सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि हाल ही में स्पेन में दाखिल होने वाले शरणार्थियों को भगाने के लिए वहां की सेना ने उन पर सुअर के मांस के टुकड़े फेंके.
दरअसल, हाल ही में स्पेन के स्यूटा शहर में दाखिल होने की कोशिश में 60 से भी ज्यादा घुसपैठियों की मौत हो गई थी. इसी संदर्भ में वायरल वीडियो शेयर हो रहा है.
वीडियो में एक आर्मी जीप खड़ी दिखती है जिस पर 'बेकन स्क्वाड' लिखा है. पास ही खड़े फौजी एक ट्रे पकड़े हुए हैं जिसमें मांस के टुकड़े रखे हैं. कुछ ही पलों बाद ये फौजी, मांस के टुकड़े वहां मौजूद भीड़ की तरफ फेंकने लगते हैं. इससे लोगों में भगदड़ मच जाती है.
एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, "स्पेन में घुसे अवैध घुसलमानो पर स्पेन की सेना ने सूअर के मांस की बौछार कर दी... जिसके बाद घुसपैठियों में भगदड़ मच गयी.. गज़ब आईडिया निकाला है BOSS."
इंडिया न्यूज जैसे कुछ न्यूज आउटलेट्स ने भी इस वीडियो को असल खबर की तरह चलाया.
लेकिन आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बना है. ये किसी असली घटना को नहीं दिखाता.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
हमने स्पेन की सेना की वर्दी की तुलना वायरल वीडियो वाले फौजियों की वर्दी से की. दोनों का फर्क साफ पता लग रहा है.
वीडियो में जब फौजी सुअर के मांस के टुकड़े फेंकते हैं, तो उनमें से कई हवा में ही गायब हो जाते हैं.
हमें स्पेन की किसी विश्वसनीय न्यूज वेबसाइट पर ऐसी किसी घटना से संबंधित खबर नहीं मिली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड्स पर हमें वायरल वीडियो का एक ऐसा वर्जन मिला जिस पर "@k.l.3_26" नाम के टिकटॉक अकाउंट का वॉटरमार्क नजर आ रहा है. इस अकाउंट ने ये वीडियो 31 जुलाई को पोस्ट किया था. यहां वीडियो के साथ एआई डिस्क्लेमर भी है. मतलब ये एआई से बना है. पोस्ट के कैप्शन में "#humor" (मजाक) भी लिखा है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना वजह
'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की 2 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में स्पेन के स्यूटा शहर में मोरोक्को से तकरीबन 60,000 घुसपैठिये दाखिल हो गए थे. हालांकि बाद में इनमें से करीब 48,000 लोग मोरोक्को वापस चले गए. इस मामले में मोरोक्को पर जानबूझकर अपनी सीमा पर सुरक्षा कमजोर रखने का आरोप लगा है. स्पेन के सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी इतने बड़े माइग्रेशन की वजह बना, जिसमें कहा गया था कि अगर कोई समुद्र के रास्ते स्पेन की सीमा में घुस जाए तो उसे बिना कानूनी प्रक्रिया के तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता.
ज्योति द्विवेदी