9 मिनट की 'दिवाली' से पावर ग्रिड पर न पड़े असर, इंतजाम में जुटे अफसर

पावर ग्रिड के सामने स्थिरता बनाए रखने, ब्लैकआउट जैसी स्थिति से बचने की चुनौती है. संभावित खतरे को देखते हुए पावर ग्रिड की सुरक्षा से जुड़े कदमों पर विचार के लिए पूरे देश के बिजली से जुड़े पेशेवरों को सक्रिय कर दिया गया है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

पंकज उपाध्याय

  • मुंबई,
  • 04 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

  • 5 अप्रैल को 9 मिनट लाइट बंद से मांग में आएगी भारी कमी
  • हो सकती है हाई वोल्टेज की समस्या, बिजली पेशेवर सक्रिय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम जारी वीडियो संदेश में 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट तक लाइट बंद करने का आह्वान किया है. प्रधानमंत्री ने इस दौरान दीपक, टॉर्च, मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाने की अपील की है. कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से किए गए इस आह्वान ने पावर ग्रिड को अलर्ट मोड में ला खड़ा किया है.

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पीएम के इस आह्वान से पावर ग्रिड के सामने स्थिरता बनाए रखने, ब्लैकआउट जैसी स्थिति से बचने की चुनौती है. संभावित खतरे को देखते हुए पावर ग्रिड की सुरक्षा से जुड़े कदमों पर विचार के लिए पूरे देश के बिजली से जुड़े पेशेवरों को सक्रिय कर दिया गया है.

सूत्रों का कहना है कि 9 मिनट तक लाइट बंद होने के कारण बिजली की मांग 15000 मेगावाट कम हो जाएगी. यह फ्रीक्वेंसी को प्रभावित करेगी. इस स्थिति में कैलिब्रेशन के प्रबंधन की जरूरत होगी और इसके लिए केवल एक दिन का समय है. पावर ग्रिड को ब्लैकआउट जैसी स्थिति में फ्रीक्वेंसी को मैनेज करने की जरूरत है.

सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर ने यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन को पत्र लिखकर ग्रिड की सुरक्षा और सुचारू बिजली आपूर्ति के लिए कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए हैं. सेंटर का अनुमान है कि पीएम के आह्वान के कारण बिजली बंद होने से बिजली की खपत में 3000 मेगावाट की कमी आएगी. इसके कारण हाईवोल्टेज की समस्या हो सकती है.

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पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड इस संभावित खतरे को देखते हुए सक्रिय हो गया है और इसके लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर लोड डिस्पैच सेंटर्स के संपर्क में है. आजतक से बात करते हुए बिजली विभाग के पूर्व सचिव आरसी शाही ने कहा कि पावर ग्रिड, बिजली की मांग में आई कमी को मैनेज करने में सक्षम है.

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उन्होंने कहा कि बिजली की मांग या भार कम हो जाएगा, लेकिन अगर फ्रीक्वेंसी का ठीक से प्रबंधन किया जाता है, तो कोई अस्थिरता नहीं होगी. इस दौरान एहतियात के तौर पर बिजली उत्पादन केंद्रों को भी उत्पादन में कमी करनी चाहिए. पूर्व विद्युत सचिव ने इस स्थिति से निपटने के लिए समन्वित दृष्टिकोण को जरूरी बताया और कहा कि जब लाइट के स्विच ऑन हो जाएं, तब उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

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