Corona cases in Delhi: दिल्ली में 24 घंटे के भीतर 20718 नए मामले, पाजिटिविटी रेट 30% के पार

दिल्ली में आज कोरोना के 20718 नए मामले दर्ज किए गए हैं. यहां 24 घंटे में 67614 सैंपलों की जांच की गई. संक्रमण दर 30.64% है. दो दिन पहले 98 हजार सैंपलों की जांच की जा रही थी, वहीं अब घटाकर 67 हजार सैंपलों पर आ गई है.

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Corona. Corona.

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST
  • दो दिन पहले 98 हजार सैंपलों की हो रही थी जांच
  • अब 67 हजार सैंपल ही जांच के लिए भेजे गए

दिल्ली में कोरोना के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है. पिछले 24 घंटे में 20718 नए मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं 30 लोगों ने अपनी जान भी गंवा दी है. इस समय दिल्ली में सक्रमण दर 30% के पार चला गया है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का दावा है कि राजधानी में अब कोरोना का पीक गुजर चुका है और मामलों में गिरावट देखने को मिलेगी.

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जानकारी के अनुसार, आज दिल्ली में 20718 नए मामले दर्ज किए गए हैं. यहां 24 घंटे में 67614 सैंपलों की जांच की गई. संक्रमण दर 30.64% है. दो दिन पहले 98 हजार सैंपलों की जांच की जा रही थी, वहीं अब घटाकर 67 हजार सैंपलों पर आ गई है. दिल्ली में लगातार दूसरे दिन संक्रमण दर 30.64 फीसदी बनी हुई है. संक्रमण दर 1 मई के बाद सबसे ज्यादा है. 1 मई को संक्रमण दर 31.61 प्रतिशत थी. दिल्ली में एक्टिव केस 93,407 हो गए हैं. 24 घंटे में 30 मरीजों की मौत हुई. इसके साथ कोरोना से मौत का कुल आंकड़ा 25,335 पर पहुंच गया है. इस समय होम आइसोलेशन में 69,554 मरीज हैं. सक्रिय कोरोना मरीजों की दर 5.52 फीसदी है.

इसके अलावा रिकवरी दर 92.98 फीसदी है. 24 घंटे में 20,718 केस मिलने के साथ ही कुल आंकड़ा 16,91,684 पर पहुंच गया है. 24 घंटे में 19,554 मरीज डिस्चार्ज हुए. कुल आंकड़ा 15,72,942 हो गया है. कोरोना जांच का कुल आंकड़ा 3,39,94,442 हो चुका है. इनमें RTPCR टेस्ट 54,141 व एंटीजन 13,483 शामिल हैं. वहीं कंटेनमेंट जोन की संख्या 30,472 है. कोरोना डेथ रेट की बात करें तो यह 1.5 फीसदी है. 

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दिल्ली में बीते दिनों से अब तक कब कितनी जांचें हुईं

  • दिल्ली में 10 जनवरी को 76670 टेस्ट हुए, 19166 लोग पॉजिटिव पाए गए और पॉजिटिविटी रेट 25% दर्ज हुआ था.
  • 11 जनवरी को 82884 टेस्ट किए गए, इनमें 21259 लोग पॉजिटिव पाए गए और पॉजिटिविटी रेट 25.65% दर्ज हुआ था.
  • 12 जनवरी को 105102 टेस्ट हुए, 27561 लोग पॉजिटिव पाए गए और पॉजिटिविटी रेट 26.22% दर्ज हुआ था.
  • 13 जनवरी को 98832 टेस्ट हुए, 28867 लोग पॉजिटिव पाए गए और पॉजिटिविटी रेट 29.21% दर्ज हुआ था.
  • 14 जनवरी को 79578 टेस्ट हुए, 24282 लोग पॉजिटिव पाए गए और पॉजिटिविटी रेट 30.64% दर्ज हुआ था.

दिल्ली में कोरोना अस्पतालों का हाल

दिल्ली के कोरोना अस्पतालों में कुल 2620 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 102 कोविड सस्पेक्ट हैं और 2518 कन्फर्म कोरोना मरीज हैं. इन कुल 2518 मरीजों में 2170 दिल्ली से हैं और 348 दिल्ली से बाहर के हैं. इनमें से 887 मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर एडमिट किया गया है, जिनमें से 113 मरीज गंभीर स्थिति में वेंटिलेटर पर हैं, जबकि 724 कोरोना मरीज ICU में हैं. दिल्ली कोरोना बुलेटिन के अनुसार, डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल्स में बेड्स में 15,494 में से 2620 पर मरीज हैं और 83.09% बेड्स खाली हैं.

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इसी तरह, कोविड केयर सेंटर्स में 4626 बेड्स में से 584 पर मरीज हैं और 87.35% बेड्स खाली हैं, जबकि कोविड हेल्थ सेंटर्स में 158 बेड्स में से 32 पर मरीज हैं और 79.75% बेड्स खाली हैं.

स्वास्थ्य मंत्री बोले: उम्मीद है अब केस घटने लगेंगे

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में कल कोरोना के काफी कम मामले आए. अब कम आने की उम्मीद है. हमने कोई टेस्ट कम नहीं किए हैं, बल्कि केंद्र के प्रोटोकॉल की वजह से ऐसा हो रहा है. दिल्ली में कोरोना केस की पीक आ चुका है. हमें लग रहा है कि अब केस कम होने लगेंगे.

अस्पतालों में बेड खाली, फिर भी बढ़ता जा रहा डेथ रेट

कहा जा रहा है कि डेल्टा के मुकाबले कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन कम खतरनाक है. अस्पतालों में बेड खाली हैं. लेकिन फिर भी डेथ रेट बढ़ता जा रहा है. दिल्ली की बात करें तो पिछले 6 महीने में यहां जितनी मौतें नहीं हुई थीं, उतनी अब हो चुकी हैं.

ओमिक्रॉन के शुरुआती कम्युनिटी ट्रांसमिशन के सबूत मिले

द इंस्टिट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज़ (ILBS) ने एक शोध किया है, जिसमें दिल्ली में ओमिक्रॉन (B1.1.529) के शुरुआती कम्युनिटी ट्रांसमिशन के सबूत मिले हैं. ILBS द्वारा किए गए इस शोध में 264 मामलों को शामिल किया गया था. शोध से पता चलता है कि इनमें से 68.9% यानी 182 मामले डेल्टा वैरिएंट के पाए गए, जबकि 31.06% यानी 82 मामले ओमिक्रॉन के थे. ओमिक्रॉन के ज़्यादातर मामले एसिंम्पोमैटिक (n=50,61%) थे और इन्हें अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं थी. 

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