जामताड़ा के पटेल चौक पर इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आम लोगों का ध्यान खींचा. यहां नगर पंचायत की सफाईकर्मी पिंकी देवी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ उसे सलामी दी. आमतौर पर ऐसे सार्वजनिक आयोजनों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों या शिक्षकों को ध्वजारोहण करते देखा जाता है, लेकिन इस स्थान पर कहानी करीब ढाई दशक से अलग है.
दरअसल, पटेल चौक पर हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को किसी मेहनतकश नागरिक को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है. कभी सफाई कर्मचारी, कभी मजदूर तो कभी रिक्शा चालक राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देश के प्रति अपनी निष्ठा और सम्मान जाहिर करता है. इस बार यह अवसर पिंकी देवी को मिला, जिनके लिए यह क्षण व्यक्तिगत तौर पर बेहद गौरवपूर्ण रहा.
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पिंकी देवी ने कहा कि एक सफाईकर्मी होने के बावजूद उन्हें तिरंगा फहराने का मौका मिलना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है. उनके लिए यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस वर्ग के सम्मान का प्रतीक है जो रोजाना मेहनत करके समाज को बेहतर बनाने में योगदान देता है.
25 साल पहले शुरू हुई थी पहल
पटेल सेवा संघ की ओर से शुरू की गई यह पहल अब 25 वर्ष पूरे कर चुकी है. संघ के राजेंद्र राउत के मुताबिक, इसके पीछे सोच समाज के उन लोगों को सम्मान देने की थी, जिन्हें अक्सर सार्वजनिक मंचों पर पीछे रखा जाता है. मेहनत-मजदूरी करने वाले नागरिकों के भीतर देशभक्ति की भावना को मजबूत करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य रहा है.
समय के साथ यह व्यवस्था जामताड़ा में एक पहचान बन गई. हर वर्ष राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर किसी ऐसे व्यक्ति का चयन किया जाता है, जो श्रम के जरिए अपना और अपने परिवार का जीवन आगे बढ़ा रहा हो. इस तरह ध्वजारोहण का कार्यक्रम समाज के कमजोर और मेहनतकश तबके को सम्मान देने का माध्यम बन गया है.
राजेंद्र राउत बताते हैं कि इस पहल में केवल पेशा ही चयन का आधार नहीं है. इसके लिए कुछ विशेष शर्तें भी तय की गई हैं, ताकि सम्मान पाने वाला व्यक्ति समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण पेश कर सके.
शिक्षा और नशामुक्ति का भी संदेश
पटेल चौक पर ध्वजारोहण का अवसर ऐसे मजदूर, सफाईकर्मी या रिक्शा चालक को दिया जाता है, जो अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देता हो और शराब का सेवन नहीं करता हो. यानी इस सम्मान के जरिए केवल श्रम का गौरव नहीं बढ़ाया जाता, बल्कि परिवार में शिक्षा को बढ़ावा देने और नशे से दूरी बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है.
आयोजकों का मानना है कि राष्ट्रीय पर्व से बेहतर अवसर समाज में इन जरूरी मुद्दों को सामने रखने का नहीं हो सकता. मेहनतकश व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से उसके जैसे दूसरे लोगों को भी बच्चों की शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरणा मिलती है.
पिंकी देवी का ध्वजारोहण इसी सोच की अगली कड़ी है. 25 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बताती है कि देश के प्रति सम्मान किसी पद, पेशे या आर्थिक हैसियत का मोहताज नहीं. राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला हर नागरिक तिरंगे के सम्मान का बराबर अधिकारी है.
मेहनतकशों के सम्मान की मिसाल
पटेल चौक की यह पहल केवल एक राष्ट्रीय पर्व के आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है. इसने समाज के उस वर्ग को सार्वजनिक सम्मान देने का रास्ता बनाया है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी मेहनत से शहर और व्यवस्था को चलाने में अहम भूमिका निभाता है.
नेताओं, अधिकारियों और शिक्षकों के साथ सफाईकर्मी, मजदूर तथा रिक्शा चालक भी देश की प्रगति में अपना योगदान देते हैं. ऐसे में उनके हाथों राष्ट्रीय ध्वज फहराना समानता और सम्मान का मजबूत संदेश देता है. जामताड़ा की यह परंपरा इसी विचार को लगातार आगे बढ़ा रही है.
25 वर्षों का यह सफर अब एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसमें तिरंगा समाज के हर वर्ग की साझी पहचान बनकर सामने आता है. पिंकी देवी के हाथों हुआ इस साल का ध्वजारोहण भी इसी संदेश को दोहराता है कि भारत की ताकत उसके हर नागरिक की मेहनत, जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण में है.
देवाशीष भारती