बरुईपुर पश्चिम, एक सामान्य वर्ग (General Category) विधानसभा क्षेत्र, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है और यह जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यह क्षेत्र अपने वर्तमान स्वरूप में 2008 में लागू हुए परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की सिफारिशों के बाद अस्तित्व में आया था. इस प्रक्रिया में पहले के बरुईपुर विधानसभा
क्षेत्र को बरुईपुर पश्चिम और बड़ुइपुर पूर्व में विभाजित कर दिया गया था. बरुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में बरुईपुर नगरपालिका और बरुईपुर विकास खंड की 10 ग्राम पंचायतें शामिल हैं.
बरुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ बना हुआ है. राज्य विधानसभा के अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता बिमन बनर्जी ने अब तक आयोजित तीन विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की है.
2011 में उन्होंने सीपीआई(एम) के कनक कान्त परिया को 31,888 वोटों से हराया. 2016 में सीपीआई(एम) के सैफुद्दीन खान को 36,532 वोटों से हराया. 2021 में बीजेपी के देबोपम चटर्जी को 61,910 वोटों से पराजित किया.
बीजेपी का प्रदर्शन भी धीरे-धीरे सुधर रहा है. 2011 में बीजेपी को मात्र 4,191 वोट मिले थे. यह संख्या बढ़कर 2016 में 13,812 वोट हो गई. और 2021 में यह बढ़कर 59,096 वोट तक पहुंच गई.
यहां लगभग एक तिहाई मतदाता मुस्लिम हैं, जो आमतौर पर बीजेपी का समर्थन नहीं करते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी ट्रिनामूल कांग्रेस ने बरुईपुर पश्चिम में अपनी बढ़त बरकरार रखी, बीजेपी से 40,248 वोटों की बढ़त बनाई, जो 2019 में 35,032 वोट थी.
2021 विधानसभा चुनाव में कुल पंजीकृत मतदाता 2,53,749 थे. मुस्लिम मतदाता 30.30% (76,872 वोटर) और अनुसूचित जाति (SC) मतदाता 30.28% (76,819 वोटर) थे. क्षेत्र का 51.60% हिस्सा ग्रामीण है और 48.40% शहरी. मतदान प्रतिशत भी बहुत उच्च रहा है. 2021 में मतदान प्रतिशत 83.29% था, 2019 में 82.16%, और 2016 में 85.77% रहा था.
बरुईपुर क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी है. यह पहले कोलकाता-पूर्व बंगाल रेलवे लाइन का प्रमुख पड़ाव था. बरुईपुर नगर, जो बरुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, औपनिवेशिक काल में इंडिगो (नीलगाय) के बागानों के लिए जाना जाता था. यह क्षेत्र परगना क्षेत्र की विशेषता अनुसार समतल और निम्न-भूमि वाला है, जो गंगा डेल्टा का हिस्सा है. क्षेत्र में कई छोटी नदियां और नाले हैं, जिनमें अदी गंगा भी शामिल है, जो कभी कोलकाता तक नाव द्वारा यात्रा करने का मार्ग था.
कृषि क्षेत्र यहां की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है. यहां धान (पैडी), सब्जियां, फूल मुख्य फसलें हैं. हालांकि शहरीकरण की वजह से कृषि भूमि पर दबाव बढ़ा है, विशेषकर नगरपालिका के आसपास. रोजगार का स्वरूप मुख्यतः असंगठित क्षेत्र में है, जिनमें छोटे व्यवसाय, निर्माण कार्य, सेवाएं शामिल हैं. इसके अलावा, कई लोग कोलकाता में काम करने के लिए रोजाना बरुईपुर रेलवे स्टेशन से सिडाह (Sealdah) तक यात्रा करते हैं.
बीजेपी की प्रगति के बावजूद, तृणमूल कांग्रेस क्षेत्र में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है. बीजेपी को एक वास्तविक चुनौती देने के लिए धार्मिक अल्पसंख्यकों के मतों में सेंध लगानी होगी और अनुसूचित जाति व शहरी मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी. साथ ही, अगर वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन अपनी खोई हुई जमीन पुनः हासिल कर लेता है, तो राजनीतिक परिदृश्य में संभावित बदलाव हो सकता है.
(अजय झा)