फूड रेगुलेटर FSSAI ने नेस्ले इंडिया पर एक्शन लिया है. मामला छोटे बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूला मिल्क से जुड़े प्रोडक्ट्स का है. FSSAI ने नेस्ले पर तीन कानूनी मामले भी शुरू किए हैं. आरोप है कि कुछ बेबी फूड प्रोडक्ट्स को लेकर विज्ञापन में गलत दावे किए गए हैं. इनमें नेस्ले का NAN एक्सेला प्रो स्टेज -1 और लैक्टोजेन प्रो 1 शामिल है. कई माता- पिता इन दोनों प्रोडक्ट को अपने बच्चों को देते हैं. जो महिलाएं बच्चे को दूध नहीं पीला पाती हैं वह इनका ज्यादा यूज करती हैं. अब FSSAI की कार्रवाई से बच्चों के इन फूड प्रोडक्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं.
इस बीच आपके लिए ये भी जानना जरूरी है कि आप अपने बच्चे को जो फॉर्मूला मिल्क दे रहे हैं वह उसको पच भी रहा है या नहीं इसका पता कैसे लगाएं? डॉक्टर बताते हैं कि जब महिलाओं को अपने बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराना संभव न हो, तभी इन फूड प्रोडक्ट्स का यूज करना ज्यादा बेहतर माना जाता है.. ये इसलिए दिए जाते हैं ताकि बच्चे को सही पोषण मिले उसको पानी मिलता रहे और उसका विकास भी सही तरीके से हो.
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फॉर्मूला इनटॉलरेंस को पहचानें
गाजियाबाद के जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. विपिनचंद्र उपाध्याय ने बताया कि फॉर्मूला मिल्क के न पचने को फॉर्मूला इनटॉलरेंस कहते हैं. इसका मतलब है कि आपके बच्चे को उस फॉर्मूला में मौजूद किसी चीज़ से एलर्जी है. इससे बच्चे के पाचन तंत्र में जलन या परेशानी हो सकती है. यह स्थिति जानलेवा तो नहीं है, लेकिन इससे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकती है और बच्चे का वजन व विकास धीमा हो सकता है.
डॉ विपिन बताते हैं कि फॉर्मूला मिल्क पीने वाले आधे बच्चों का फॉर्मूला माता-पिता जन्म के कुछ महीनों के भीतर ही बदल देते हैं.माता-पिता अक्सर अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए, दूध पिलाने के बाद बच्चों की सामान्य रिएक्शन को इनटॉलरेंस समझ लेते हैं. जबकि माता-पिता को यह पता होना चाहिए कि जैसे-जैसे बच्चों का पाचन तंत्र विकसित होता है, दूध पिलाने के बाद गैस बनना, रोना, दूध उगलना बिल्कुल सामान्य है. ये समस्याएं आमतौर पर जीवन के शुरुआती कुछ महीनों में ठीक हो जाती हैं, लेकिन बच्चे के फॉर्मूला के प्रकार को बार-बार बदलना समस्या को और बढ़ा सकता है.
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कैसे पहचानें कि बच्चे को है फॉर्मूला इनटॉलरेंस है?
डॉ विपिन के मुताबिक, अगर फॉर्मूला मिल्क पीने के बाद बच्चे में ये लक्षण दिख रहे हैं तो ये उसके न पचने का संकेत होते हैं.
दस्त (डायरिया)
उल्टी
बच्चे के मल में खून या बलगम आना
दर्द के कारण बच्चे का अक्सर अपने पैरों को पेट की ओर खींचना
वजन बढ़ने में कठिनाई या वजन का साफ तौर पर कम होना
लगातार रोना
बेचैनी होना
अगर फॉर्मूला से इनटॉलरेंस हो तो क्या करें
अगर आपके बच्चे को फॉर्मूला मिल्क से परेशानी है, तो अक्सर सिर्फ इसको बदलने से ही समस्या हल हो जाती है. अगर आपका बच्चा गाय के दूध से बने आयरन-युक्त फ़ॉर्मूला (जिसे अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स रिकमेंड करती है) पर बुरा रिएक्शन दे रहा है, तो सोया या चावल के प्रोटीन वाले फॉर्मूला पर स्विच करना फायदेमंद हो सकता है, ऐसे फॉर्मूला मिल्क भी मिलते हैं जिनमें प्रोटीन पहले से ही तोड़े जा चुके होते हैं (जिन्हें हाइड्रोलाइज़्ड फ़ॉर्मूला कहा जाता है) और ये विकसित हो रहे पाचन तंत्र के लिए बहुत आसान होते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि केवल विज्ञापन के आधार पर ही कोई भी फूड प्रोडक्ट खुद से बच्चे के लिए ना खरीदें. इस मामले में हमेशा डॉक्टर से सलाह लें
आजतक हेल्थ डेस्क