World Lung Cancer Day: क्या घर में जलने वाली अगरबत्ती का धुआं बढ़ा सकता है लंग्स कैंसर का खतरा? डॉक्टर से जानें सच

1 अगस्त को विश्व फेफड़ों के कैंसर दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करना है. हाल के वर्षों में फेफड़ों के कैंसर के नए पैटर्न सामने आए हैं, जिसमें धूम्रपान न करने वाले भी प्रभावित हो रहे हैं.

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स्मोकिंग के बिना भी लंग्स कैंसर का खतरा स्मोकिंग के बिना भी लंग्स कैंसर का खतरा

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST

दुनियाभर में 1 अगस्त को World Lung Cancer Day मनाया जाता है. इसका मकसद लोगों को कैंसर की बीमारी के बारे में जागरूक करना है. बीते कुछ सालों में लंग्स कैंसर का एक नया पैटर्न देखने को मिल रहा है. जो लोग सिगरेट नहीं पीते या किसी भी दूसरी तरह का धूम्रपान नहीं करते हैं उनको भी फेफड़ों का कैंसर हो रहा है. डॉक्टर इसके कई कारण बताते हैं. इनमें से एक अगरबत्ती का धुआं भी है. 

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डॉक्टर का कहना है कि देश के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण, लंबे समय तक मच्छर भगाने वाली कॉइल का घरों में यूज, सेकेंड हैंड स्मोकिंग और कुछ मामलों में जेनेटिक कारण भी कैंसर का ख़तरा बढ़ा सकते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन कारणों से हर व्यक्ति को कैंसर होगा, लेकिन लंबे समय तक लगातार संपर्क खतरे को बढ़ा सकता है. कुछ समय से देखा जा रहा है कि अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहना भी है खतरनाक साबित हो सकता है. यह भी लंग्स कैंसर का रिस्क बढ़ा देता है. 

अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहना कैसे है खतरनाक

यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अभिषेक यादव ने इस बारे में बताया है. डॉ अभिषेक बताते हैं कि धूम्रपान ना करने वाले लोगों में भी हम लंग्स कैंसर के केस देख रहे हैं. इनका एक बड़ा कारण वायु प्रदूषण है. अगरबत्ती के धुआं भी अंब एक बड़ा रिस्क फैक्टर बन रहा है.

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डॉ अभिषेक बताते हैं कि अगरबत्ती को बनाने में कई तरह के केमिकल का यूज किया जाता है. जब अगरबत्ती को जलाते हैं तो इसका धुआं सांस के जरिए फेफड़ों में जाता है. लंबे समय तक इसका एक्सपोजर लंग्स कैंसर के रिस्क को बढ़ा देता है.  ऐसे में यह जरूरी है कि लोग इस धुएं के संपर्क में आने से बचें. कोशिश करें की इसकी जगह घी का दीया, कपूर, और एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल करें. ये विकल्प बिना किसी हानिकारक धुएं के घर को महकाते हैं और सुरक्षित रहते हैं.

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शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं लोग

डॉ. अभिषेक बताते हैं कि लंग्स कैंसर के मामले में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग इस कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं. वह इसको सामान्य सर्दी-जुकाम या एलर्जी मानकर नजरअंदाज करते रहते हैं.लेकिन इनपर ध्यान देना जरूरी है. अगर खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक रहे, खांसी के साथ खून आए सांस फूलने लगे, बिना कारण वजन कम होने लगे, सीने में लगातार दर्द रहे, तो इसे सामान्य मानकर टालना नहीं चाहिए. इस मामले में तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए.

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डॉ. अभिषेक कहते हैं कि कुछ मामलों में लोग लंबे समय तक बनी हुई खांसी को नजरअंदाज करते रहते हैं. इसका सही डायग्नोज होना जरूरी है. इसको केवल टीबी या किसी एलर्जी का लक्षण ना समझें. इस मामले में कैंसर की स्क्रीनिंग भी जरूर कराएं. 
 

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