दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज कई साल अटके रहने के बाद शुक्रवार को अचानक से ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी. अभी फिल्म का माहौल बनना शुरू ही हुआ था कि 48 घंटों के अंदर, संडे शाम को सतलुज जी5 से हट भी गई. प्लेटफॉर्म ने दर्शकों के लिए एक स्टेटमेंट जारी कर दिया कि 'मौजूदा डेवलपमेंट्स' को देखते हुए फिलहाल इंडिया में सतलुज की स्ट्रीमिंग रोक दी गई है.
बनकर तैयार होने के बाद कई सालों तक गायब रही सतलुज का इस तरह अचानक दिखना और फिर गायब हो जाना एक बड़े विवाद की वजह बन चुका है. रिपोर्ट्स में सामने आया है कि जी5 को फिल्म हटाने का निर्देश भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने दिया था.
अब MIB ने सतलुज के कंटेंट की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी बना दी है. लेकिन पहले पंजाब 95 कही जा रही सतलुज को, थोड़ी देर के लिए ही, जनता के सामने आने के लिए एक बहुत लंबी और थकाऊ लड़ाई लड़नी पड़ी थी. डायरेक्टर हनी त्रेहान ने अलग-अलग इंटरव्यू में इस लड़ाई के बारे में बातें की हैं, जिसकी पूरी कहानी कुछ इस तरह है:
डायरेक्टर हनी त्रेहान ने जनवरी 2022 में दिलजीत के साथ ये फिल्म शुरू की थी जिसे तब पंजाब 95 कहा जा रहा था. उन्होंने दिसंबर तक फिल्म पूरी करके सर्टिफिकेट के लिए CBFC के सामने भेज दी.
हनी ने पिछले साल न्यूजलॉन्ड्री को एक बातचीत में बताया था कि बोर्ड ने पहली बार में आधे घंटे देखने के बाद फिल्म रोक दी और इसे 'पंजाबी फिल्म' बताते हुए कहा कि 'आपको हिंदी का सर्टिफिकेट क्यों चाहिए?'
एक हफ्ते बाद बोर्ड ने पूरी फिल्म देखकर कहा कि इसमें कुछ समस्याएं हैं और इसे 13 सदस्यों की रिवाइजिंग कमेटी के सामने भेज दिया. कमेटी ने जनवरी अंत (2023) में फिल्म देखी और उसमें 21 बदलाव सुझाए. इसमें से कुछ सुझाव थे— जसवंत सिंह खालड़ा का नाम बदलना, जिनपर पूरी कहानी बेस्ड है, और इसे 'सत्य घटना पर आधारित फिल्म' न कहना.
मेकर्स ने फरवरी में बोर्ड को अपना रिस्पॉन्स भेज दिया कि वे इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें इन सुझावों में कोई लॉजिक नहीं नजर आ रहा. मार्च, अप्रैल और मई में बोर्ड की तरफ से कोई रिस्पॉन्स न आने पर मेकर्स ने जून में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 30 जुलाई तक CBFC ने 4 वकील बदले.
हनी ने बताया कि उनमें से एक तो कोर्ट की तारीख पर इसलिए नहीं पहुंचे क्योंकि उस दिन वो रिटायर हो रहे थे. इसपर जज ने कहा, 'उन्हें क्या पिछली रात को फोन आया था? उन्हें एक महीने पहले तो पता ही रहा होगा कि इस तारीख को वो रिटायर हो रहे हैं!'
हनी ने बताया, 'वो कानूनी तौर पर कोई तर्क कर ही नहीं सकते थे क्योंकि सबकुछ (जसवंत के केस में) कोर्ट में दिए गए बयानों और कोर्ट की कार्रवाई पर बेस्ड है.' हनी ने बताया कि चौथे वकील के सवाल देखकर लॉर्डशिप ने उन्हें फिल्म देखकर आने को कहा और उन्होंने खुद भी फिल्म देखने की डिमांड की. हनी ने दोनों को फिल्म की कॉपी दी.
अगली सुनवाई पर उस वकील ने कोर्ट में कहा 'मैंने कल रात को फिल्म देखी और ये इतनी डिस्टर्बिंग थी कि पूरी रात नींद नहीं आई.' जज साहब ने भी बताया कि फिल्म देखकर उनकी भी नींद उड़ गई. वकील ने आगे कहा कि उन्हें इस फिल्म से अलगाववादी या खालिस्तान आंदोलन को हवा मिलने, युवाओं का गुस्सा भड़कने जैसे डर हैं.
इसपर जज ने कहा 'हम दोनों ने एक ही फिल्म देखी है न. फिल्म पर हम दोनों की राय इतनी अलग कैसे हो सकती है.' ये इशारा करते हुए कि उन्हें फिल्म में ऐसा कुछ नहीं दिखा. जबकि वकील ने कहा कि 'उनके अनुमान बहुत मजबूत हैं'. जज ने जवाब दिया कि 'कोर्ट अनुमानों पर कबसे सुनवाई करने लगे?'
वकील ने कहा कि उन्हें फिल्म से 'पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है.' हनी ने बताया, 'जज साहब ने उन्हें बड़ी शांति से सुनते हुए कहा- आप कहते हैं तो मैं मान सकता हूं कि पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है. लेकिन ये CBFC की चिंता का विषय कबसे हो गया? ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, CBFC का काम तो सर्टिफिकेट देना है.'
इसके बाद वकील ने कोई तर्क नहीं दिए मगर एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही, 'सिर्फ CBFC ही नहीं, सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी फिल्म से समस्या है.'
हनी ने बताया, 'इसपर लॉर्डशिप ने कहा कि पहले ये बताइए मंत्रालय को फिल्म दिखाई किसने? जब फिल्म को सर्टिफिकेट ही नहीं मिला तो ये किसी को भी कैसे दिखाई जा सकती है? भारत में CBFC का गठन किसलिए हुआ था?'
हनी ने आगे कहा, 'इसपर लॉर्डशिप ने कहा कि CBFC का गठन एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर क्रिएटिव राइट, फ्रीडम ऑफ स्पीच, आर्टिस्ट के हितों की रक्षा के लिए और फिल्मों की सार्थकता बनाए रखने के लिए हुआ था और उनकी राय किसी भी तरह से सत्ता में बैठी सरकारों के हिसाब से नहीं होनी चाहिए.' उसी दिन शाम को 4 बजकर 30 मिनट के आसपास जज ने कहा कि उनकी राय में इस फिल्म को बिना किसी कट के रिलीज होना चाहिए और अभी इस मामले की एक सुनवाई बाकी थी.
हाईकोर्ट में उसी शाम को लगभग 6 बजकर 30 मिनट पर प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला को दिल्ली से फोन आया. वो दिल्ली गए और वहीं से उन्होंने हनी को कॉल पर बताया, 'अब हम हाईकोर्ट में ये केस आगे नहीं लड़ सकते, हमें केस वापस लेना पड़ेगा. हम अब किसी भी कीमत पर टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्म का प्रीमियर नहीं कर सकते और हमें 21 कट्स के साथ आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट करना होगा.'
हनी ने बताया कि उन 21 कट्स के साथ नई डीसीपी (फिल्म का रिलीज पैकेज) तैयार किया गया और फिर से CBFC को भेजा गया. उन्होंने नई आपत्तियां भेज दीं और 35 कट्स की डिमांड की. उन्होंने बोर्ड की बात पर अमल करते हुए 35 कट्स के साथ नई डीसीपी भेज दी मगर ये खेल बढ़ता ही चला गया— नई डीसीपी भेजने पर 45 कट्स की मांग की गई, फिर 65 कट, फिर 85 कट.
हनी ने कहा, '85 कट्स के साथ भी मैं राजी हो गया क्योंकि मुझे बोला गया था कि इससे सर्टिफिकेट मिल जाएगा. हमें हर बार बोला गया कि अब CBFC के चेयरमैन फिल्म देखेंगे और सर्टिफिकेट जारी कर देंगे.' उन्होंने बताया कि ये सबकुछ होता रहा मगर तब तक चेयरमैन ने फिल्म देखी ही नहीं थी. 85 कट्स के बाद चेयरमैन ने फिल्म देखी. हनी बताते हैं, 'मैं थिएटर के बाहर ही बैठा था, वो मुझे इग्नोर करके आगे बढ़ गए और रिवाइजिंग कमेटी के साथ चले गए.'
हनी ने ये भी बताया कि ये सब होने के बीच उन्होंने CBFC को 1800 पन्नों का एक डॉक्यूमेंट भी दिया था जिसमें ये डिटेल्स थीं कि कैसे फिल्म का हर सीन कानूनी सुनवाई पर बयानों पर बेस्ड है. रिवाइजिंग कमेटी के साथ चेयरमैन ने ये डॉक्यूमेंट देखा और फिल्म देखकर उन्हें एहसास हुआ कि ये सच्ची घटनाओं पर बेस्ड है. हनी ने जब उनसे पूछा कि वो इसपर क्या कहना चाहेंगे, तो जवाब मिला— 'त्रेहान, आज के वक्त में इतना चिल्लाकर सच कौन बोलता है?'
हनी ने बताया कि चेयरमैन के फिल्म देखने के बाद एक महीने कुछ नहीं हुआ. फिर उनसे 16 नए बदलाव करने को कहा गया, जिससे फिल्म में 37 नए कट लगे. यहां तक फिल्म में लगे टोटल कट्स की गिनती 127 हो चुकी थी. हनी ने बताया, 'फिर मैंने फैसला किया कि अब मैं सारे कट कैंसिल कर रहा हूं और अब जब भी आएगी, पूरी फिल्म आएगी, वरना नहीं आएगी, कोई बात नहीं.' हनी के अलग-अलग इंटरव्यूज से हिसाब लगाएं तो CBFC से उनकी ये आखिरी बातचीत दिसंबर 2024 में हुई थी.
द हॉलीवुड रिपोर्टर को हनी ने बताया कि तब मेकर्स इसकी इंटरनेशनल रिलीज का प्लान बना रहे थे. हनी ने ये नहीं बताया कि कहां से उन्हें ये मैसेज मिला, मगर कहा गया— 'दिल्ली में चुनाव होने ही वाले हैं, अभी ऐसा मत कीजिए. हम आपको बता देंगे कि आप कब रिलीज कर सकते हैं.' इसी के बाद कहीं से कोई जवाब नहीं मिला और तब रॉनी स्क्रूवाला ने तय किया कि अब सीधा डिजिटल प्रीमियर करना ही एक सही रास्ता है.
हनी ने बताया कि पंजाब 95 टाइटल के लिए उन्हें कभी ऑफिशियल क्लीयरेंस नहीं मिली थी. इसलिए सतलुज टाइटल पर भी वो विचार कर ही रहे थे, लेकिन किसी और ने '1995' से मिलता-जुलता एक टाइटल पहले से रजिस्टर करवा रखा था. इसलिए एक और लड़ाई से बचने के लिए प्रोडक्शन हाउस ने सतलुज टाइटल पहले ही रजिस्टर करवा लिया था. ऊपर से ये टाइटल फिल्म की आत्मा और स्पिरिट के हिसाब से भी जम रहा था. यानी टाइटल बदलने की चॉइस पूरी तरह उनकी ही थी.
रॉनी की कंपनी RSVP और जी5 की जोड़ी मजबूत रही है. दोनों ने बतौर पार्टनर सोनचिड़िया और केदारनाथ जैसी फिल्मों पर भी काम किया है. हनी ने बताया कि ज़ी को फिल्म बहुत पसंद आई और उन्होंने तय कर लिया कि फिल्म को रिलीज करना ही है. दोनों कंपनियों ने बंद दरवाजों के पीछे रिलीज का पूरा मजबूत प्लान बनाया.
हनी को भी सतलुज की फाइनल रिलीज से पहले ही इस बातचीत में शामिल किया गया. केवल दिलजीत को ही शुरू से पूरी जानकारी थी. हनी ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को शाम 6 बजे भी टीम को मैसेज किया था कि 'ये आज रात सच में हो जाएगा न?' इसपर उन्हें जवाब सीधा दिलजीत की तरफ से आया— 'पाजी, आज रात सच में फिल्म आ जाएगी.'
शुक्रवार को सच में सतलुज ओटीटी पर आ गई, लेकिन 48 घंटे के अंदर हटा भी दी गई. दिलजीत ने सोशल मीडिया पर पहले ही अंदेशा जता दिया था कि ये हो सकता है. इसलिए उन्होंने फैंस से फिल्म देखने और डाउनलोड कर डालने को भी कहा था. जी5 से सतलुज के हटने से दुखी होने की बजाय दिलजीत खुश हैं कि फिल्म अब जनता के बीच है.
हनी त्रेहान, मेकर्स और जी5 फिर से फिल्म के वापस रिलीज होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन क्या अब जनता फिर से बिना कट्स, वही ओरिजिनल सतलुज देख पाएगी जो कुछ लोग देख चुके हैं? इसका जवाब आने वाले वक्त में ही मिलेगा.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क