आलिया का 'अल्फा' अवतार फेल, समांथा की किलर 'बहू' बनी ब्लॉकबस्टर! दोनों का हाल इतना अलग क्यों?

आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर फिल्म 'अल्फा' का बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल जारी है, वहीं दूसरी तरफ समांथा की एक्शन फिल्म 'मा इंति बंगारम' थिएटर्स में ब्लॉकबस्टर साबित हो चुकी है. दोनों ही फिल्मों में, दो लीडिंग एक्ट्रेसेज ताबड़तोड़ एक्शन कर रही हैं. लेकिन फिल्मों का हाल इतना अलग कैसे? चलिए, ये मैटर समझने की कोशिश करते हैं.

Advertisement
आलिया का 'अल्फा' अवतार फ्लॉप, समांथा का ब्लॉकबस्टर कैसे? (Photo: ITGD) आलिया का 'अल्फा' अवतार फ्लॉप, समांथा का ब्लॉकबस्टर कैसे? (Photo: ITGD)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

आलिया भट्ट की स्पाई-यूनिवर्स फिल्म अल्फा का बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल करना इन दिनों बॉलीवुड फैंस में चर्चा का मुद्दा है. इस फीमेल लीड एक्शन फिल्म से काफी उम्मीदें की जा रही थीं, मगर ये पहले वीकेंड के बाद ही जनता को थिएटर्स तक लाने में स्ट्रगल करती नजर आई.

दूसरी तरफ साउथ की लीड एक्ट्रेस समांथा की एक्शन फिल्म मा इंति बंगारम थिएटर्स में एक महीना पूरा करने के करीब है. अपने बॉक्स ऑफिस रन में इस फिल्म ने ऐसी कमाई की है कि ये तेलुगु इंडस्ट्री में सबसे बड़ी फीमेल लीड फिल्म बन चुकी है. ऐसे में इंडियन फिल्म लवर्स में ये एक जेनुइन सवाल है— दोनों ही फीमेल लीड फिल्में हैं, दोनों में ही एक्शन की भरमार है. मगर दोनों में ऐसा क्या अंतर है कि अल्फा फ्लॉप होने की तरफ बढ़ रही है और मा इंति बंगारम ब्लॉकबस्टर हो चुकी है?

Advertisement

आलिया की फिल्म पर फ्लॉप का खतरा, समांथा की ब्लॉकबस्टर

करीब 125 करोड़ के रिपोर्टेड बजट में बनी अल्फा 10 दिन में पूरे 54 करोड़ का भी कलेक्शन नहीं कर पाई है. कलेक्शन का गुणा-गणित भी छोड़ दें तो अल्फा दर्शकों में एक्साइटमेंट जगाने में नाकाम साबित हुई. जबकि ये फिल्म शाहरुख खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर जैसे चार बड़े सुपरस्टार्स वाले स्पाई-यूनिवर्स का हिस्सा थी.

दूसरी तरफ साउथ में, समांथा के लीड रोल वाली तेलुगु फिल्म मा इंति बंगारम ने अपनी इंडस्ट्री में एक टॉप रिकॉर्ड बना डाला है. समांथा की फिल्म अब तेलुगु इंडस्ट्री की सबसे बड़ी फीमेल लीड फिल्म बन चुकी है. 20-30 करोड़ के रिपोर्टेड बजट में बनी मा इंति बंगारम, 100 करोड़ वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर चुकी है. दोनों फिल्मों का कलेक्शन और बॉक्स ऑफिस पर इनका नतीजा इतना अलग होने की एक बड़ी वजह है फिल्ममेकिंग का फर्क.

Advertisement

'अल्फा' वर्सेज 'मा इंति बंगारम'

आलिया की अल्फा और समांथा की मा इंति बंगारम में सबसे बड़ा फर्क यही है कि एक फॉर्मूला-फिल्म है, और दूसरी फॉर्मूले को वैसे का वैसे चेपती नहीं, उसे बदलती है. अल्फा स्पाई-यूनिवर्स के उसी फिक्स फॉर्मूले को फॉलो करती है जिसमें पठान के शाहरुख खान या वॉर के ऋतिक रोशन नजर आते हैं. 6 फिल्मों पुराने उसी भारत-पाकिस्तान एंगल से एक नई कहानी निचोड़ने की कोशिश होती है, जिसके लीड किरदारों का, अभी की सिचुएशन से कोई पुराना कनेक्शन है.

वही स्टाइल-भरा एक्शन जो स्पाई-यूनिवर्स के हीरोज ने किए, वही अल्फा में लड़कियां कर रही हैं. स्पाई-यूनिवर्स में लोग पहले ही इस बात से परेशान थे कि इसके किरदार 'स्पाई' यानी जासूस नहीं होते. धुरंधर के जसकीरत (रणवीर सिंह) जैसा रियलिस्टिक जासूस देखने के बाद कोई दर्शक सेम टेम्पलेट में, सिर्फ मेल एक्टर्स की जगह फीमेल एक्ट्रेसेज को क्यों देखना चाहेगा?

इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश अल्फा में नहीं दिखती. जबकि समांथा की मा इंति बंगारम अपना खुद का एक नया टेम्पलेट गढ़ती है. समांथा का किरदार एक एक्स असासिन यानी किलर है, जिसने नया जीवन शुरू किया है. वो एक घर की 'लाडली बहू' बनने का स्ट्रगल कर रही है, लेकिन जब घर पर खतरा आता है तो अपने पुराने तेवर में आ जाती है.

Advertisement

समांथा की कहानी में सिर्फ ये पॉइंट नहीं है कि एक एक्ट्रेस को मेल एक्टर्स जैसा एक्शन करना है. ये फिल्म एक पूरा संसार गढ़ती है जिसमें महिला किरदार का एक्शन-पैक होना कहानी की जरूरत है. उसके एक्शन को बाहर लाने वाली प्रेशर-कुकर सिचुएशन है. पहले से ही फिल्मों और वेब सीरीज में खतरनाक एक्शन करती नजर आईं समांथा, मा इंति बंगारम में मास एक्शन करती दिख रही हैं.

वो स्टाइल-भरा एक्शन भर नहीं है, उसमें हिंसा है, क्रूरता है और मास अंदाज है, जो अभी तक साउथ में ज्यादातर मेल एक्टर्स के साथ ही फिल्मों में नजर आता है. साड़ी पहने समांथा उसी अंदाज में लड़ती नजर आती हैं. इस तरह मा इंति बंगारम टेम्पलेट में फंसने की बजाय, उसे पूरी तरह पलट देती है.

ये टेम्पलेट पलटने का खेल दर्शक को कहानी में बांधे रखता है और इसी ने मा इंति बंगारम को तगड़ी कामयाबी दिलाई है. जबकि टेम्पलेट में फंसने का चक्कर ही आलिया की अल्फा के लिए घातक साबित हुआ और 'कुछ नया' तलाशते दर्शक के लिए बस एक ही पॉइंट बचा— वही एक्शन, वैसा ही गेम एक्ट्रेसेज खेल रही हैं.

अब देखना है कि बॉलीवुड के फिल्ममेकर्स और बड़े स्टूडियो कब ये समझते हैं कि अब फॉर्मूला-फिल्ममेकिंग से दर्शक ऊबने लगे हैं. कब वो अपने सेट फॉर्मूले को तोड़कर नई कहानी लाने, नया प्रेजेंटेशन दिखाने पर काम करते हैं बजाय इसके कि सिर्फ एक ही टेम्पलेट में हीरो की जगह हीरोइन आ जाए. शायद अल्फा का फेलियर और मा इंति बंगारम की धुआंधार सक्सेस इस मामले में एक उदाहरण बने.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »