मलयालम सिनेमा और रंगमंच की दिग्गज अदाकारा सावित्री श्रीधरन का निधन हो गया है. कोझिकोड स्थित अपने घर में उन्होंने अंतिम सांस ली. वह 83 साल की थीं और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं. सावित्री के जाने से मलयालम फिल्म और थिएटर जगत में शोक की लहर है.
‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ की जमीला ने घर-घर बनाई पहचान
सावित्री श्रीधरन को नई पीढ़ी के दर्शक 2018 की फेमस मलयालम फिल्म ‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में जमीला के किरदार के लिए खास तौर पर याद करेंगे. उनका किरदार बेहद सादगी भरा था, लेकिन उनकी अदाकारी ने स्क्रीन पर ऐसी गर्मजोशी पैदा की कि जमीला ‘उम्मा’ बनकर दर्शकों के दिल में उतर गईं.
इस भूमिका के लिए सावित्री को केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का सम्मान मिला. इतना ही नहीं, उन्हें 66वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल मेंशन भी मिला.
दिलचस्प बात ये है कि जिस फिल्म ने उन्हें सिनेमा के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया, उससे पहले सावित्री दशकों तक थिएटर की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी थीं.
चार दशक से ज्यादा रंगमंच को दिए
फिल्मों में आने से बहुत पहले सावित्री श्रीधरन प्रोफेशनल थिएटर का जाना-पहचाना नाम थीं. उन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक मलयालम रंगमंच पर काम किया और कोझिकोड की कई प्रमुख थिएटर कंपनियों से जुड़ी रहीं. कालींगा, संगमम, स्टेज इंडिया और चिरंथना थिएटर्स जैसी संस्थाओं के साथ उन्होंने काम किया.
उनकी थिएटर यात्रा भी पुरस्कारों से भरी रही. उन्हें केरल सरकार के थिएटर पुरस्कार मिले और 2009 में केरल संगीत नाटक अकादमी का ड्रामा अवॉर्ड भी मिला. 1993 में ‘राजसभा’ के ‘आइशाकुट्टी’ किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राज्य पुरस्कार मिला था.
फिल्मों में देर से आईं, लेकिन छा गईं
सावित्री ने 1991 में एमटी वासुदेवन नायर की फिल्म ‘कडवु’ से फिल्मों में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने ‘वालियांगडी’, ‘डाकिनी’, ‘वायरस’, ‘इट्टिमानी: मेड इन चाइना’, ‘पड़ा’ और ‘पप्पन’ जैसी फिल्मों में काम किया. लेकिन असली पहचान ‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ ने दी.
यानी चार दशक से ज्यादा थिएटर में पसीना बहाने वाली एक अदाकारा को फिल्मों में वह पहचान जिंदगी के काफी बाद मिली, जिसकी वह हकदार थीं. और जब मिली, तो जमीला का किरदार सीधे दर्शकों के दिल में उतर गया.
मंत्री टी सिद्दीकी ने दी श्रद्धांजलि
सावित्री के निधन पर मंत्री टी सिद्दीकी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए शोक जताया. उन्होंने लिखा कि थिएटर और सिनेमा दोनों में अपनी अलग पहचान बनाने वाली इस प्रिय कलाकार का जाना मलयालम कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.
सावित्री श्रीधरन का जाना सिर्फ एक अभिनेत्री का चले जाना नहीं है. यह उस पीढ़ी की एक और मजबूत आवाज का खामोश हो जाना है, जिसने मंच को अपना घर बनाया और बाद में कैमरे के सामने भी अपनी सादगी से लाखों दिल जीत लिए. जमीला अम्मा का किरदार पर्दे पर खत्म हो गया, लेकिन उसकी गर्माहट शायद दर्शकों की यादों में लंबे समय तक जिंदा रहेगी.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क