दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. अगले दो साल में राजधानी को 2800 नई AC लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी. शनिवार को सीएम रेखा गुप्ता ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक दिल्ली की कुल बसों की संख्या बढ़ाकर करीब 14 हजार करना है. इससे लोगों को बेहतर बस सेवा मिलेगी, वहीं साफ ऊर्जा आधारित परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा.
सरकार के मुताबिक, नई इलेक्ट्रिक बसों को अगले साल अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर उतारा जाएगा. अगस्त 2028 तक सभी 2800 बसें दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगी. सरकार का कहना है कि नई बसों के आने से सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ेगी, लोगों को सफर के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे और राजधानी की हवा को साफ रखने में भी मदद मिलेगी.
इस योजना के तहत 2800 बसों में से 1400 बसें 12 मीटर लंबी होंगी, जबकि बाकी 1400 बसों की लंबाई 9 मीटर होगी. 9 मीटर वाली बसें खास तौर पर संकरी सड़कों और बाहरी इलाकों में चलाई जाएंगी. इससे उन जगहों तक भी बस सेवा पहुंच सकेगी, जहां बड़ी बसें आसानी से नहीं चल पातीं. सरकार का मानना है कि इससे लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इससे ज्यादा लोगों तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा भी पहुंचेगी.
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पिछले साल ही 2800 इलेक्ट्रिक बसों की मांग भेजी थी. इसके बाद पुरानी इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के अनुभव को देखते हुए यह फैसला लिया गया कि कुल बसों में से आधी बड़ी और आधी छोटे साइज की बसें खरीदी जाएंगी.
IIT दिल्ली तैयार करेगा नया रूट प्लान
बसों की संख्या बढ़ने के साथ उनके संचालन को भी ज्यादा प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए सरकार IIT दिल्ली के साथ मिलकर बस रूट का नया प्लान तैयार करेगी. रूटों की समीक्षा कर उन्हें जरूरत के हिसाब से बदला जाएगा, ताकि बसों का सही इस्तेमाल हो सके और यात्रियों को कम इंतजार करना पड़े. इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों के साथ उन क्षेत्रों में भी बेहतर बस सेवा मिल सकेगी, जहां अभी सार्वजनिक परिवहन सीमित है.
सरकार का कहना है कि यह योजना सिर्फ नई बसें जोड़ने तक सीमित नहीं है. इसका मकसद सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम करना भी है. नई बसों, बेहतर रूट प्लानिंग और बड़े बेड़े के साथ आने वाले वर्षों में दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को ज्यादा सुविधाजनक, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की तैयारी की जा रही है.
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