जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्याओं के अस्थायी ठिकाने खाली होने लगे हैं. प्रशासन ने उन जमीन मालिकों को नोटिस दिया है, जिनके प्लॉट पर रोहिंग्या परिवार झुग्गियों या दुकानों में रह रहे थे. नोटिस के बाद मंगलवार से लोग अपनी झुग्गियां हटाने लगे. बुधवार को भी यह काम जारी रहा. सामान समेटने के बाद अब बड़ा सवाल यही है कि ये लोग आगे कहां जाएंगे.
प्रशासन ने जमीन मालिकों से कहा है कि उनके प्लॉट पर बने रोहिंग्याओं के अस्थायी ढांचे हटाए जाएं. इसके बाद नरवाल में रहने वाले कई लोग अपनी झुग्गियां खुद ही तोड़कर सामान निकालते दिखे. किसी ने घर का सामान बांधा, तो कोई अपना बनाया हुआ ढांचा हटाता नजर आया.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यहां से हटने के बाद ये लोग किस जगह जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की नजर इस पूरी गतिविधि पर बनी हुई है.
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल में गृह मंत्रालय की तरफ से बनाई गई जनसांख्यिकीय बदलाव पर काम करने वाली हाई लेवल कमेटी ने जम्मू का दौरा किया था. कमेटी ने नरवाल इलाके में बनी रोहिंग्या बस्ती का भी जायजा लिया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू संभाग के 10 जिलों में 6 हजार से ज्यादा रोहिंग्या रह रहे हैं. कश्मीर घाटी में इनकी संख्या 900 से ज्यादा बताई गई है. सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में रहने वाले कुछ रोहिंग्याओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में केस दर्ज हैं.
2021 में 170 लोगों को होल्डिंग सेंटर भेजा गया था
जम्मू में रोहिंग्याओं को लेकर कार्रवाई पहले भी होती रही है. साल 2021 में करीब 170 रोहिंग्या मुस्लिमों को जम्मू में अवैध रूप से रहने के आरोप में पकड़ा गया था. बाद में उन्हें कठुआ जिले के हीरानगर इलाके में बने होल्डिंग सेंटर भेजा गया था. रोहिंग्याओं की मौजूदगी को लेकर जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से बहस चल रही है. कुछ सामाजिक संगठन उन्हें वापस भेजने की मांग करते रहे हैं. सुरक्षा से जुड़े कुछ विशेषज्ञ भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुके हैं.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है. उनका कहना है कि रोहिंग्याओं को वापस भेजे जाने तक कंटेनमेंट सेंटर में रखा जाना चाहिए. वैद ने यह भी दावा किया कि जम्मू में रोहिंग्याओं की बसावट के पीछे एक सुनियोजित साजिश रही है, जिसका मकसद जम्मू की जनसांख्यिकी बदलना था. यह उनका दावा है.
रोहिंग्याओं का क्या कहना है?
दूसरी तरफ, नरवाल से हटाए गए रोहिंग्याओं का कहना है कि वे म्यांमार वापस नहीं जा सकते. उनका दावा है कि वहां उन्हें अब भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.
फिलहाल नरवाल में झुग्गियां हटाने का काम जारी है. लोगों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई के बाद उनका अगला ठिकाना क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है.
सुनील जी भट्ट