बिना किसी खास प्रमोशन या शोर-शराबे के मई में आई फिल्म कृष्णावतारम कई बड़ी फिल्मों के बीच दर्शकों का प्यार बटोरने में कामयाब हुई. लिमिटेड स्क्रीन्स पर, कास्ट में बिना किसी बड़े बॉलीवुड स्टार की इस फिल्म ने विजुअल्स और भगवान श्रीकृष्ण की कहानी से लोगों का दिल जीत लिया था.
फिल्ममेकर हार्दिक गज्जर को शुरू से ही पता था कि कृष्णावतारम जैसी फिल्म बनाने के लिए सालों की मेहनत, रिसर्च और सब्र की जरूरत होगी. भगवान कृष्ण, रुक्मिणी और सत्यभामा की कहानियों पर आधारित इस फिल्म को डेवलप होने में साढ़े पांच साल से ज्यादा का समय लगा. इंडिया टुडे से खास बातचीत में गज्जर ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की कहानी को पर्दे पर उतारते वक्त उन्होंने किन बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया. उन्होंने अपनी फिल्म में श्रीकृष्ण के किरदार को गोरा दिखाने के सवाल पर भी जवाब दिया.
हार्दिक गज्जर ने बताया कि कैसे उन्होंने कृष्ण से जुड़ी जानी-पहचानी छवि को दोबारा रचा, सही कलाकारों की तलाश की और क्यों फिल्म का हर फ्रेम पारंपरिक धार्मिक कैलेंडर की याद दिलाने वाला होना चाहिए था.
विजुअल इफेक्ट्स (VFX) के बैकग्राउंड से आने वाले हार्दिक गज्जर कहते हैं कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि उस इमेज को दोबारा उतारने की थी, जिससे लोग पीढ़ियों से कृष्ण को जोड़कर देखते आए हैं.
उन्होंने कहा, 'जिस दिन हमने फिल्म लिखना और डिजाइन करना शुरू किया, मेरे दिमाग में लगातार एक ही चीज थी— वो पुराने खूबसूरत धार्मिक कैलेंडर. चुनौती यह थी कि उसी सौंदर्य को बनाए रखते हुए उसे चलती-फिरती तस्वीरों में बदला जाए.'
चाहे राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स हों, मंदिरों की कलाकृतियां या लोकप्रिय धार्मिक तस्वीरें, दर्शकों के मन में कृष्ण की एक खास इमेज पहले से मौजूद है.
गज्जर कहते हैं, 'हम उन सौंदर्य तत्वों को छोड़कर इसे किसी फैंटेसी दुनिया में नहीं बदल सकते थे. रंग, टेक्सचर और विजुअल्स ऐसे होने चाहिए थे कि वही भाव पैदा करें. अगर कोई फिल्म का कोई भी फ्रेम रोककर देखे, तो उसे वह किसी कैलेंडर की तस्वीर जैसा लगे. इसे हासिल करने में सालों की मेहनत और कई एक्सपेरिमेंट लगे.'
कृष्णावतारम: पार्ट 1 के लिए सही चेहरों की तलाश, फिल्म का सबसे लंबा प्रोसेस साबित हुआ. हार्दिक गज्जर ने बताया कि सिर्फ कास्टिंग में ही करीब नौ महीने लग गए.
उन्होंने कहा, 'शुरुआत से ही हमारा प्लान नए चेहरों को लेने का था. जब आप देवताओं को पर्दे पर दिखाते हैं, तो दर्शकों को कलाकार नहीं, किरदार दिखना चाहिए. अगर आप किसी सुपरस्टार को लेते हैं, तो लोग पहले से उसकी इमेज दिमाग में लेकर आते हैं.'
दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में सबसे पहले सत्यभामा का किरदार फाइनल हुआ. गज्जर ने बताया कि कई साल पहले वह किसी दूसरी फिल्म के सिलसिले में संस्कृति जयाना से मिले थे. उस समय वह संस्कृति के साथ काम नहीं कर पाए लेकिन वह मुलाकात उनके जेहन में बनी रही. उन्होंने बताया, 'जैसे ही पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ, मुझे तुरंत संस्कृति याद आ गई.' रुक्मिणी के किरदार की कास्टिंग सबसे मुश्किल साबित हुई.
उन्होंने कहा, 'हमने 200 से ज्यादा प्रोफाइल देखीं. भाषा की समस्या थी और कई दूसरी चुनौतियां भी थीं. लेकिन जिस चेहरे की हमें तलाश थी, वह निवाशिनी कृष्णन थीं. हमने उन्हें मनाया, हिंदी की ट्रेनिंग दी और पूरी तैयारी में लगभग नौ महीने लग गए.'
फिल्म में कृष्ण के किरदार के लिए सिद्धार्थ गुप्ता को चुनने का भी हार्दिक ने दिलचस्प किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया, 'हम ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे, जिसमें कृष्ण के सभी गुण दिखाई दें. जब सिद्धार्थ ऑडिशन देने आए, तो हमने पहले उनका ग्वाला लुक आजमाया. तभी उनमें एक अलग आभा नजर आई. बाद में हमने उनका द्वारकाधीश लुक तैयार किया और जैसे ही उनके सिर पर मुकुट रखा, हमें समझ आ गया कि हमारी तलाश पूरी हो गई.'
हार्दिक ने बताया कि उन्होंने सिद्धार्थ का ऑडिशन रिकॉर्ड तक नहीं किया था और दो दिन बाद उनसे सीधा कहा, 'चलो, यह फिल्म करते हैं.' सिद्धार्थ की तैयारी ने हार्दिक को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. उन्होंने बताया, 'उनकी भाषा स्पष्ट थी, किरदार की समझ मजबूत थी और वह शूटिंग के हर स्टेज में लगातार बेहतर परफॉर्म कर रहे थे. जब हमने उन्हें कॉस्ट्यूम और मेकअप में देखा, तो बहुत सी बातें अपने आप साफ हो गईं.'
हार्दिक को कृष्णावतारम के लिए मोस्टली तारीफें ही मिली हैं. लेकिन कुछ लोगों ने एक सवाल भी उठाया कि भगवान कृष्ण का रंग हमेशा सांवला ही पढ़ने-सुनने को मिलता है, लेकिन फिल्म में हार्दिक ने उनके किरदार को काफी गोरा दिखाया है. इन सवालों का जवाब देते हुए हार्दिक ने कहा, 'जब लोग पूछते हैं कि कृष्ण को सांवले रंग में क्यों नहीं दिखाया गया, तो मेरा एक ही जवाब होता है. हम सभी मंदिरों में गए हैं. हम सभी वहां की मूर्तियों और उनकी आंखों से प्रेम करते हैं. क्या हमने कभी किसी मूर्ति को उसके रंग की वजह से पसंद किया है?'
उन्होंने आगे कहा, 'हर मूर्ति अलग दिख सकती है, लेकिन वह एक जैसी भक्ति और भाव पैदा करती है.' गज्जर का मानना है कि अगर दर्शकों और किरदार के बीच एक इमोशनल रिश्ता बन जाता है तो फिर रूप-रंग जैसी चीजें कम महत्वपूर्ण रह जाती हैं.
जब हार्दिक से फिल्म के अगले पार्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैं अभी कुछ नहीं बता सकता. हम उस पर काम कर रहे हैं, लेकिन उसे आने में अभी समय है.'
पिछले महीने रिलीज हुई कृष्णावतारम: पार्ट 1, वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 55 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है. अब इस फिल्म के ओटीटी पर आने का इंतजार किया जा रहा है.
सना फरज़ीन