बंगाल में 20 घंटे पहले रुका प्रचार, EC के फैसले पर BJP और ममता आमने-सामने

ममता बनर्जी साफ कह रही हैं कि चुनाव आयोग नरेंद्र मोदी और शाह के इशारे पर काम कर रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी भी ममता बनर्जी पर हमलावर है.

Advertisement
मतदान की फाइल फोटो मतदान की फाइल फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2019,
  • अपडेटेड 9:45 PM IST

7वें चरण में 59 सीटों पर देश के कई राज्यों में चुनाव है लेकिन बंगाल की 9 सीटों का चुनाव सबसे बड़ा संग्राम बनता दिख रहा है. यहां तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे के आमने सामने आ गए हैं. मंगलवार को अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद बुधवार को चुनाव आयोग ने इस तरह के अपने पहले फैसले में चुनाव प्रचार को तय समय से 20 घंटे पहले रोक दिया.

Advertisement

इस फैसले के बाद जहां ममता बनर्जी साफ कह रही हैं कि चुनाव आयोग मोदी और शाह के इशारे पर काम कर रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी भी ममता बनर्जी पर हमलावर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी पर लोकतंत्र को खतरे में डालने का आरोप लगाया है तो ममता बनर्जी कह रही हैं कि जरूरत पड़ी तो मोदी को जेल में डालेंगे.

चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोपों को लेकर ममता बनर्जी को कांग्रेस और लेफ्ट समेत कई विपक्षी दलों का साथ मिला है, हालांकि यहां ये जानना जरूरी है कि डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर और स्पेशल ऑब्जर्वर्स ने बंगाल पर जो रिपोर्ट दी थी उसमें साफ कहा गया है कि पुलिस-प्रशासन सभी उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं दे रहा है, साथ ही टीएमसी के नेता 23 मई के बाद की धमकी लोगों को दे रहे हैं.

Advertisement

चुनाव आयोग की कार्रवाई पर आजतक ने सीपीएम नेता वृंदा करात और बीजेपी नेता रूपा गांगुली से बात की. रूपा गांगुली ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी पर इस बात के लिए काफी नाराज है कि ऐसा कड़ा कदम इतनी देरी से क्यों उठाया गया. पूरे देश की पैरा मिलिटरी फोर्स को उठाकर बंगाल में क्यों नहीं लगाया गया जहां इतनी हिंसा हो रही है. रूपा गांगुली ने कहा कि ममता बनर्जी का चुनाव प्रचार बैन करना चाहिए था क्योंकि वे भाषणों में गाली गालौज कर रही हैं. गांगुली ने कहा कि पूरा 7वां चरण बंद होना चाहिए क्योंकि पहले हिंसा के कारणों का पता लगाना जरूरी है. रूपा गांगुली के मुताबिक विद्यासागर कॉलेज में जब छात्र पहले से काले झंडे दिखा रहे थे, बैनर लगा रहे थे तो पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी, इसकी जांच होनी चाहिए. बाहर के लोगों को क्या पता कि कॉलेज के अंदर तीन गेट है और उसके पीछे विद्यासागर की मूर्ति लगी है. कॉलेज में सीपीएम, टीएमसी और कांग्रेस के ही लड़के होंगे जो ये काम (मूर्ति तोड़ना) करेंगे.

वृंदा करात ने चुनाव आयोग के फैसले के बारे में कहा कि इलेक्शन कमीशन को कानून की लाज रखनी चाहिए थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों रैली खत्म होने के बाद बुधवार रात 10 बजे से पाबंदी लगाई जा रही है, ये पक्षपात नहीं है तो क्या है? इस फैसले से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता घटती है, बढ़ती है या बचती है, ये बड़ा सवाल है. करात ने कहा कि चुनाव आयोग के मामले में हम किसी दल के साथ नहीं हैं बल्कि नियम और कानून के साथ हैं. ममता बनर्जी कौन होती हैं चुनाव आयोग को बोलने वालीं क्योंकि उन्होंने खुद कई नियमों को तोड़ा है. इलेक्शन कमीशन का जो रोल होना चाहिए था, वो कतई नहीं है. चुनाव आयोग पूरी तरह पक्षपात में काम कर रहा है.       

Advertisement

वृंदा करात ने कहा, चुनाव आयोग का दायित्व बनता है कि वह तय करे कि किस प्रकार के जुलूस निकल सकते हैं, किस प्रकार के नारे लगाए जा सकते हैं. चुनाव आयोग के विशेष फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर होते हैं. उसका विशेष दायित्व है कि जो भी आधिकारिक वीडियो है, उसे पूरे देश के सामने लाना चाहिए. उस आधार पर पता चलेगा कि बीजेपी और आरएसएस के लोगों ने क्या किया और टीएमसी के लोगों ने क्या किया. इलेक्शन कमीशन की जिम्मेदारी है कि वह दूध का दूध और पानी का पानी करे.

चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रूपा गांगुली ने कहा कि सबसे ज्यादा घाटा बीजेपी को है क्योंकि उसे 24 घंटे प्रचार से दूर रहना पड़ेगा. चुनाव आयोग बंगाल के चुनाव को संभाल नहीं पाया है.

गौरतलब है कि बंगाल में जारी चुनावी हिंसा के मद्देनजर राज्य की 9 लोकसभा सीटों पर आगामी 19 मई को होने वाले मतदान के लिए निर्धारित अवधि से एक दिन पहले ही प्रचार अभियान बंद हो जाएगा. चुनाव आयोग ने बुधवार को इस आशय का आदेश जारी करते हुए कहा कि बंगाल में 16 मई को रात दस बजे से हर प्रकार का प्रचार अभियान प्रतिबंधित हो जाएगा. उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने बताया कि देश के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब आयोग को चुनावी हिंसा के मद्देनजर किसी चुनाव में निर्धारित अवधि से पहले चुनाव प्रचार रोकना पड़ा हो.

Advertisement

लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर 19 मई को होने वाले मतदान में पश्चिम बंगाल की नौ सीटें भी शामिल हैं. पूर्व निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक इस चरण के मतदान से 48 घंटे पहले, 17 मई को शाम पांच बजे से चुनाव प्रचार थम जाएगा लेकिन बंगाल में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए आयोग ने राज्य में निर्धारित अवधि से एक दिन पहले, 16 मई को रात 10 बजे से किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार प्रतिबंधित कर दिया है. यह प्रतिबंध राज्य की सभी 9 सीटों पर 19 मई को शाम पांच बजे मतदान पूरा होने तक जारी रहेगा.

चंद्रभूषण कुमार ने साफ किया कि मंगलवार को कोलकाता में समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने के बाद राज्य में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर चुनाव आयोग ने गंभीर नाराजगी जताते हुए यह कार्रवाई की है. उन्होंने कहा, ‘यह संभवत: पहला मौका जब आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस तरह की कार्रवाई करनी पड़ी हो.’ इस बीच आयोग ने राज्य में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अजय नायक को स्पेशल ऑब्जर्वर और पुलिस सेवा के रिटायर अधिकारी विवेक दुबे को स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया है. इसके अलावा आयोग ने आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल की खुफिया शाखा सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार को सेवा मुक्त कर केंद्रीय गृह मंत्रालय भेज दिया है. आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य को भी हटा कर उनका प्रभार राज्य के मुख्य सचिव को सौंपने का आदेश दिया है.

Advertisement

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »