जादवपुर विधानसभा क्षेत्र सामान्य श्रेणी की सीट है, जो मुख्य रूप से कोलकाता में स्थित है. इसका एक छोटा हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले में आता है. यह क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के 10 वार्डों से मिलकर बना है. जादवपुर लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. राजनीतिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र शिक्षा और संस्कृति का भी केंद्र है. यहां जादवपुर
विश्वविद्यालय, इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस और सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे प्रमुख संस्थान मौजूद हैं.
यह सीट 1967 में बनी थी और लंबे समय तक माकपा (CPI-M) का गढ़ रही. अब तक यहां 1983 का उपचुनाव समेत 15 चुनाव हुए हैं, जिनमें से 13 बार माकपा ने जीत दर्ज की. यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से खास तौर पर जुड़ी रही है. उन्होंने 1987 से 2006 तक लगातार पांच बार यहां से जीत हासिल की. लेकिन 2011 में टीएमसी के मनीष गुप्ता ने उन्हें 16,684 वोटों से हरा दिया, जिसने बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया और 34 साल बाद वाममोर्चे की सत्ता का अंत हुआ.
2021 में टीएमसी के देबब्रत मजूमदार ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को 38,869 वोटों से हराया. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में भी टीएमसी ने जादवपुर विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाए रखी. टीएमसी का यह बढ़त 2019 के 12,155 वोट से बढ़कर 17,849 वोट तक पहुंच गया. खास बात यह रही कि 2024 में भाजपा माकपा को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर आ गई, जो उसके बढ़ते असर को दर्शाता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में यहां 2,79,828 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 2,94,186 हो गए. इनमें लगभग 11.68% अनुसूचित जाति (SC) और करीब 8% मुस्लिम मतदाता हैं. पूरा क्षेत्र शहरी है, यहां ग्रामीण मतदाता नहीं हैं. मतदान प्रतिशत हमेशा 80% से अधिक रहा है.
जादवपुर लंबे समय से बौद्धिक और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. 1955 में स्थापित जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रमुख शोध संस्थानों में गिना जाता है. यहां विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिए जाते हैं. इसके अलावा एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी जैसे राष्ट्रीय शोध केंद्र भी यहीं स्थित हैं.
वाममोर्चे के शासनकाल में यहां कई छोटे और मझोले उद्योग बंद हो गए थे, जिससे रोजगार पर असर पड़ा. वर्तमान में यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा व्यापार और सर्विस सेक्टर पर आधारित है.
जादवपुर का भूभाग पूरी तरह शहरी और सपाट है, जैसा कि कोलकाता के दक्षिणी उपनगरों में देखा जाता है. यह इलाका सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. जादवपुर रेलवे स्टेशन यहां की एक प्रमुख कड़ी है. कोलकाता के केंद्र से यह क्षेत्र महज 12 किलोमीटर दूर है और इसके आसपास गरिया, टॉलीगंज और ढाकुरिया जैसे इलाके हैं.
2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी और माकपा से बहुत पीछे नहीं थी. यह संकेत था कि भाजपा यहां मजबूत विपक्ष के रूप में उभर रही है. 2026 का चुनाव बेहद रोचक होने वाला है. संभावना है कि यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले में बदल जाएगी, जहां थोड़े से वोटों का अंतर ही किसी भी पार्टी की जीत या हार तय कर सकता है.
(अजय झा)