांग्रेस खुलकर सामने आई. मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार खुद धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों के साथ बैठे. (Photo- PTI)
उमंग सिंघार ने आदिवासी परिवारों और किसानों से सीधे बातचीत की. उन्होंने मुआवजा, जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों की जानकारी ली. (Photo- PTI)
धरना स्थल पर विस्थापितों ने अपनी समस्याओं से जुड़े आवेदन नेता प्रतिपक्ष को सौंपे. उमंग सिंघार ने मौके पर मौजूद एसडीएम से जल्द कार्रवाई की मांग की. (Photo- PTI)
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि रात में पुलिसकर्मी धरना स्थल पर पहुंचकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने डराने-धमकाने और दबाव बनाने का भी आरोप लगाया. (Photo- PTI)
आरोपों के बाद उमंग सिंघार ने मौके से ही सागर रेंज के आईजी मिथिलेश शुक्ला को फोन किया. उन्होंने पुलिस के कथित व्यवहार की शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की. (Photo- PTI)
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि 12 दिनों से धरने पर बैठे लोगों के लिए भोजन, पानी और मेडिकल सुविधा क्यों नहीं दी गई. उन्होंने प्रशासन से तुरंत व्यवस्था करने को कहा. (Photo- PTI)
धरना स्थल पर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता निकला. दोनों पक्षों की संयुक्त समिति बनाकर पूरे मामले की समीक्षा करने पर सहमति बनी. (Photo- PTI)
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा. उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगा. (Photo- PTI)
धरना स्थल पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष और स्थानीय प्रशासन ने भी बैठक में हिस्सा लिया. (Photo- PTI)
उमंग सिंघार के धरना स्थल पहुंचने के बाद आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम मिल गया. अब केन-बेतवा परियोजना का मुद्दा सिर्फ विस्थापन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा विषय बन गया है. (Photo- PTI)