चुनाव आयोग का फैसला ही मान्य, ये स्वच्छ राजनीति की बड़ी जीत: कांग्रेस

'आज तक' से बातचीत में माकन ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में अगर 20 सीटें खाली होती हैं और उपचुनाव होता है तो कांग्रेस को फायदा होगा.

Advertisement
अजय माकन (फाइल) अजय माकन (फाइल)

रणविजय सिंह / मौसमी सिंह / खुशदीप सहगल

  • नई द‍िल्ली,
  • 19 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST

चुनाव आयोग की ओर से 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की राष्ट्रपति से सिफारिश करने का कांग्रेस ने स्वागत किया है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने इसे स्वच्छ सियासत की बड़ी जीत बताया है. माकन के मुताबिक 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' में चुनाव आयोग का फैसला ही मान्य होता है और पूर्व में ऐसे जितने भी मामले सामने आए, उनमें राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश पर ही मुहर लगाई.

Advertisement

'20 सीटों पर चुनाव होता है तो कांग्रेस को फायदा'

'आज तक' से बातचीत में माकन ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में अगर 20 सीटें खाली होती हैं और उपचुनाव होता है तो कांग्रेस को फायदा होगा. माकन ने इन सीटों के लिए कहा कि ये कांग्रेस की पारंपरिक सीटें रही हैं और यहां से पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनकर आते रहे हैं. खुद चुनाव लड़ने की संभावना पर माकन ने कहा कि वे चुनाव लड़ाएंगे.

' '

माकन ने कहा, 'आम आदमी पार्टी के विधायकों ने जानबूझ कर इस पूरे मसले को 2 साल के लिए लटकाए रखा. चुनाव आयोग ने इसे वैधानिक प्रक्रिया के तौर पर सुना. अब ये फैसला आया है. अब और विलंब नहीं होना चाहिए.'

माकन के मुताबिक AAP के इन विधायकों ने लाभ का पद लिया. इन्हें ऑफिस चाहिए था, गाड़ी चाहिए थी, वो तमाम सरकारी सुविधाएं चाहिए थीं जो मंत्रियों को मिलती हैं.  

Advertisement

'संविधान के अंतर्गत चुनाव आयोग का फैसला मान्य'

माकन ने कहा, 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में संविधान के अंतर्गत चुनाव आयोग ही निर्णायक भूमिका निभाता है और उसका फैसला मान्य होता है. राष्ट्रपति साहब को भी उनका फैसला मानना चाहिए क्योंकि वही एक पक्ष है जो अपनी बात दे सकता है.

'आम आदमी पार्टी को किस बात से डर है?'

माकन ने कहा, जो करना चाहे करें लेकिन इससे पहले भी सोनिया गांधी के मसले पर जब ऐसी बात हुई थी तो उन्होंने किसी का इंतजार नहीं किया था. 23 मार्च 2006 को सोनिया गांधी ने इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ा. जया बच्चन के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से मना कर दिया था और राष्ट्रपति के फैसले पर मुहर लगाई थी.'

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »