NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने मंगलवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से दाखिल की गई है. CBI सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट को आगे की सुनवाई के लिए पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.
CBI ने जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं. CBI ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम सबूतों को शामिल किया है. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाया गया है.
चार्जशीट में इन 13 आरोपियों के नाम हैं...
1) मनीषा मंधारे – NTA बायोलॉजी विशेषज्ञ
2) प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी – NTA केमिस्ट्री विशेषज्ञ
3) मनीषा संजय हवालदार – NTA फिजिक्स विशेषज्ञ
4) मनीषा संजय वाघमारे – बिचौलिया
5) धनंजय निवृत्ति लोखंडे – बिचौलिया
6) शुभम माधुकर खैरनार – बिचौलिया
7) यश यादव – बिचौलिया
8) मंगलिलाल बिवाल – बिचौलिया
9) विकास बिवाल – बिचौलिया
10) दिनेश बिवाल – बिचौलिया
11) डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे – बिचौलिया
12) शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर – RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक
13) तेजस हर्षदकुमार शाह – APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO
चार्जशीट में शामिल किए गए 360 गवाह और 43 अहम सबूत
एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र के स्रोत और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की गई है. CBI के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है. इस मामले में BNS 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(a) के तहत भी कार्रवाई की गई है.
वहीं पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 10 के साथ धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. 12 मई को दर्ज हुई थी FIR CBI के मुताबिक, यह मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद सामने आया था. इसके बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को CBI को शिकायत दी थी. इसी शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई. जांच के लिए CBI ने 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें बनाई थीं.
आरोपियों के बैंक खाते और डीमैट खाते किए गए फ्रीज
एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 जगहों पर छापेमारी की. छापेमारी के दौरान CBI ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए. इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई गई. 13 लोगों की हुई गिरफ्तारी CBI के मुताबिक, इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA से जुड़े केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं.
जांच में कई बिचौलियों की पहचान हुई है. आरोप है कि इन लोगों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. CBI ने दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया है. इन पर लीक पेपर खरीदने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है. डिजिटल सबूतों की हुई जांच CBI ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है. एजेंसी को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिली है. CBI का कहना है कि इन रिपोर्टों से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था.
फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे भी हो सकती है कार्रवाई
CBI ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है. एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक विश्लेषण और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
सृष्टि ओझा / अरविंद ओझा