हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में मुश्ताक खान का नाम हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने हीरो बनकर नहीं, बल्कि अपने छोटे-छोटे किरदारों से फिल्मों में जान डाल दी. कभी 'वेलकम' में 'मेरी एक टांग नकली है...' बोलकर दर्शकों को हंसी से लोटपोट किया, कभी 'हम हैं राही प्यार के' के मिश्राजी बनकर दिल जीता तो कभी 'गदर: एक प्रेम कथा' में गुल खान बनकर अपनी अलग पहचान बनाई.
पर्दे पर आते ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा देने वाले दिग्गज एक्टर मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे. 24 सितंबर 2026 को मुंबई के नानावटी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. वह 75 साल के थे और कैंसर से जूझ रहे थे.
'वेलकम' का वो डायलॉग, जो मीम बनकर आज तक जिंदा है
मुश्ताक खान की पहचान की बात हो और 'वेलकम' का बल्लू याद न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. साल 2007 में आई अनीस बज्मी की इस कॉमेडी फिल्म में उन्होंने नाना पाटेकर के किरदार उदय शेट्टी के गैंग के सदस्य बल्लू का रोल निभाया था. फिल्म में अक्षय कुमार, कैटरीना कैफ, अनिल कपूर और नाना पाटेकर जैसे बड़े सितारे थे, लेकिन मुश्ताक खान अपने हिस्से के सीन में अलग ही रंग भर गए.
उनका 'मेरी एक टांग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था...' वाला किस्सा फिल्म के सबसे यादगार कॉमिक मोमेंट्स में शामिल हो गया. आज भी सोशल मीडिया पर उनके इसी किरदार और डायलॉग से जुड़े मीम्स नजर आ जाते हैं. यही मुश्ताक खान की खासियत थी. उन्हें स्क्रीन पर लंबा वक्त चाहिए ही नहीं था. कुछ मिनटों में वह किरदार को ऐसा बना देते थे कि सीन खत्म होने के बाद भी दर्शक उन्हें याद रखते थे.
'हम हैं राही प्यार के' के मिश्राजी से 'गुल खान' तक
मुश्ताक खान ने सिर्फ कॉमेडी नहीं की. आमिर खान और जूही चावला की 'हम हैं राही प्यार के' में उनका मिश्राजी वाला किरदार भी दर्शकों के बीच खूब पसंद किया गया. इसके अलावा महेश भट्ट की 'आशिकी' में रफू मास्टर जैसे छोटे लेकिन यादगार किरदार ने भी उन्हें पहचान दिलाई. 'दिल है कि मानता नहीं', 'सड़क', 'कब्जा' और इसके बाद महेश भट्ट के साथ उनका लंबा जुड़ाव रहा. 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं', 'साथी', 'सड़क', 'जुनून', 'गुनाह', 'सर' और 'हम हैं राही प्यार के' जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया.
लेकिन 'गदर: एक प्रेम कथा' ने उन्हें एक और बेहद यादगार पहचान दी. सनी देओल और अमीषा पटेल की इस फिल्म में वह गुल खान यानी गुल्लू के किरदार में नजर आए. करीब दो दशक बाद जब 'गदर 2' आई तो मुश्ताक खान ने दोबारा गुल खान का किरदार निभाया. इस तरह उनका एक किरदार दो पीढ़ियों के दर्शकों तक पहुंचा.
'हेरा फेरी', 'जोड़ी नंबर 1', 'मुझसे शादी करोगी'... हर जगह छोड़ी छाप
मुश्ताक खान का करियर किसी एक फिल्म या एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं था. उन्होंने 1980 में 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है' से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की और इसके बाद कई दशकों तक हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया. 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं', 'सड़क', 'हम हैं राही प्यार के', 'क्रांतिवीर', 'राजा', 'प्यार तो होना ही था', 'हेरा फेरी', 'गदर: एक प्रेम कथा', 'जोड़ी नंबर 1', 'मुझसे शादी करोगी', 'वेलकम', 'वॉन्टेड', 'ओह माय गॉड!', 'स्त्री', 'बधाई दो', 'गदर 2' और 'स्त्री 2' जैसी फिल्मों में उनके किरदार नजर आए.
वह उन कैरेक्टर आर्टिस्ट में से थे जो कहानी के मुख्य किरदार नहीं होते थे, लेकिन कहानी को आगे बढ़ाने और उसमें कॉमेडी या ड्रामा का रंग भरने में अहम भूमिका निभाते थे. यही वजह है कि उनकी फिल्मोग्राफी में एक तरफ 'आशिकी' जैसी रोमांटिक फिल्म मिलती है तो दूसरी तरफ 'हेरा फेरी' और 'वेलकम' जैसी कॉमेडी और 'गदर' जैसी एक्शन-ड्रामा फिल्म भी.
टीवी की दुनिया में भी खूब दिखे
बड़े पर्दे के साथ मुश्ताक खान ने टेलीविजन पर भी लंबी पारी खेली. 'नुक्कड़', 'वागले की दुनिया', 'भारत एक खोज', 'चमत्कार', 'टेढ़े-मेढ़े सपने' और 'अदालत' जैसे शोज में उन्होंने काम किया. 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी' में बलदेव त्रिपाठी के किरदार ने उन्हें टीवी दर्शकों के बीच भी पहचान दिलाई. उनका सफर सिर्फ बॉलीवुड फिल्मों तक सीमित नहीं रहा. थिएटर, टेलीविजन और फिल्मों- तीनों जगह उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी.
पांच साल तक कैंसर से लड़ी जंग, फिर लौट आई बीमारी
मुश्ताक खान पिछले करीब पांच साल से कैंसर से जंग लड़ रहे थे. उनके बिजनेस पार्टनर शिवम यादव के मुताबिक, उन्होंने पहले बीमारी का इलाज कराया था और ठीक भी हुए थे, लेकिन हाल ही में कैंसर दोबारा लौट आया. उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक बीमारी इस बार बेहद गंभीर अवस्था में थी.
शिवम यादव ने बताया कि मुश्ताक हाल ही में दिल्ली में शूटिंग कर रहे थे. तबीयत खराब होने के बाद उन्हें वापस लाया गया. डॉक्टरों ने परिवार को उनकी हालत की गंभीरता के बारे में बता दिया था, लेकिन अपनों को आखिरी वक्त तक उम्मीद थी.
सबसे भावुक बात यह है कि जिस इंसान ने पूरी जिंदगी पर्दे पर लोगों को हंसाया, वह अपनी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद कमजोर हालत में भी सुबह तक अपने करीबियों से बात कर रहा था. शिवम यादव के मुताबिक, वह सुबह तक उनसे बात कर रहे थे और शाम होते-होते हमेशा के लिए चले गए.
आखिरी वक्त तक काम से जुड़े रहे
मुश्ताक खान की खासियत सिर्फ उनका अभिनय नहीं, बल्कि काम के प्रति उनका लगाव भी था. बीमारी से जूझने के बावजूद वह आखिरी दिनों तक काम करते रहे. उनके बिजनेस पार्टनर ने बताया कि निधन से कुछ दिन पहले तक वह काम कर रहे थे और उनके कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन में थे.
यही शायद एक कलाकार की सबसे बड़ी पहचान होती है- पर्दे पर उसका किरदार खत्म हो जाए, लेकिन उसकी कहानी खत्म न हो. मुश्ताक खान भी अपने पीछे ऐसे ही दर्जनों किरदार छोड़ गए हैं, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं.
परिवार में पत्नी और बच्चे
मुश्ताक खान अपने पीछे पत्नी सलमा और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं. उनके दो बेटों का नाम अरशद और मोहसिन खान, वहीं बेटी का नाम सबा खान बताया गया है. अब उनके परिवार के लिए यह वक्त बेहद मुश्किल है.
मुश्ताक खान का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि उस दौर के एक ऐसे कलाकार का चले जाना है, जिसने बिना किसी बड़े स्टारडम के करोड़ों दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाई. वह चले गए, लेकिन जब भी 'मेरी एक टांग नकली है...' सुनाई देगा, जब 'गदर' का गुल खान पर्दे पर नजर आएगा या 'वेलकम' का कोई पुराना सीन देखकर अचानक हंसी छूट जाएगी, मुश्ताक खान की याद फिर ताजा हो जाएंगी.
मुश्ताक खान को विनम्र श्रद्धांजलि!
आरती गुप्ता