दिल्ली में शराब नीति बदलने से 70 लाख बोतलें गोदामों में लावारिस पड़ीं, जानिए अब क्या होगा इनका?

दिल्ली में 1 सितंबर से पुरानी शराब नीति लागू होने के चलते आबकारी विभाग के पास शराब 70 लाख बोतलें बची हुई हैं. ऐसे में आबकारी विभाग मौजूदा नीति के तहत इन बोतलों की बिक्री या निपटाने के तरीकों पर विचार कर कहा है. ये बोतलें शराब और बीयर की हैं. इन्हें केजरीवाल सरकार की विवादों में घिरी शराब नीति 2021-22 के तहत नहीं बेचा जा सका.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST

दिल्ली में 1 सितंबर से पुरानी शराब नीति लागू होने के चलते आबकारी विभाग के पास शराब 70 लाख बोतलें बची हुई हैं. ऐसे में आबकारी विभाग मौजूदा नीति के तहत इन बोतलों की बिक्री या निपटाने के तरीकों पर विचार कर कहा है. ये बोतलें शराब और बीयर की हैं. इन्हें केजरीवाल सरकार की विवादों में घिरी शराब नीति 2021-22 के तहत नहीं बेचा जा सका. ऐसे में ये बोतलें अभी वेयरहाउसों में पड़ी हैं. 

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समाचार एजेंसी के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि विभिन्न कंपनियों की 35 लाख से अधिक बोतलें वर्तमान आबकारी नीति के तहत रजिस्टर्ड हैं, ऐसे ब्रांड्स को कॉरपोरेशन वेन्ड्स के माध्यम से बेचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि शेष बोतलें उन ब्रांडों की हैं, जो अभी तक मौजूदा नीति के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं. 

अधिकारी ने बताया कि एक विकल्प ये है कि इन ब्रांड्स को नई नीति के तहत रजिस्टर्ड कराया जाए और शराब वेंडर्स के माध्यम से बेचा जाए, या इन बोतलों को नष्ट कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार इन बिना रजिस्टर्ड ब्रांड्स की बोतलों को नष्ट करने के बजाय उनकी बिक्री की अनुमति दे सकती है. 
 
2019 का उदाहरण देते हुए अधिकारी ने बताया कि तब आबकारी विभाग ने छापे के दौरान जब्त की गईं शराब की बोतलों को नष्ट करने के बजाय टेस्टिंग के बाद उनकी मूल कीमत से 25% कम कीमत में बेचने की अनुमति देने का प्रस्ताव तैयार किया था. 
 
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल ने 17 नवंबर 2011 को शराब की नई नीति 2021-22 लागू की थी. लेकिन भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद सीबीआई जांच शुरू हो गई. इसके बाद सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया. अब 1 सितंबर से पुरानी शराब नीति ही लागू है. 
 
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक शराब की दुकानों के लिए 518 लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं. कुल 406 ठेके खुल गए हैं और उनमें से 400 ने स्टॉक के लिए ऑर्डर देना शुरू कर दिया है. आबकारी विभाग के पास करीब 650 ब्रांड रजिस्टर्ड हो चुके हैं. अधिकारियों ने कहा कि बचा हुआ स्टॉक मौजूदा उत्पाद नीति के अनुरूप कीमतों पर बेचा जा सकता है. अधिकारियों ने कहा कि स्टॉक में रखी बिना रजिस्ट्रेशन वाले ब्रांडों की बीयर की बोतलों को जल्द से जल्द नष्ट करना पड़ सकता है, क्योंकि ये बोतलें बिना रेफ्रिजरेशन के लंबे समय तक नहीं रखी जा सकतीं. 

 

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