क्या है सीलिंग और AAP क्यों कर रही है संसद मार्च की तैयारी?

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग के आदेश जारी किए. इसके बाद दुकानों या कमर्शियल प्रॉपर्टी को सीलिंग से बचाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन चार्ज का प्रावधान किया.

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आप करेगी संसद मार्च आप करेगी संसद मार्च

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

दिल्ली में अवैध निर्माणों की सीलिंग और तोड़फोड़ के खिलाफ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी सड़कों पर उतरने जा रही है. पार्टी ने राजधानी में जारी सीलिंग के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है, जिसके अंतर्गत 23 जनवरी को दिल्ली बंद के दौरान पार्टी नेता व्यापारियों के साथ खड़े होंगे. साथ ही 29 जनवरी को व्यापारियों के साथ आम आदमी पार्टी विरोध में संसद मार्च भी करेगी.

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आम आदमी पार्टी का ये विरोध सीलिंग के साथ एफडीआई के खिलाफ भी होगा. रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली के व्यापारियों के विरोध के बावजूद बीजेपी शासित एमसीडी सीलिंग के माध्यम से व्यापारियों का धंधा बंद करने और मज़दूरों का रोज़गार छीनने का सिलसिला जारी है. अब बीजेपी की केंद्र सरकार ने एफ़डीआई लागू कर दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें बंद करने का इंतज़ाम कर दिया गया है. रविवार को इस संबंध में बाकायदा पार्टी कार्यालय में सांसदों, विधायकों, पार्षदों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की गई.

23 जनवरी को पार्टी जहां व्यापारियों के साथ बाजार बंद में हिस्सा लेगी. वहीं 29 जनवरी को आम आदमी पार्टी सभी व्यापारियों के साथ संसद मार्च करेगी. दरअसल, इसी दिन से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है.

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दरअसल, दिल्ली में निर्माण कार्यों के लिए एमसीडी से इजाजत लेनी पड़ती है. राजधानी के अलग-अलग इलाकों में अवैध निर्माण की शिकायतों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 2005 में एक्शन का आदेश दिया था. एमसीडी का लचीला रवैया देखकर मामला सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग करने के आदेश जारी किए. इसके बाद दुकानों या कमर्शियल प्रॉपर्टी को सीलिंग से बचाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन चार्ज का प्रावधान किया. कारोबारियों ने ये चार्ज अदा करने में भी लापरवाही दिखाई. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी दुकानों या प्रॉपर्टी को सील करने का आदेश दिया और इसके लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया. अब मॉनिटरिंग कमेटी की देखरेख में ऐसी दुकानों को सील किया जा रहा है, जिन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा नहीं कराया है.

कन्वर्जन चार्ज न देने वालों का निर्माण अवैध होने पर उसे गिराने का भी आदेश है. नगर निगम की इस कार्रवाई को मास्टर प्लान 2021 का हिस्सा बताया जा रहा है. इसके तहत खान मार्केट और डिफेंस कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों में कार्रवाई की जा रही है. जिससे व्यापारियों पर संकट आ गया है.

कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बंद की घोषणा करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम कानून 1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रख सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है.

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दिल्ली में चल रहे सीलिंग अभियान पर जारी विवाद का असर 15 जनवरी को विधानसभा में भी देखने को मिला था. आप बीजेपी विधायकों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए नारेबाजी की जिससे दो घंटे में कार्यवाही चार बार स्थगित हुई थी.  विपक्ष के दो विधायकों को मार्शलों ने बाहर तक निकाल दिया था.

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