पिछले साल जनवरी में बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान पर, मुंबई के उनके ही घर में चाकू से हमला हुआ था. उनके घर में घुसे एक चोर ने चोरी की कोशिश में उन पर चाकू से हमला कर दिया था.
इस हमले में सैफ को कई गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था. तब से सैफ कई बार उस खौफनाक रात को याद कर चुके हैं. लेकिन अब उन्होंने इस घटना की एक-एक डिटेल बहुत सतर्क होकर बताते हुए कहा कि शायद इसमें उनसे भी एक गलती हो गई. सैफ ने यह भी कहा कि वह अपने ऊपर हमला करने वाले को अब माफ कर देना चाहते हैं.
सैफ ने 'मोजो स्टोरी' से बातचीत में बताया कि चोर बाथरूम की खिड़की से घर में घुसा था. उन्होंने कहा, 'हम बिस्तर पर लेटे हुए थे. तभी नैनी कमरे में आई और हिंदी में बोली, 'जेह बाबा के कमरे में कोई घुसा है. उसके हाथ में चाकू है. उसको पैसा चाहिए.' मैं आधी नींद में था. तुरंत कमरे में जाकर देखा कि एक आदमी हाथ में चाकू लिए खड़ा है. उसने बच्चे को छोटा सा कट मार दिया था और मेड को भी.'
घटना की डिटेल्स याद करते हुए सैफ ने बताया कि एक तरीका था जिससे शायद मामला इतना न बिगड़ता, 'अगर मैं लाइट जला देता और उससे पूछता कि तुम्हें पता है तुम कहां हो और क्या कर रहे हो? तो शायद मैं उसे समझा सकता था. लेकिन उस वक्त न जाने मुझे क्या हुआ, मैं सीधा उस पर झपट पड़ा और हमारे बीच हाथापाई शुरू हो गई. वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया. हर तरफ कट के निशान थे, खून था. वह बहुत तगड़ा आदमी नहीं था लेकिन दो चाकू तो दो चाकू ही होते हैं!'
सैफ ने बताया कि उस वक्त उनके घर में काम करने वाली नेपाली महिला ने उनकी जान बचाई. उन्होंने कहा, 'उसी समय मेरी नेपाली मेड वहां आई. उसने उसे उठाकर पूरे जोर से मुझसे दूर फेंक दिया. सच कहूं तो उसने मेरी जान बचाई.'
सैफ ने बताया कि एक समय तो वे दोनों दीवार पर सजावट के लिए टंगी तलवारें उतारकर लड़ने जा रहे थे. फिर उसने (मेड ने) उस आदमी को कमरे के अंदर बंद कर दिया और सैफ उसी रास्ते से बाहर निकल गए, जिससे वह आदमी अंदर आया था. तभी सैफ को एहसास हुआ कि वह कुर्ता-पायजामा पहने हुए पूरी तरह खून से लथपथ खड़े हैं.
उन्होंने कहा, 'एक वक्त मैं फर्श पर पड़ा था और मुझे लगा कि शायद मैं मर जाऊंगा. एड्रेनालिन का असर अजीब होता है. उस समय मुझे एक अजीब सी शांति महसूस हो रही थी. मुझे लगा कि मैंने जिंदगी पूरी तरह जी ली है. मैं बस अपने बच्चों में से किसी एक को आखिरी बार देखना चाहता था, उसका हाथ पकड़कर अलविदा कहना चाहता था. उस पल मैंने सोचा— जिंदगी शानदार रही है! फिर कुछ देर बाद मैंने खुद से कहा— नहीं, अभी टाइम नहीं आया है.'
सैफ ने बताया कि अस्पताल जाते समय उनके साथ उनके बड़े बेटे तैमूर भी थे. 'मैं तैमूर के साथ रहना चाहता था. वह मुझे बहुत हिम्मत दे रहा था. मैंने उससे पूछा, 'क्या तुम मेरे साथ चलोगे?' उसने पूछा, 'क्या आप मर जाएंगे?' मैंने उससे कहा, 'नहीं. मेरी पीठ में कुछ फंसा है और बहुत दर्द हो रहा है. लेकिन मैं नहीं मरूंगा. तुम मेरे साथ चलो.'
सैफ सुबह करीब चार बजे ऑटो-रिक्शा से हॉस्पिटल पहुंचे, तब इमरजेंसी वार्ड में लगभग सभी सो रहे थे. उन्होंने जब वहां मौजूद व्यक्ति से स्ट्रेचर लाने को कहा तो वह मुंह देखने लगा, 'तब मैंने कहा— मैं सैफ अली खान हूं. उसने पहले मुझे देखा, फिर खून देखा और तुरंत स्ट्रेचर लेकर आया. उसके बाद पूरा अस्पताल हरकत में आ गया. वहां बेहतरीन डॉक्टर थे और सभी ने सही फैसले लिए.'
सैफ ने बताया कि अब उनका परिवार इस घटना से काफी हद तक उबर चुका है. उन्होंने कहा, 'जेह ने तो मुझे एक प्लास्टिक की तलवार भी दी और कहा कि अगली बार इसके साथ सोना. हम सबने इस घटना को काफी हेल्दी तरीके से पीछे छोड़ दिया है.'
आरोपी के बारे में बात करते हुए सैफ ने कहा, 'मैं उस आदमी को माफ करना चाहता हूं. मुझे लगता है कि उसने बहुत बड़ी गलती की. मुझे नहीं लगता कि वह लड़ाई करने आया था. शायद मुझे उस पर झपटना नहीं चाहिए था. मैं उससे बात कर सकता था और शायद मामला वहीं खत्म हो जाता. अब शायद उसे कई साल जेल में बिताने पड़ेंगे. अगर मुझसे पूछा जाए, तो मैं उसे माफ करना चाहूंगा.'
सैफ ने अंत में कहा कि वह इस पूरी घटना को समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता से भी जोड़कर देखते हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई का नतीजा है. जो हुआ, वह गलत था. लेकिन मुझे लगता है कि शायद वह सिर्फ खाने या कुछ पैसों की तलाश में आया था. अगर मैंने लाइट जलाई होती और उसे एहसास हो जाता कि वह क्या कर रहा है, तो शायद वह खुद कहता— मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई.'
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क