रानाघाट लोकसभा सीटः चैतन्य महाप्रभु की जन्मभूमि, जहां BJP चाहती है पैर जमाना

रानाघाट लोकसभा सीट 2009 में बनी थी. अब तक इस सीट पर दो आम चुनाव हुए हैं, जहां ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. अपने बढ़ते आधार को देखते हुए बीजेपी भी इस सीट पर जीत हासिल करना चाहती है, वहीं TMC अपने नए गढ़ को कायम रखने की कोशिश करेगी.

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वरुण शैलेश

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

रानाघाट लोकसभा सीट परिसीमन 2009 की रिपोर्ट में अस्तित्व में आई थी. इससे पहले यह सीट नवद्वीप संसदीय क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी. नवद्वीप श्री चैतन्य महाप्रभु की जन्मभूमि है, जो भगीरथी नदी के पश्चिमी किनारे पर बसा हुआ है. यह पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मुख्यालय से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इतिहास बताता है कि नवद्वीप पर सेन वंश का शासन था, जिन्होंने यहां पर अनेक मंदिरों का निर्माण कराया. नवद्वीप में बने मंदिर की दीवारों को फूलों के चित्रों से सजाया गया है जो इसकी सुन्दरता को कई गुणा बढ़ा देते हैं. इस मंदिर में चैतन्य महाप्रभु के सुंदर चित्रों और प्रतिमाओं के दर्शन भी किए जा सकते हैं.

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रानाघाट सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है, जहां 2009 में हुए चुनावों में TMC के सुकरु रंजन हलधर ने जीत हासिल की थी. 2014 में तृणमूल कांग्रेस ने दोबारा जीत हासिल की और तपस मंडल सांसद चुने गए. पिछले आम चुनावों में मोदी लहर के बावजूद ममता मुखर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी. लेकिन पश्चिम बंगाल में जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ बढ़ा है उससे भगवा पार्टी के हौसले बुलंद हैं और राज्य की राजनीति पर प्रभाव जमाने के लिए वह पूरी कोशिश कर रही है.

रानाघाट का राजनीतिक समीकरण

नवद्वीप संसदीय सीट पहले आम चुनाव के दौरान 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी. लेकिन इसका नाम शांतिपुर संसदीय क्षेत्र हुआ करता था. बाद में इसका नाम बदलकर नवद्वीप कर दिया गया. बहरहाल अब रानाघाट को संसदीय क्षेत्र घोषित किया जा चुका है. राजनीतिक इतिहास के तौर पर देखा जाए तो इस क्षेत्र से पहला चुनाव कांग्रेस के उम्मीदवार अरुण चंद्र गुहा ने जीता था. 1952 के बाद हुए उप चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मैत्रा ने जीत हासिल की थी. 1957 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर इला पाल चौधरी चुनाव जीतीं.

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वैसे तो इस सीट पर आम तौर पर कांग्रेस और माकपा के बीच सीधा मुकाबला रहा है. लेकिन 1962 के चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर हरिपद चट्टोपध्याय चुनाव जीते थे. 1967 में बांग्ला कांग्रेस के टिकट पर पी.आर. ठाकुर चुनाव जीते. माकपा के टिकट पर 1971 में बीभा घोष चुनकर संसद पहुंचीं. 1977, 1980 और 1984 में वह लगातार सांसद चुनी जाती रहीं. 1989 के आम चुनावों में माकपा ने नए चेहरे के तौर पर असीम बाला को मैदान में उतारा. असीम बाला भी 1989, 1991, 1996 और 1998 तक लगातार चुनाव जीतती रहीं. इसके बाद 1999 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की और उसके उम्मीदवार आनंद मोहन विश्वास संसद पहुंचे थे. 2003 के उपचुनावों में माकपा के अल्केश दास चुनाव जीते. 2004 के आम चुनावों में भी अल्केश दास ही दोबारा चुनाव जीते. 2009 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सुचारू रंजन हल्दर संसद पहुंचे थे. 2014 के चुनाव में TMC के तपस मंडल जीत हासिल करने में कामयाब रहे.

सामाजिक ताना-बाना

नादिया जिले में पड़ने वाली रानाघाट संसदीय क्षेत्र की आबादी 22,37,046 है. जनगणना 2011 के मुताबिक रानाघाट में 56.82% आबादी गांवों में रहती है जबकि 43.18% लोग शहरों में रहते हैं. वहीं कुल आबादी में अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात क्रमशः 35.92 और 3.53 फीसदी है. 2017 की मतदाता सूची के मुताबिक रानाघाट में 16,93,789 मतदाता हैं जो 1947 बूथों पर मतदान करते हैं. 2014 के चुनावों में 84.45% जबकि 2009 में 86.3% मतदान हुए थे.

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वर्ष 2014 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, माकपा और कांग्रेस को क्रमशः 43.63%, 17.27%, 28.72% और 6.81% वोट मिले थे. वहीं 2009 के आम चुनावों में इन दलों को क्रमशः 50.13%, 5.04% और 41.25% वोट मिले थे. रानाघाट लोकसभा क्षेत्र के तहत सात विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें कृष्णानगर दक्षिण, शांतिपुर, रानाघाट उत्तर पश्चिम, कृष्णगंज (अनुसूचित जाति),  रानाघाट उत्तर पूर्व (अनुसूचित जाति), रानाघाट दक्षिण (अनुसूचित जाति) और चकदाहा शामिल हैं.

2014 के जनादेश का संदेश

वर्ष 2014 के आम चुनावों में रानाघाट लोकसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, माकपा और कांग्रेस को क्रमशः 43.63%, 17.27%, 28.72% और 6.81% वोट मिले थे. वहीं 2009 के आम चुनावों में इन दलों को क्रमशः 50.13%, 5.04%, 41.25% और -% वोट मिले थे. 2014 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस बंगाल में 34 सीटों पर जीतने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस को 4 सीटों, माकपा और बीजेपी को 2-2 सीटों पर जीत मिली थी. राज्य के स्तर पर देखा जाए तो तृणमूल कांग्रेस को 39.05%, माकपा को 29.71%, बीजेपी को 16.80% और कांग्रेस को 9.58% वोट मिले थे. वोट प्रतिशत के मामले में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद माकपा सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई.

कैसा रहा सांसद का रिपोर्ट कार्ड?

रानाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद निधि के तहत 25 करोड़ रुपये निर्धारित है. इसमें विकास संबंधी कार्यों के लिए 22.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए. 27 जनवरी 2019 के रिकॉर्ड के मुताबिक रानाघाट के सांसद तपस मंडल 82.37 फीसदी फंड का इस्तेमाल कर चुके हैं. संसदीय कार्यवाही के दौरान तपस मंडल सदन में 89 फीसदी उपस्थित रहे. उन्होंने 30 डिबेट में शिरकत की और 6 सवाल पूछे. लेकिन उन्होंने कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया.

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