विटामिन- डी कम होने पर कब है इंजेक्शन या दवा की जरूरत, कब डाइट और धूप से चल जाएगा काम

आज के समय में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन गई है, जो हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों की समस्याओं का कारण बनती है. डॉक्टर दवा, इंजेक्शन या सप्लीमेंट लेने की सलाह कब देते हैं इस बारे में जानते हैं.

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 विटामिन- डी की कमी को कैसे करें पूरा विटामिन- डी की कमी को कैसे करें पूरा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

आज के समय में शरीर में विटामिन- डी की कमी होना एक आम समस्या बन गई है. टेस्ट से इसकी कमी का पता चलता है. अगर Vitamin D का लेवल 20 ng/mL से कम होता है तो फिर डॉक्टर दवा, इंजेक्शन या फिर सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं, लेकिन कितने कम लेवल पर क्या लेना चाहिए इसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है. ऐसे में यह जानना आपके लिए जरूरी है.

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विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण, हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों की कार्यक्षमता के लिए बहुत जरूरी होता है.लेकिन केवल रिपोर्ट में विटामिन D कम होना हमेशा इलाज की जरूरत नहीं बनता है.  इलाज का फैसला खून में 25(OH) Vitamin D लेवल, व्यक्ति के लक्षण और अन्य फैक्टर पर निर्भर करता है. कुछ मामलों में धूप के सेवन और अच्छे खानपान से ही आप काम चला सकते हैं. 

कब केवल धूप और खान-पान पर्याप्त हो सकते हैं?

इस बारे में मेदांता मेडिसिटी मूलचंद अस्पताल में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने बताया है. डॉ तरुण बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का Vitamin D  का लेवल 20–30 ng/mL के बीच है और कोई लक्षण नहीं हैं है तो रोज़ 15–30 मिनट धूप (चेहरा, हाथ और पैर खुले हों), सप्ताह में 4–5 दिन लेने से  लेवल मेंटेन रहता है. इसके साथ ही खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है. अपनी डाइट में अंडे की जर्दी मछली, फोर्टिफाइड दूध और मशरूम शामिल कर सकते हैं. 

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कब सप्लीमेंट (टैबलेट/कैप्सूल) की जरूरत पड़ती है?

Vitamin D का लेवल 20 ng/mL से कम हो, हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी या बार-बार गिरने की समस्या हो
ऑस्टियोपोरोसिस, बुजुर्ग, गर्भवती, मोटापा, किडनी या लिवर की बीमारी, या अवशोषण की समस्या (जैसे सीलिएक रोग) हो तो ऐसे मामलों में डॉक्टर Vitamin D3 की हाई डोज को कुछ सप्ताह तक देते हैं, फिर मेंटेनेंस डोज़ जारी रखते हैं. 

कब इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है?

इंजेक्शन हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होता. इसकी जरूरत तब पड़ सकती है जब गंभीर कमी हो (5 ng/dl) और तेजी से स्तर बढ़ाना जरूरी हो जाए. मरीज दवा निगल न सके. आंतों से विटामिन D का अवशोषण ठीक से न हो. डॉक्टर को लगे कि नियमित गोली लेने में कठिनाई होगी.

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क्या बिना जांच के Vitamin D लेना चाहिए?

डॉ तरुण बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति को बिना विटामिन- डी की जांच कराएं इसकी दवा या इंजेक्शन कुछ भी नहीं लेना चाहिए. ऐसा करने से किडनी स्टोन, कब्ज जैसी समस्या हो सकती है.  विटामिन डी की सामान्य सीमा लगभग 20 ng/mL से अधिक को स्वस्थ माना जाता है. 30 से 50 ng/mL को बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर ये 50  ng/mL से अधिक है तो इसको विटामिन डी टॉक्सिसिटी कहते हैं, जो सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. विटामिन डी के कम लेवल की बात करें तो अगर ये 20 ng/mL से कम है तो कमी माना जाता है और 12 ng/mL से नीचे हैं तो गंभीर कमी होती है. 

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