पाथर प्रतिमा विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में स्थित है. यह क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है और मैथुरापुर (SC) लोकसभा सीट का हिस्सा है. पाथर प्रतिमा क्षेत्र सुंदरबन क्षेत्र के गहरे भाग में स्थित है, जो ज्वारीय नदियों, मैंग्रोव जंगलों और कमजोर बांधों के लिए जाना जाता है.
अब तक यहां 14 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. पहले इस क्षेत्र में सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) का दबदबा था, जिसने पहले तीन चुनाव जीते थे. फिर कांग्रेस ने 1972 और 1996 में जीत दर्ज की. 1977 से 1991 तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने लगातार चार बार चुनाव जीते, साथ ही 2001 और 2006 में भी जीत हासिल की. 2006 के बाद CPI(M) की पकड़ कमजोर हुई और तृणमूल कांग्रेस की ताकत बढ़ी.
तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में राज्य में अपनी बढ़ती ताकत के साथ पाथर प्रतिमा में जीत दर्ज की. समीर कुमार जना ने CPI(M) के जेजनश्वर दास को 14,773 वोटों से हराया था. इसके बाद 2016 में जनाजी ने कांग्रेस के फणीभूषण गिरी को 13,793 वोटों से हराया. 2021 में उन्होंने बीजेपी के असीत कुमार हलदार को 22,134 वोटों से पराजित कर तीसरी बार लगातार जीत दर्ज की.
बीजेपी का प्रदर्शन लगातार बढ़ रहा है. 2011 में उसने सिर्फ 3,553 वोट प्राप्त किए थे, जो 2016 में बढ़कर 6,942 और फिर 2021 में 98,047 वोट हो गए. लोकसभा चुनावों में भी यही प्रवृत्ति देखी गई, जहां बीजेपी ने 2019 और 2024 में CPI(M) और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया. तृणमूल कांग्रेस ने 2019 में बीजेपी से 35,779 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो 2024 में घटकर 25,172 वोट रह गई.
2021 विधानसभा चुनाव में पाथर प्रतिमा में कुल 2,63,675 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में 2,52,463 थे. अनुसूचित जाति मतदाता कुल मतदाताओं का 22.95% और मुस्लिम मतदाता 9.30% हैं. यहां की मतदान दर हमेशा बहुत अच्छी रही है- 2016 में 89.80% और 2021 में 87.93% रही थी.
पाथर प्रतिमा की जमीन निचली और ज्वारीय नदियों व नालों से भरी हुई है. छोटो बनश्याम, गोबरधनपुर और रामगंगा जैसी नदियां यहां की भौगोलिक संरचना बनाती हैं. यहां की प्रमुख अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, लेकिन खारी मिट्टी के कारण फसल की विविधता सीमित है. मुख्य फसल धान है, साथ ही जूट, दालें और तिलहन भी उगाए जाते हैं. साथ ही मछली पालन यहां का एक बड़ा पेशा है.
हालांकि क्षेत्र में साक्षरता दर 82.11% है, फिर भी पाथर प्रतिमा आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ क्षेत्र है. लगभग आधे परिवार (49.13%) गरीबी रेखा के नीचे हैं. बिजली तो सभी गांवों में है, लेकिन सड़कों और परिवहन सुविधाएं अधूरी हैं. निकटतम रेलवे स्टेशन 44 किमी दूर है और फेरी सेवा आज भी मुख्य परिवहन का जरिया बनी हुई है.
सुंदरबन क्षेत्र में पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण गंगासागर, बक्कलिहाली और फ्रेजरगंज जैसे स्थानों पर अधिक पर्यटक आने लगे हैं. गोबरधनपुर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसका व्यापक लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच पाया है. यहां रोजगार के अवसर और बेहतर कनेक्टिविटी की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है.
पाथर प्रतिमा का भौगोलिक महत्व भी है. यह काकद्वीप से लगभग 30 किमी, नमखाना से 35 किमी, फ्रेजरगंज व बक्खाली से करीब 50-55 किमी, गंगासागर से 60 किमी और राज्य राजधानी कोलकाता से लगभग 100 किमी दूर स्थित है. यह क्षेत्र सुंदरबन की संवेदनशीलता और परंपरागत संघर्षों की भूमि रहा है, जैसे तेभग आंदोलन और ऑपरेशन बर्गा.
2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का लक्ष्य अपनी बढ़ती लोकप्रियता को जीत में बदलना होगा. जबकि तृणमूल कांग्रेस को तीन लगातार जीत का भरोसा मिलेगा. बचे हुए क्षेत्रीय दलों की भूमिका सीमित नजर आती है. इसलिए पाथर प्रतिमा एक महत्वपूर्ण रणभूमि बनकर उभरता दिख रहा है, जहां मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच होगा.
(अजय झा)