जब एक कोट से ढंक गए 'आशिकी' पर उठ रहे सवाल, गुलशन कुमार से बोले महेश भट्ट, 'नहीं चली तो छोड़ दूंगा इंडस्ट्री'

राहुल और अनु का चेहरा फिल्म आने के बाद इस कदर पॉपुलर हो गया कि उन्हें रूटीन जिंदगी में परेशानियां होने लगी थीं. जबकि फिल्म रिलीज होने से पहले लोगों ने पोस्टर पर इन दोनों का चेहरा देखा ही नहीं था. है न कमाल? इस कहानी के पीछे है गुलशन कुमार की चिंताएं और महेश भट्ट का एक चैलेंज!

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जब एक कोट से ढंक गए 'आशिकी' पर उठ रहे सवाल जब एक कोट से ढंक गए 'आशिकी' पर उठ रहे सवाल

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 13 मई 2025,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

राहुल रॉय और अनु अग्रवाल की फिल्म 'आशिकी' (1990) कितनी आइकॉनिक थी, इस बात का जिक्र बहुत हो चुका है. दो न्यूकमर एक्टर्स की ये फिल्म ना सिर्फ उस साल की सबसे बड़ी हिट्स में से एक थी, बल्कि तबतक बॉलीवुड की सबसे बड़ी म्यूजिकल हिट भी थी. 'आशिकी' का क्रेज लोगों के सिर पर ऐसा चढ़ा कि हर लड़का राहुल रॉय के स्टाइल में बाल रखने लगा था. उधर अनु अग्रवाल के चेहरे की एक झलक पाने के लिए उनके घर के बाहर लड़कों की कतारें लगने लगी थीं. 

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राहुल और अनु का चेहरा फिल्म आने के बाद इस कदर पॉपुलर हो गया कि उन्हें रूटीन जिंदगी में परेशानियां होने लगी थीं. जबकि फिल्म रिलीज होने से पहले लोगों ने पोस्टर पर इन दोनों का चेहरा देखा ही नहीं था. है न कमाल? डायरेक्टर महेश भट्ट ने तय किया था कि वो पोस्टर में 'आशिकी' के लीडिंग कपल का चेहरा दिखाएंगे ही नहीं और उनकी ये ट्रिक कामयाब भी बहुत हुई. मगर क्या आप जानते हैं कि महेश ने ये ट्रिक इस्तेमाल क्यों की? इस कहानी के पीछे है गुलशन कुमार की चिंताएं और महेश भट्ट का एक चैलेंज!

'आशिकी' की कहानी से पहले बने थे इसके गाने 
महेश भट्ट की 'आशिकी' बनने की कहानी एक म्यूजिक एल्बम से शुरू होती है. टी-सीरीज के फाउंडर गुलशन कुमार को समीर की लिखीं और नदीम-श्रवण की कंपोज की हुईं कुछ गजलें पसंद आई थीं. गुलशन ने इस म्यूजिकल तिकड़ी को सलाह दी कि इन गजलों को एक म्यूजिक बैंक के लिए रिकॉर्ड कर लेते हैं, जिसमें से फिल्ममेकर्स अपनी पसंद के हिसाब से गाने उठा सकें. और अगर ये गजलें किस ने नहीं भी उठाईं तो इनका एक म्यूजिक एल्बम बना लिया जाएगा. 

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समीर और नदीम-श्रवण 'चाहत' नाम की इस एल्बम के लिए गाने तैयार करने लगे. महेश भट्ट को इस प्रोजेक्ट का पता चला तो उन्होंने गुलशन कुमार से इसमें से कुछ गजलें सुनने की इजाजत मांगी. उन्हें ये गाने इतने पसंद आए कि इन्हें इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने एक नई फिल्म लिखी जिसका नाम था 'आशिकी'. और इस तरह जो गाने म्यूजिक एल्बम 'चाहत' के लिए बन रहे थे, वो 'आशिकी' फिल्म में आ गए. 

गाने लिखने वाली तिकड़ी खुश थी कि एक बड़ा म्यूजिक डायरेक्टर उनके गानों के लिए फिल्म बना रहा है. ये गाने एल्बम से बचते हुए फिल्म तक तो आ गए मगर कहानी में एक और ट्विस्ट अभी बाकी था.  

जब 'आशिकी' की कामयाबी पर गुलशन कुमार को हुआ शक
समीर ने अपनी किताब 'लिरिक्स बाय समीर' में इस किस्से का जिक्र किया है. उन्होंने बताया है कि एक दिन गुलशन कुमार ने कॉल पर उन्हें कहा कि वो 'आशिकी' के गानों का म्यूजिक एल्बम रिलीज नहीं करेंगे. उनका मानना था कि ये गाने फिल्मी गानों जैसे कम और गजल कलेक्शन जैसे ज्यादा लग रहे हैं. समीर का दिल सा बैठ गया और वो नदीम-श्रवण के पास पहुंच गए. अब तीनों निराश थे और तीनों मिलकर डायरेक्टर महेश भट्ट के पास पहुंच गए. 

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महेश भट्ट शॉक रह गए कि गुलशन कुमार एक प्रोजेक्ट ऐसे अचानक कैसे छोड़ सकते हैं. चारों लोग साथ में एक म्यूजिक स्टूडियो पहुंचे, जहां गुलशन कुमार एक रिकॉर्डिंग में थे. महेश भट्ट सीधा चिल्लाते हुए स्टूडियो में घुसे- 'गुलशन कुमार पागल हो गया है!' ऐसी बदतमीजी भरी बात सुनकर गुलशन बाहर निकल आए. महेश भट्ट ने आते ही उनपर सवाल दागने शुरू कर दिए. गुलशन ने बताया कि 'दिल' जैसी म्यूजिकल हिट के बाद उन्हें इस तरह के, गजल टाइप गानों के चलने की उम्मीद नहीं है. दिलचस्प ये है कि 'दिल' के गाने भी समीर ने ही लिखे थे लेकिन इनके कंपोजर आनंद-मिलिंद थे. 

गुलशन कुमार का लॉजिक सुनकर महेश भट्ट ने वहीं अनाउंस किया 'मेरा अनुभव कहता है कि 'आशिकी', 'दिल' से भी बड़ी हिट होगी.' ये कहते हुए महेश ने एक पेपर खींचा, अपनी जेब से पेन निकाला और उसपर ये कहते हुए अपने दस्तखत कर दिए कि 'अगर 'आशिकी' नहीं हिट हुई तो ये मेरी आखिरी फिल्म होगी.'

कैसे बना 'आशिकी' का आइकॉनिक पोस्टर 
महेश भट्ट के कॉन्फिडेंस से गुलशन कुमार का 'आशिकी' में भरोसा जागने लगा लेकिन उनकी और भी चिंताएं थीं. उन्हें लग रहा था कि 'आशिकी' के दोनों एक्टर्स राहुल रॉय और अनु अग्रवाल, स्टार्स जैसे लग ही नहीं रहे. गुलशन को दोनों एक्टर्स का लुक भी कुछ खास पसंद नहीं आ रहा था. कुछ रिपोर्ट्स तो बताती हैं कि गुलशन को शायद राहुल रॉय का हेयरस्टाइल नहीं पसंद था, जो बाद में यादगार बन गया. 

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गुलशन की इन चिंताओं को दूर करते हुए महेश भट्ट ने उन्हें कहा कि वो पोस्टर ऐसा बनाएंगे जिसमें एक्टर का चेहरा छुपा दिया जाएगा. और इस तरह 'आशिकी 'का आइकॉनिक पोस्टर सामने आया जिसमें फिल्म के लीड कपल के चेहरे एक कोट से ढंके हुए थे. महेश भट्ट का कॉन्फिडेंस देखते हुए गुलशन कुमार को भी हिम्मत आई और उन्होंने 'आशिकी' का म्यूजिक रिलीज करने के साथ-साथ, इसे पूरी जान लगाकर प्रमोट करने का भी वादा किया. 

मार्केटिंग के उस्ताद माने जाने वाले गुलशन कुमार ने लोगों तक पहुंचने के लिए ये ट्रिक लगाई कि 'आशिकी' का पोस्टर, जिसमें एक्टर्स के चेहरे छिपे हुए थे, चूड़ियों के पैकेट-खिलौनों-कपड़ों सब जगह नजर आने लगा. फिल्म की रिलीज डेट 17 अगस्त 1990 थी मगर इसका म्यूजिक एल्बम दिसंबर 1989 में, न्यू ईयर सेलिब्रेशन शुरू होने से ठीक पहले रिलीज किया गया. 

अगले कुछ महीनों में 'आशिकी' के गाने सबकी जुबान पर थे और दिमाग में थी लीड एक्टर्स के चेहरे देखने की जिज्ञासा. इस जिज्ञासा का कमाल ये था कि 30 लाख के बजट में बनी 'आशिकी' ने बॉक्स ऑफिस पर 3 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया था. मगर क्या आपको कभी ये जिज्ञासा हुई है कि पोस्टर वाले सीन के शूट में जब राहुल रॉय और अनु अग्रवाल उस कोट के अंदर थे, तो वो कर क्या रहे थे? 

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देखने में भले ऐसा लगता हो कि ये तस्वीर कोट की आड़ में चल रहे किसिंग सीन की है, मगर रिपोर्ट्स बताती हैं कि राहुल और अनु कोट के अंदर बातें कर रहे थे. दोनों में ये डिस्कशन चल रहा था कि महेश भट्ट कोट के नीचे उनसे करवाना क्या चाहते हैं और अभी इस सीन में कितना टाइम लगने वाला है! 

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