केरल के वायनाड में एक बार फिर भूस्खलन ने तबाही मचा दी. मंगलवार को लगातार हो रही भारी बारिश के बीच सुरंग की कंस्ट्रक्शन साइट के पास हुए भीषण भूस्खलन में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए. अधिकारियों के मुताबिक कम से कम सात लोग अब भी लापता हैं और उनके मलबे में दबे होने की आशंका है. राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है.
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यह हादसा कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ, जहां अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी ट्विन टनल परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है. यह परियोजना पूरी होने पर मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ेगी. घटनास्थल मुंडक्कई इलाके के पास है, जहां वर्ष 2024 में विनाशकारी भूस्खलन में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी.
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हादसे के कई भयावह वीडियो सामने आए हैं. एक वीडियो में एक व्यक्ति लोगों को चिल्लाकर चेतावनी देता सुनाई देता है, "भागो... जल्दी भागो... भाई जल्दी भागो." इसके कुछ ही सेकंड बाद पहाड़ी से मिट्टी और मलबे का विशाल ढेर तेज रफ्तार से सड़क और पुल की ओर बढ़ता दिखाई देता है. सीसीटीवी फुटेज में कई लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आते हैं, लेकिन मलबे की तेज धारा उन्हें अपनी चपेट में ले लेती है.
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भूस्खलन के दौरान पुल पर खड़ा एक टैंकर ट्रक भी मलबे के साथ बह गया. हालांकि यही टैंकर कई लोगों के लिए सुरक्षा कवच साबित हुआ. वीडियो में एक महिला टैंकर के नीचे से निकलकर सुरक्षित बाहर आती दिखाई देती है. टैंकर एक स्थान पर जाकर रुक गया, जिससे मलबे का बहाव भी काफी हद तक वहीं थम गया और कई लोगों की जान बच गई. टैंकर आगे खड़ी एक जीप से टकरा गया, जिसके बीच से एक पुरुष और एक महिला पूरी तरह मिट्टी से लथपथ हालत में बाहर निकलते दिखाई दिए. कुछ अन्य लोग भी घायल अवस्था में बाहर आए.
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मलबे की चपेट में मजदूरों को लाने-ले जाने वाली एक निजी बस भी पास की नदी में जा गिरी और आधी पानी में डूब गई. हादसे के बाद पूरा पुल और आसपास का इलाका मोटी मिट्टी की परत से ढक गया.
राज्य के जनसंपर्क विभाग (पीआरडी) के अनुसार, आठ घायलों को सुरक्षित निकालकर मेप्पाडी स्थित विम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घायलों में हीरा कुमार, दिलीप, सूरज यादव, संजय ठाकुर, रजनीश, तनमय घोष, कूपामल (जया), कुंजू और संतोष कुमार शामिल हैं. प्रभावित परिवारों के लिए चुलिक्का सरकारी एलपी स्कूल में राहत शिविर शुरू किया गया है और आसपास के लोगों को एहतियातन वहां पहुंचाया जा रहा है.
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पुलिस, एनडीआरएफ, दमकल और स्थानीय बचाव दल संयुक्त रूप से राहत अभियान चला रहे हैं. शुरुआती बचाव कार्य स्थानीय लोगों ने शुरू किया था, जिसके बाद अतिरिक्त टीमें मौके पर पहुंचीं. अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे कुछ इंजीनियरों और सुरक्षा कर्मियों के फंसे होने की आशंका है.
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केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में वायनाड में 265 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन की सबसे अधिक वर्षा है. वायनाड और कोझिकोड जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है.
राज्य के कृषि मंत्री टी. सिद्दीक ने इस हादसे को "प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवजनित भूस्खलन" बताया है. उनका आरोप है कि परियोजना का निर्माण कर रही कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सुरंग की खुदाई से निकली मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से नहीं हटाया, जबकि जिला प्रशासन पहले ही संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दे चुका था.
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इस हादसे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कांग्रेस व यूडीएफ कार्यकर्ताओं से राहत कार्यों में सहयोग की अपील की. वहीं वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है और इस समय सभी का ध्यान राहत एवं बचाव कार्यों को सफल बनाने पर होना चाहिए.
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