'498A का दायरा सिर्फ शादी तक नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लिव-इन पार्टनर को भी मिलेगा पत्नी जैसा हक

प्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 498A का संरक्षण लंबे समय तक 'शादी जैसे रिश्ते' में रहने वाले लिव-इन कपल पर भी लागू होगा. इसके लिए दोनों का बालिग होना, आपसी सहमति से रिश्ते में होना और शादी का इरादा होना जरूरी है.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 498A का संरक्षण 'शादी जैसे रिश्ते' की कैटेगरी में आने वाले लंबे समय के लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होगा. (फोटो-PTI) सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 498A का संरक्षण 'शादी जैसे रिश्ते' की कैटेगरी में आने वाले लंबे समय के लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होगा. (फोटो-PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:19 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पति या ससुराल वालों की ओर से महिलाओं को परेशान करने से संरक्षण देने वाली धारा 498A को लेकर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि धारा 498A का संरक्षण उन लंबे समय तक चलने वाले लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होगा, जो 'शादी जैसे रिश्ते' (Relationship in the Nature of Marriage) की कैटेगरी में आते हैं.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज के समय में सिर्फ कानूनी तौर पर हुई शादी ही एकमात्र आधार नहीं है, क्योंकि 'शादी जैसे रिश्ते' को भी मान्यता दी गई है. कोर्ट ने धारा 498A को ऐसे लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू माना है, जो 'शादी जैसे रिश्ते' की शर्तों को पूरा करते हैं और जिनमें शादी करने का इरादा रिश्ते का एक जरूरी हिस्सा हो.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि धारा 498A के तहत सुरक्षा उन लिव-इन रिलेशनशिप को मिलेगा, जिनमें दो बालिग लोग आपसी सहमति से रिश्ते में हों और उनका रिश्ता 'शादी जैसे रिश्ते' की कैटेगरी में आता हो. कोर्ट ने इस दौरान यह भी साफ किया कि कानून की यह बात केवल धारा 498A के तहत होने वाली कानूनी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगी. इसे कानून की किसी दूसरी धारा पर लागू नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह फैसला सिर्फ धारा 498A IPC से जुड़े मामलों के लिए है और इसका कानून की किसी दूसरी धारा पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

Advertisement

लिव-इन रिलेशनशिप रियलटी 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'शादी जैसे लिव-इन रिलेशनशिप' अब खासकर शहरी भारत में एक आम रियलिटी बन चुके हैं. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह साबित करने की जिम्मेदारी महिला पार्टनर की होगी कि उसका रिश्ता सिर्फ प्रेम संबंध नहीं था, बल्कि 'शादी जैसे रिश्ते' की कैटेगरी में आता था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज के सामाजिक बदलाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है. अगर कोई महिला शादी से पहले ही किसी व्यक्ति के साथ घर और परिवार जैसे रिश्ते में रह रही है, जो आज शहरी इलाकों में कुछ हद तक आम है, तो उसे भी वही प्रोटेक्शन मिलना चाहिए जो एक शादीशुदा महिला को मिलता है.

कोर्ट ने कहा कि किसी महिला के साथ होने वाली प्रताड़ना यह देखकर नहीं आती कि वह शादीशुदा है या नहीं. एक बार प्रताड़ना किसी रिश्ते में आ जाए तो उसका नुकसान पहुंचाने वाला असर और बढ़ जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »