दिवाली पर धमाल मचाने आ रहे तमिल सुपरस्टार सूर्या, निभा रहे रियल लाइफ हीरो का किरदार

सूर्या ने कहा- अगर मैं अपनी बात करूं तो मुझे हिंदी सिनेमा बहुत पसंद है. मुझे हिंदी फिल्में देखना और करना भी पसंद है. इससे पहले डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने मुझसे रक्त चरित्र में काम करवाया भी है, जो फिल्म तमिल और हिंदी दोनों में रिलीज हुई थी. तो कुल मिला कर मैं हिंदी सिनेमा से थोड़ा-थोड़ा वाकिफ भी हूं. लेकिन अभी ये कह पाना मुश्किल है कि मौजूदा टाइम में हिंदी सिनेमा में क्या चल रहा है उसके लिए मुझे थोड़ा समझना होगा.

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सुपरस्टार सूर्या सुपरस्टार सूर्या

अनुराग गुप्ता

  • मुंबई,
  • 12 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार सूर्या एक बार फिर अपने फैंस के लिए इस दिवाली लेकर आ रहे है एक रियल लाइफ कहानी पर बेस्ड फिल्म "सुरराई पोतृ". इस फिल्म में सूर्या निभाने जा रहे है भारत की एक मात्र किफायती एयर लाइन्स के फाउंडर गोपीनाथ का किरदार.  आजतक से खास बातचीत में सूर्या ने बताया कि हिंदीं फिल्मों से जुड़ा उनका अनुभव और फिल्म सुरराई पोतृ से जुड़ी कई अहम बातें.

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तमिल फिल्म "सुरराई पोतृ" को हिंदी में रिलीज होने पर क्या है सूर्या की राय?

अगर मैं अपनी बात करूं तो मुझे हिंदी सिनेमा बहुत पसंद है. मुझे हिंदी फिल्में देखना और करना भी पसंद है. इससे पहले डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने मुझसे रक्त चरित्र में काम करवाया भी है, जो फिल्म तमिल और हिंदी दोनों में रिलीज हुई थी. तो कुल मिला कर मैं हिंदी सिनेमा से थोड़ा-थोड़ा वाकिफ भी हूं. लेकिन अभी ये कह पाना मुश्किल है कि मौजूदा टाइम में हिंदी सिनेमा में क्या चल रहा है उसके लिए मुझे थोड़ा समझना होगा.
 
वैसे मैं हिंदी सीखने की भी कोशिश कर रहा हूं और रही बात फिल्म सुरराई पोतृ की तमिल के आलावा हिंदी में रिलीज होने की तो अगर ऐसा होता है तो बहुत अच्छा होगा.  क्योंकि मेरे हिसाब से ये कहानी सबको जाननी चाहिए और प्रेरणा लेनी चाहिए ऐसी फिल्मों से. फिल्म "सुरराई पोतृ" में बतौर एक्टर और बतौर प्रोडूसर जुड़े होने के नाते मैं यही चाहूंगा कि यह फिल्म हिंदी में भी रिलीज हो.  मैं सबसे यही कहूंगा कि इस फिल्म को एक बार जरूर देखें जो आपके लिए अमेजन प्राइम पर अवलेबल होगी 12 नवंबर को. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मेरी इस फिल्म का रिलीज होना मेरे लिए भी एक नया अनुभव होगा. इस बार हम थियेटर के माध्यम से दर्शकों को अपने पास नहीं बुला रहे है बल्कि खुद ओटीटी प्लेटफॉर्म के जरिये अपने दर्शकों के पास पहुंच रहे है. यही फर्क है ओटीटी और थियेटर में फिल्मों के रिलीज होने का.

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किरदार के लिए कितनी करनी पड़ी मेहनत कौन है सूर्या की रिंग मास्टर?

ये एक आदमी की कहानी है, जिसने अपने देश के लिए एक बड़ा सपना देखा था. मुझे योग करना पसंद है और मैं अपने आपको फिट करने के लिए व्यायाम करता हूं तो मैंने इस फिल्म में अपने रोल पर भी बहुत काम किया है. मैं फिल्म में एक कॉलेज गोइंग लड़का भी बना हूं और जवानी से लेकर बुढ़ापे तक का किरदार मैंने निभाया है और ये सब मेरी फिटनेस की वजह से पोसिबल हो पाया. सबसे बड़ा योगदान मेरी रिंग मास्टर फिल्म की डायरेक्टर सुधा गोनकरा की वजह से परफेक्ट हो पाया. क्योंकि इस रियल कहानी को सिनेमा की शक्ल में दिखाना था तो हमने कई सारे रियल इंसिडेंट यूज किये जो कैप्टेन गोपीनाथ जी की जिन्दगी से जुड़े थे ताकि कहानी में कुछ भी फिल्मी न दिखे और आप भी फिल्म देखते वक्त उस किरदार से जुड़ सकें. यकीन मानिये ये फिल्म आपको जरूर प्रेरित करेगी.

एक मास हीरो होने के नाते रियल लाइफ कैरेक्टर बेस्ड किरदार निभाना कितना मुश्किल रहा?

देखिये ये ठीक वैसा ही है जैसा कोई बच्चा स्कूल से कॉलेज और फिर अपने जीवन का सफर तय कर आगे बढ़ता है. मैंने 3 साल गवर्नमेंट कंपनी में काम किया, फ्लोर इंचार्ज बना, मेरी पहली सैलरी 7 हजार रूपए थी. मुझे भले ही आज 20 साल हो गए हों इस इंड्रस्ट्री में लेकिन आज भी मैं अपने आपको 1 महीने पुराना ही एक्टर समझता हूं और किसी भी किरदार को निभाने के लिए उसी हिसाब से तैयारी भी करता हूं.  तो फिल्में चाहे मास ऑडियंस के लिए हो या सलेक्टेड एक अभिनेता और नए काम को सीखने की चाह रखते हुए फिल्में कर रहा हूं. उम्मीद करता हूं कि जो प्यार दर्शकों ने मुझे दिया है वो लगातार मुझपर बरसता रहे और मैं उनको एंटरटेन करता रहूं.

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