World Sight Day 2026: आंखों की रोशनी कमजोर होने का इंतजार न करें, ये लक्षण दिखें तो जरूर कराएं इलाज

World Sight Day 8 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आंखों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, WHO के अनुसार, दुनियाभर में 2.2 अरब लोग विजन इंपेयरमेंट से प्रभावित हैं, जिनमें से 1 अरब ऐसे हैं जिनका इलाज संभव था.

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आंखों का टेस्ट आंखों का टेस्ट

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:35 PM IST

शरीर के दूसरे अंगों की तरह आंखों की भी समय - समय पर जांच कराना जरूरी है. खासकर बच्चों में आंखों की रोशनी से जुड़ी परेशानी का समय रहते पता लगाना जरूरी है, क्योंकि कई बार बच्चे खुद यह नहीं बता पाते कि उनको आंखों की क्या परेशानी हो रही है. 

हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को World Sight Day मनाया जाता है. इस साल 8 अक्टूबर को मनाए जा रहे World Sight Day की थीम #LoveYourEyes है. इसका मकसद लोगों को आंखों की सेहत का ध्यान रखने के बारे में जागरूक करना है. WHO के मुताबिक, दुनियाभर में कम से कम 2.2 अरब लोग पास या दूर की चीजें देखने में परेशानी यानी विजन इंपेयरमेंट से प्रभावित हैं. इनमें कम से कम 1 अरब ऐसे मामले हैं, जिन्हें रोका जा सकता था या जिनका इलाज अब तक नहीं हुआ है.

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 आंखों की जांच क्यों जरूरी?

दिल्ली में वीटिरोरेटिनाक एंड फेको सर्जन डॉ. कुणाल राणा ने बताया कि वैसे तो आंखों की जांच सभी के लिए जरूरी है, लेकिन बड़ों की तुलना में बच्चों में आंखों की समस्या का आसानी से पता नहीं लग पाता है. कई बच्चे यह समझ ही नहीं पाते कि उनकी नजर सामान्य से कम है. ऐसे में वे किताब को बहुत पास लाकर पढ़ सकते हैं या अपनी आंखें सिकोड़कर देख सकते हैं या पढ़ाई में परेशानी महसूस कर सकते हैं. जिससे आंखों पर प्रेशर पड़ता है, इससे परेशानी और बढ़ सकती है. ऐसे में ये जरूरी है कि बच्चों की नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहें.  समय पर जांच होने से नंबर की समस्या का पता लगाया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक चश्मा या अन्य इलाज शुरू किया जा सकता है.

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डॉ कुणाल कहते हैं कि आंखों की ये परेशानियां अगर ठीक ना हो तो गंभीर रूप ले सकती हैं और कुछ मामलों में रोशनी जाने का कारण भी बन सकती है . इसलिए ये जरूरी है कि आंखों में परेशानी का कोई लक्षण दिखे तो इलाज कराएं. 

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ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं इलाज

आंखों की हर बीमारी शुरुआत में दर्द, लालिमा या धुंधला दिखने जैसे लक्षण नहीं देती. ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्याओं का शुरुआती चरण में पता लगाने के लिए आंखों की जांच महत्वपूर्ण है. अगर ये लक्षण दिख रहे हैं तो आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए. 

आंखों से पानी आना

आंखों का लाल होना

आंखों से धूंधला दिखना

नजर का कमजोर होना 
 

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