तीन दशकों तक तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रहे थलपति विजय का तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनना, राजनीति की किताबों में एक ऐतिहासिक क्षण बनकर दर्ज हुआ. मगर उनका सिनेमा के पर्दे से उतरकर राजनीति के मंच पर चढ़ना साउथ सिनेमा के फैंस के लिए एक नए सवाल की वजह भी बना― तमिल सिनेमा में विजय के बाद अगला सुपरस्टार कौन होगा?
रजनीकांत के बाद विजय ही तमिल सिनेमा के दूसरे बड़े सुपरस्टार बने थे. पिछले डेढ़ दशकों में तो उनका कद रजनीकांत के बराबर आंका जाने लगा था, बीच में कई बार तो बॉक्स ऑफिस पर ‘थलपति’ का कद ‘थलाइवा’ से भी ऊंचा आंका गया था. लेकिन उधर विजय सिनेमा से दूर हुए, और इधर करुप्पु की ब्लॉकबस्टर सक्सेस ने सूर्या को ‘सुपरस्टार’ टैग का अगला दावेदार घोषित कर दिया है. लेकिन विजय और सूर्या के बीच शिफ्ट हुए सुपरस्टार टैग की कहानी में एक बहुत दिलचस्प संयोग भी छुपा है.
स्टार्स का सुपरस्टार हो जाना, किसी एक धमाकेदार सिनेमाई मोमेंट पर निर्भर होता है. बॉलीवुड में रणबीर कपूर के लिए वो मोमेंट एनिमल की सक्सेस है और रणवीर सिंह के लिए धुरंधर का धमाका. इसी तरह तमिल सिनेमा में विजय के लिए वो मोमेंट थी ए आर मुरुगदास की फिल्म थुपक्की (2012).
2000s से ही अगले बड़े स्टार की तरह देखे जा रहे विजय ने 2012 में पहली बार वर्ल्डवाइड 100 करोड़ ग्रॉस का आंकड़ा पार किया था― 3 इडियट्स के तमिल रीमेक नानबान से. लेकिन इस सक्सेस का क्रेडिट ऑरिजिनल फिल्म की पॉपुलैरिटी को ज्यादा दिया गया. रीमेक या सीक्वल फिल्मों से स्टारडम का असली मीटर नहीं नापा जाता. अगर ऑरिजिनल कहानी से कोई यंग स्टार धमाकेदार लेवल की हिट निकाल दे, तो माना जाता है कि लड़का मजबूत है.
विजय ने ये साबित किया ए आर मुरुगदास की फिल्म थुपक्की (2012) से. ये वही कहानी है जिससे मुरुगदास ने हिंदी में अक्षय कुमार की हॉलिडे (2014) बनाई थी. इस ऑरिजिनल कहानी को विजय के स्टारडम ने ब्लॉकबस्टर बनाया और फिर से 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर डाला. तमिल फिल्म इंडस्ट्री में उनका भौकाल जम गया.
थुपक्की से जब विजय आगे निकले तो 90s में आए उनके कई साथी तमिल स्टार्स, अगला सुपरस्टार कहलाने की रेस में पिछड़ गए थे. उनमें अजित कुमार और विक्रम तो थे ही, सूर्या भी थे. इन सबमें सबसे पहले 100 करोड़ का आंकड़ा सूर्या ने ही पार किया था. विजय की थुपक्की से पहले तक सिंघम और गजनी जैसी फिल्मों से सूर्या मास स्टार भी बन रहे थे. लेकिन एक दिन थुपक्की आई और सुपरस्टारडम का पूरा गेम विजय के हाथों में सौंप दिया.
दिलचस्प ये है कि थुपक्की पहले सूर्या के ही पास गई थी. लेकिन गजनी के बाद सूर्या को लगा कि अब उन्हें फिर से मुरुगदास नहीं, किसी नए डायरेक्टर के साथ काम करना चाहिए. इस चक्कर में थुपक्की जैसी शानदार फिल्म सूर्या के हाथों से निकलकर विजय के पास चली गई. कई लोगों ने कहा कि सूर्या ने विजय को फिल्म नहीं, अपना गुडलक दे दिया. इसके बाद सूर्या कभी विजय की बराबरी तो दूर, उनके आसपास भी नहीं पहुंचे.
सूर्या को अब जाकर करुप्पु से मौका मिला है, जिसने वर्ल्डवाइड 300 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर डाला है. ये सूर्या के करियर का सबसे बड़ा कलेक्शन है. उन्होंने पहली बार 200 करोड़ और 300 करोड़ का आंकड़ा पार किया है. लेकिन ये सब तब हुआ है जब विजय एक्टिंग से विदा ले चुके हैं और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनकर, परमानेंट पॉलिटिशियन बन चुके हैं. और दिलचस्प ये है कि सूर्या की ब्लॉकबस्टर करुप्पु, असल में विजय की छोड़ी हुई फिल्म है.
करुप्पु के डायरेक्टर आर जे बालाजी ने हाल ही में बताया कि उनकी ये स्क्रिप्ट असल में पॉलिटिक्स में डेब्यू से पहले विजय की आखिरी फिल्म होने वाली थी. लेकिन जब विजय को अपना शेड्यूल फंसता दिखा तो उन्होंने जन नायगन को ही अपनी आखिरी फिल्म बनाया और करुप्पु छोड़ने का फैसला किया. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, डायरेक्टर बालाजी ने कहा कि विजय ने फिल्म जरूर छोड़ी, मगर उनके पूछे सवालों से स्क्रिप्ट में जो बदलाव हुए, वो आज फैंस में सबसे पॉपुलर सीन साबित हो रहे हैं.
यानी विजय ने सिर्फ करुप्पु नहीं छोड़ी, सूर्या को जैसे वो लकी चार्म लौटा दिया, जो उन्हें सूर्या से थुपक्की के टाइम मिला था. दिलचस्प ये है कि दिन में फिल्मों के केवल चार शोज चलाने की ही इजाजत रखने वाले तमिलनाडु के थिएटर्स को विजय ने करुप्पु के 5 शोज चलाने की अनुमति मुख्यमंत्री बनते ही दे दी थी.
ऑफस्क्रीन सूर्या और विजय बहुत अच्छे दोस्त भी हैं. दोनों ने दो फिल्मों नेरुक्कु नेर (1997) और फ्रेंड्स (2001) में साथ काम किया था. तभी से दोनों में अच्छी दोस्ती है. विजय के फैन क्लब्स भी सूर्या को बहुत सपोर्ट करते हैं. अब विजय के बड़े पर्दे से हटने के बाद सूर्या ही इन फैंस के नए हीरो हैं और करुप्पु की सक्सेस इसका सबसे बड़ा सबूत है. देखा जाए तो जैसे सूर्या ने थुपक्की से विजय को सुपरस्टारडम का चार्म दिया था, अब विजय ने करुप्पु से वो पूरा हिसाब बराबर कर दिया है.
सुबोध मिश्रा