यूपी में परिवारिक गठबंधन: कांग्रेस भी मुलायम-डिंपल के खिलाफ नहीं उतारेगी उम्मीदवार

उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी कांग्रेस ने भी बड़ा दिल दिखाया है. कांग्रेस ने ऐसी 6 सीटों पर चुनाव न लड़ने का फैसला किया है, जहां अखिलेश यादव व मायावती खुद चुनाव लड़ेंगे या उनके परिवार से कोई चुनाव लड़ेगा.

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राहुल गांधी के साथ अखिलेश व डिंपल यादव (फाइल फोटो) राहुल गांधी के साथ अखिलेश व डिंपल यादव (फाइल फोटो)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 12 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

उत्तर प्रदेश के सियासी रण में कांग्रेस को भले ही समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में जगह न मिली हो, लेकिन जिन सीटों पर इन दलों के पारिवारिक नेता चुनाव में उतर रहे हैं, वहां सब एक-दूसरे पर मेहरबान नजर आ रहे हैं. अब कांग्रेस ने ऐसी ही 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है.

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इससे पहले बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ गठबंधन की घोषणा करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रायबरेली व अमेठी सीट कांग्रेस को देने की बात कही थी और इन सीटों पर गठबंधन का उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लिया था. कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव लगातार ये कह रहे हैं कि कांग्रेस को दो सीटें दी गई हैं, जो सोनिया गांधी व राहुल गांधी के चुनावी क्षेत्र हैं.

11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी कांग्रेस ने भी बड़ा दिल दिखाया है. कांग्रेस ने ऐसी 6 सीटों पर चुनाव न लड़ाने का फैसला किया है, जहां अखिलेश यादव व मायावती खुद चुनाव लड़ेंगे या उनके परिवार से कोई चुनाव लड़ेगा.

इन सीटों पर कांग्रेस नहीं उतारेगी प्रत्याशी!

माना जा रहा है कि अब कांग्रेस पार्टी ने मैनपुरी, फिरोजाबाद, कन्नौज और आजमगढ़ सीट खाली छोड़ने का फैसला किया है. इन चार सीटों के अलावा अगर मायावती कहीं से लड़ती हैं तो उस सीट पर भी कोई उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा. बता दें कि मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, कन्नौज से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव और फिरोजाबाद से रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

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आजमगढ़ सीट से अखिलेश यादव के लड़ने की चर्चा है. जबकि मायावती ने अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की है.

बदायूं सीट पर भी विचार

कांग्रेस अपनी पहली लिस्ट में बदायूं सीट से उम्मीदवार का नाम तय कर चुकी है. दिलचस्प बात ये है कि इस सीट से फिलहाल अखिलेश यादव के परिवार से धर्मेंद्र यादव सांसद हैं. ऐसे में अब इस सीट से भी कांग्रेस उम्मीदवार हटाने पर विचार चल रहा है.

मजबूत सीटों पर बातचीत की जुगत में कांग्रेस

सपा-बसपा परिवार के लिए बड़ा दिखाते हुए कांग्रेस इस बात की भी संभावनाएं तलाश रही है कि जहां उसकी स्थिति जीतने वाली बन सकती है, वहां सपा-बसपा के समर्थन की कोई सूरत बन जाए.

प्रियंका गांधी को यूपी में उतार कर कांग्रेस जिस तेवर से आगे बढ़ी थी, फिलहाल वो नरम पड़ते नजर आ रहे हैं. गठबंधन पर पुनर्विचार के सवाल पर अखिलेश ने ये कहकर भी विराम लगा दिया है कि अब वक्त नहीं बचा है, दोबारा से गठबंधन के लिए मेज नहीं सजाई जा सकती. ऐसे में सपा-बसपा और कांग्रेस अलग-अलग लड़ते हुए ही अंदरूनी तौर पर एक सहमति के साथ बीजेपी के खिलाफ चुनावी रण में उतरने की योजना पर चलती दिखाई दे रही है.

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