महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने अलग गुट बनाने की पहल की है. इस बीच केंद्रीय राज्य मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव ने दावा किया है कि इस पूरी स्थिति के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार संजय राउत हैं. जाधव का कहना है कि कांग्रेस में क्षेत्रीय दलों के विलय वाले राउत के बयान से कई सांसद नाराज थे, जिसके बाद उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया.
प्रतापराव जाधव ने 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले संजय राउत ने कहा था कि सभी क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए. उनके मुताबिक, इस बयान से UBT के कई सांसद असहज हो गए थे. जाधव ने दावा किया कि यही नाराजगी आगे चलकर पार्टी में टूट की वजह बनी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसदों के जाने से अगर किसी को सबसे ज्यादा खुशी हुई होगी तो वह संजय राउत ही होंगे. जाधव ने यह भी कहा कि राउत के बयानों ने पार्टी के भीतर असमंजस का माहौल पैदा किया.
6 सांसदों ने स्पीकर को लिखा पत्र
UBT के 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है. इनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं. इन सांसदों ने आगे चलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जाने की इच्छा भी जताई है. बताया जा रहा है कि सभी सांसद दिल्ली पहुंचे और उन्होंने अपनी स्थिति से स्पीकर को अवगत कराया.
शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से अब केवल 3 सांसद उद्धव ठाकरे के साथ दिखाई दे रहे हैं. दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे मौजूद थे. इससे पार्टी में टूट की अटकलों को और बल मिला.
संजय राउत ने क्या कहा था?
संजय राउत ने हाल ही में कहा था कि सभी 9 सांसद शिवसेना UBT के टिकट और चुनाव चिन्ह मशाल पर जीतकर आए हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए. राउत ने यह भी कहा था कि सांसद किसी और के नाम पर नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चुनाव जीतकर आए हैं.
लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद UBT के भीतर इस तरह की टूट को उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. हालांकि बागी सांसदों के कदम पर अंतिम फैसला संसदीय प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई हलचल पैदा कर दी है.
ऋत्विक भालेकर