Actress Sanchita Ugale Suicide: एक्ट्रेस संचिता उगले ने 14 जून को मुंबई में 22 साल की उम्र में सुसाइड कर लिया. मौत से करीब 19 घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वह हंसती हुई दिखी थीं. फिर अचानक उनके सुसाइड की खबर आई. हालांकि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इस मामले ने एक बार फिर से यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि कम उम्र में लोग आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? क्या बाहर से खुश दिख रहा व्यक्ति भी सुसाइड जैसा कदम उठा सकता है?
देश में युवाओं में सुसाइड के बढ़ते मामलों का एक आंकड़ा भी आया है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, साल 2024 में 14,488 युवाओं ने आत्महत्या की, जो 2023 के मुकाबले 4.3% अधिक है. कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं जिसमें व्यक्ति सोशल मीडिया पर खुश नजर आ रहा है और फिर सुसाइड जैसा कदम उठा लेता है.
कम उम्र में आत्महत्या क्यों कर रहे लोग?
दिल्ली के Institute of Human Behaviour and Allied Sciences में मनोरोग विभाग में प्रोफेसर डॉ.ओमप्रकाश बताते हैं कि युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते मामलों के कई कारण हैं. युवाओं में अब मानसिक तनाव बढ़ रहा है. करियर की टेंशन, भविष्य की चिंता, बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा उनको मानसिक रूप से कमजोर बना रही है.
अब हर फील्ड में बहुत कंपीटिशन हो गया है. खुद को आगे बढ़ाने के चक्कर में युवा अपनी मेंटल हेल्थ भी दांव पर लगा रहे हैं. कई बार वह अपनी क्षमताओं से अधिक उम्मीदें पाल लेते हैं, लेकिन जब वह सफल नहीं हो पाते हैं तो डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं.
सोशल मीडिया के दौर में खराब हो रही मेंटल हेल्थ
डॉ ओमप्रकाश बताते हैं कि अब सोशल मीडिया का दौर है. फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपनी परेशानियां साझा करने वाला कोई नहीं है.अब युवा अपनी भावनाओं को अपने तक ही सीमित रखते हैं. कुछ तो अपनी समस्या CHAT-GPT से भी साझा करते हैं,लेकिन किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से नहीं. इस वजह से कई मामलों में व्यक्ति का दुख उसके अंदर ही रहता है और वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है.
क्या बाहर से खुश दिख रहा व्यक्ति भी सुसाइड कर सकता है?
डॉ. ओमप्रकाश बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति सुसाइड तब करता है जब उसको लगता है कि जीवन के सभी रास्ते खत्म हो चुके हैं. अब कुछ बचा नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति आपको हमेशा दुखी ही नजर आएगा. कुछ मामलों में बाहर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर वह काफी परेशान होता है. अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं करता है. ऐसा व्यक्ति भी डिप्रेशन का शिकार हो सकता है. डिप्रेशन आत्महत्या का प्रमुख कारण है.
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डिप्रेशन कैसे बनता है आत्महत्या का कारण
गाजियाबाद के जिला अस्पताल में मनोरोग विभाग में डॉ. ए.के विश्वकर्मा Aajtak.in से बातचीत में बताते हैं कि दिमाग में केमिकल इंबैलेंस की वजह से डिप्रेशन होता है. डिप्रेशन की भी कई स्टेज होती हैं. शुरुआत में मानसिक सेहत बिगड़ती है. इंसान का किसी काम में मन नहीं लगता, वह अकेले रहना पसंद करता है और चिड़चिड़ा हो जाता है. अगर इस दौरान सेहत पर ध्यान न दें तो डिप्रेशन बढ़ने लगता है और वह अपने आखिरी स्टेज में चला जाता है.
डिप्रेशन की आखिरी स्टेज में सोचने- समझने की क्षमता कम होने लगती है. व्यक्ति को अपना जीवन बेकार लगने लगता है. वह खुद को खत्म करने की सोचता है और इसी क्रम में आत्महत्या कर लेता है. हालांकि ऐसा एक दिन में नहीं होता है. आत्महत्या की सोच धीरे- धीरे दिमाग में बनती है. अधिकतर मामलों में इसके लक्षण भी दिखते हैं.
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कैसे पता चलता है कि कोई आत्महत्या कर सकता है
खुद को हमेशा अकेला महसूस करना
नींद में कमी
पहले की तुलना में भूख कम या ज्यादा लगना
दिमाग में हमेशा गलत चीजें आना
खुद से प्यार खत्म होना
हमेशा सुस्त रहना
दिमाग में आत्महत्या की सोच आना
सुसाइड से कैसे बचा जा सकता है
डॉ. एके बताते हैं कि अगर आपके आसपास किसी व्यक्ति में आपको ये सब लक्षण दिख रहे हैं तो यह संकेत है कि वह आत्महत्या कर सकता है. इस स्थिति में सबसे पहले जरूरी है कि आप उसकी परेशानी को सुनें और समझें. इस मामले में मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह भी जरूर लें. समय पर संकेतों की पहचान और इलाज से व्यक्ति को सुसाइड से बचाया जा सकता है.
टेली मानस की लें मदद
डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अगर आपको मेंटल हेल्थ से संबंधित कोई भी समस्या है तो इसके लिए आप टेली मानस की मदद ले सकते है. यह भारत सरकार की एक राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य पहल है. इसका उद्देश्य देश के लोगों को 24 घंटे और सातों दिन फ्री मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करना है. इसमें आपकी पहचान और पूरी बातचीत को भी गोपनीय रखा जाता है.
हेल्पलाइन नंबर: 14416 या 1800-891-4416
अभिषेक पांचाल